पाकिस्तान में एक टीवी शो को लेकर हंगामा

<link type="page"><caption> पाकिस्तान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130306_international_others_pak_shia_killing_fma.shtml" platform="highweb"/></link> में शिक्षा से जुड़े मुद्दों के उठाने वाले एक टीवी शो को लेकर सोशल मीडिया पर भारी विवाद हो रहा है.
एक निजी टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाले इस शो को लेकर खासकर ब्लॉगर अपना विरोध जता रहे हैं.
उनका कहना है कि ये कार्यक्रम पश्चिमी विचारों का प्रोपेगेंडा करता है और गैर इस्लामी है. साथ ही वो इसे “राष्ट्रीय हितों के विपरीत” करार देते हैं.
वहीं इसके समर्थकों का कहना है कि ये शो <link type="page"><caption> सामाजिक बदलाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/03/130316_maria_woman_squash_rd.shtml" platform="highweb"/></link> का रास्ता तैयार कर रहा है.
पाकिस्तान शिक्षा के मामले में खासा पीछे माना जाता है. वहां निरक्षर और बीच में ही स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की बड़ी तादाद है.
संयुक्त राष्ट्र के एक हालिया सर्वे में 120 देशों के शिक्षा विकास सूचकांक में पाकिस्तान को 113वें स्थान पर रखा गया है. इस सर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में 51 लाख बच्चे स्कूल नहीं गए है जिनमें तीस लाख लड़कियां हैं.
हिट है ये शो
पाकिस्तानी अखबार डॉन में 18 मार्च को प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि ‘चल पढा’ नाम का ये टीवी कार्यक्रम निजी चैनल जियो टीवी पर प्रसारित होता है और शुरू होने के चंद ही हफ्तों में ये लोकप्रिय हो गया.
इस शो में एक लोकप्रिय गायक और सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद रॉय एक मोटरसाइकल पर पाकिस्तान के 80 शहरों में 200 स्कूलों का दौरा कर रहे हैं. कार्यक्रम की हर एक कड़ी में वो <link type="page"><caption> पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130305_pakistan_only_ski_school_sw.shtml" platform="highweb"/></link> को लेकर किसी एक नए मुद्दे पर बात करते हैं.
‘चल पढा’ कार्यक्रम जियो टीवी की खास मुहिम 'जरा सोचिए' का हिस्सा है जिसका मकसद शिक्षा और साक्षरता पर जागरुकता बढ़ाना है.
शिक्षा को बढ़ावा देने के अलावा ये कार्यक्रम पाठ्य पुस्तकों में दी गई लैंगिक और धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बातों को हटाने की भी वकालत करता है.
'चल पढा' को फेसबुक पर सक्रिय लोगों के बीच खासी लोकप्रियता हासिल है. ये अहम है क्योंकि फेसबुक पाकिस्तान में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली वेबसाइट है.
इस कार्यक्रम और इसके एंकर शहजाद रॉय के समर्थन में फेसबुक पर कम से कम 21 पेज और चार ग्रुप बनाए गए हैं.
इसके अलावा फेसबुक पर शहजाद रॉय के पेज को सवा दो लाख से ज्यादा 'लाइक' मिले हैं और साढ़े 27 हजार से ज्यादा लोग इसके बारे में 'बात करते हैं'.
उनके इस पेज पर 'चल पढा' के बारे में ताजा जानकारी भी दी जाती है.
‘पश्चिमी एजेंडा’

दूसरी तरफ बहुत से लोगों ने इस शो को लेकर पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण में शिकायतें दर्ज कराई हैं. उनका कहना है कि ये शो पश्चिमी विचारों को बढ़ावा देता है और इस्लाम की शिक्षाओं और पाकिस्तान के इस्लामी राष्ट्रीय मूल्यों के खिलाफ है.
सोशल मीडिया पर बहुत से ब्लॉगर इस कार्यक्रम का जम कर विरोध कर रहे हैं.
उनका कहना है कि ये कार्यक्रम ऐतिहासिक मुस्लिम शख्सियतों को लड़ाकू प्रवृत्ति वाला बताता है और स्कूली पाठ्य पुस्तकों में उनके बारे में दिए गए अध्यायों को हटाने की मांग करता है.
सत्ताधारी <link type="page"><caption> पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/12/121228_pakistan_bilawal_bhutto_sp_.shtml" platform="highweb"/></link> के प्रति मुख्यधारा के मीडिया में पूर्वाग्रहों का जवाब देने के लिए बनाए गए ब्लॉग क्रिटिकलपीपीपी ब्लॉग में शो के एंकर की तरफ से ‘दो राष्ट्रों वाले सिद्धांत’ पर दी गई जानकारी की आलोचना की है. भारत की आजादी के बाद इसी सिद्धांत के तहत हिंदू और मुसलमानों के लिए अलग अलग देश की बात उठी थी.
इस ब्लॉग की एक पोस्ट में कहा गया है, “अमरीकी और यूरोपीय लोग मदद के रूप में गैर सरकारी संगठनों, स्कूलों और इलेक्ट्रोनिक व प्रिंट पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं ताकि हमारे जीवन से धार्मिक सिद्धांतों को मिटा सकें और हमारे दिमागों को नियंत्रित कर सकें.”
वहीं 'पाकिस्तान का खुदा हाफिज' नाम के एक अन्य ब्लॉग में शो के एंकर के सुझाए परिवर्तन को 'मानसिक गुलामी' की संज्ञा दी गई है.
ये ब्लॉग कहता है, “ब्रितानी व्यवस्था वाली स्कूल पद्धति से मिले पापों से छुटकारा सबसे ज्यादा जरूरी है, जिसका हम आंख मूंद कर अनुकरण कर रहे हैं. ये पद्धति हमारी बुद्धिमत्ता को मार रही है.”
उधर ट्विटर पर 'फहद नईम' नाम के एक यूजर का कहना है, “शहजाद रॉय का नाम इतिहास की किताबों में एक गद्दार के तौर पर लिखा जाएगा जिसने प्राइमरी स्कूलों में इस्लामी शिक्षा को बर्बाद किया.”
सोशल मीडिया पर इस शो के विरोधी शहजाद रॉय और उनकी पत्नी के लिए कई तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके निजी और पेशेवर फोटो सर्कुलेट किए जा रहे हैं.
सामाजिक बदलाव का प्रेरक
इस शो के चलते अधिकारियों को शिक्षा व्यवस्था में मौजूद कुछ खामियों के खिलाफ कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है.

प्रांतीय सरकारों ने स्कूलों में बच्चों को शारीरिक दंड दिए जाने के खिलाफ कानून बनाए हैं. ये 'चल पढ़ा' की उस कड़ी के बाद उठाया गया है जिसमें एक बच्ची को इसलिए अपनी आंख गंवानी पड़ी क्योंकि एक अध्यापक ने उसे पेन मारा था.
यही नहीं, पाकिस्तानी संसद में भी एक विधेयक को मंजूरी दी गई है जिसके अनुसार शैक्षिक संस्थानों में बच्चों की पिटाई पर रोक लगा दी गई है.
'द न्यूज' अखबार में स्तंभकार गाजी सलाहुद्दीन लिखते हैं, “जब 'चल पढा' ने स्कूलों में बच्चों की पिटाई का मुद्दा उठाया था तो उसने इसे हमारे समाज में हर स्तर पर मौजूद हिंसा से जोड़ा. इससे इस बात को बल मिला कि हमारी सामूहिक चेतना में मौजूद बुराइयों से निपटने के लिए हमें सही शिक्षा और बेहतर परवरिश की जरूरत है.”
जानी मानी लेखक फाकिया हसन रिजवी कहती हैं, “चल पढ़ा पाकिस्तान में शैक्षिक आपातकाल की घोषणा करने के लिए एक और घंटी है. इसका मकसद देश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलावों का रास्ता तैयार करना है ताकि बेशुमार प्रतिभाशाली मोतियों को बचाया जा सके और पाकिस्तान की तकदीर को बदला जा सके.”
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. बीबीसी मॉनिटरिंग की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए यहाँ <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/news/world-18190302" platform="highweb"/></link>. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/bbcmonitoring" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/BBCMonitoring" platform="highweb"/></link> पर भी पढ़ सकते हैं.)












