'पागल हो गए हो, कराची जाओगे?'

जब 12 साल तक लंदन में काम करने के बाद मैनें कराची में पाकिस्तान संवाददाता के रूप में काम करने का फैसला किया तो लोगों ने पूछा कहीं वो पागल तो नहीं हो गए हैं?
"क्या आपका दिमाग खराब हो गया है? लोग उस देश को छोड़ना चाह रहे हैं और आप वहां वापस लौट रहे हैं?" मेरा फ़ैसला सुनकर मेरी मां की यही पहली प्रतिक्रिया थी.
मां का डर भी पूरी तरह से नाजायज़ नहीं था. पिछला साल <link type="page"><caption> कराची का सबसे खूनी साल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130303_karachi_blast_ss.shtml" platform="highweb"/></link> था जब 2000 से ज़्यादालोग गोली-बारी, बम धमाकों और बदला लेने के लिहाज़ से किए गए हमलों में मारे गए.
ये आधिकारिक आंकड़े हैं, असलियत में 1.8 करोड़ की आबादी वाले इस शहर में हताहत लोगों की संख्या इससे कहीं ज़्यादाहोगी.
बगल में रिवॉल्वर
<link type="page"><caption> कराची</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130321_karachi_taliban_ra.shtml" platform="highweb"/></link> में अपने कुछ पुराने दोस्तों से मिला. एक पुराना मित्र अब उद्योगपति बन गया है, उसे जब मैंने गले लगाया तो उसकी बेल्ट में कोई चीज़ महसूस हुआ. मुझे हैरान देखकर उसने अपनी जेब से 9 एमएम की पिस्तौल निकालते हुए कहा, "वैसे तो मैं अंधेरा होने के बाद घर से नहीं निकलता, लेकिन जब निकलता हूं तो पिस्तौल के बिना नहीं. ये शहर अब काफी बदल गया है."
और फिर बात छिड़ ही गई तो मेरे दोस्तों ने अपने किस्से सुनाए. ऐसे किस्से जिसमें एक मल्टीनैशनल कंपनी के अधिकारी को डाक में लिफ़ाफ़े में एक गोली मिली और एक नोट जिसपर लिखा था 'पैसे जल्दी दे दो नहीं तो हमें मालूम है कि आपका बच्चा किस स्कूल में पढ़ रहा है.'
कई किस्से सुनने को मिले, कुछ दिनदहाड़े लूट के तो कई निर्मम हत्याओं के.
इन डरावनी कहानियों का दौर चल ही रहा था कि मेरे पास एक टेक्स्ट संदेश आया जिसमें बताया गया हम जिस रेस्तरां में बैठे थे उसके करीब ही एक युवक की हत्या कर दी गई है. वो लड़का पाकिस्तान की टॉप मैनेजमेंट स्कूल का ग्रैजुएट था औऱ उसकी गाड़ी पर हमला बोला गया जिसमें वो अपने पिता के साथ मारा गया.
सचमुच <link type="page"><caption> कराची लहुलुहान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/" platform="highweb"/></link> नज़र आ रहा है. लेकिन यहां के मुख्यमंत्री कहते हैं कि सुरक्षा के हालात सुधर रहे हैं. यहां के बाशिंदों के लिए ये एक भद्दा मज़ाक ही है.
नियंत्रण से बाहर

आम पाकिस्तानी इस तथ्य से नावाकिफ़ हैं कि उनके देश में अमरीकी ड्रोन से मारे गए लोगों के मुकाबले कहीं ज़्यादा लोग कराची की सड़कों पर हलाक हुए हैं.
वैसे पाकिस्तान की वाणिज्यिक राजधानी कराची में ही सबसे ज़्यादापढ़े लिखे लोग रहते हैं. वहां देश के सबसे अच्छे युनिवर्सिटी और अस्पताल मौजूद है. कराची से पाकिस्तान को अपना 60 फीसदी टैक्स मिलता है.
लेकिन कराची आज एक डरावना सपना बन गया है.
हथियारबंद चरमपंथी, अल कायदा से संबंधित गुट और अपराधियों के गैंग यहां धड़ल्ले से अपना काम कर रहे हैं.
कई लोगों का कहना है कि कराची नियंत्रण से बाहर हो रहा है और ये परमाणु हथियार से लैस देश के लिए एक बेहद खतरनाक बात हो सकती है.
खतरा तो है ही और मैं भी आज तक अपने परिवार को समझा नहीं पाया हूं कि मैं कराची वापस क्यों आया हूं. लेकिन मेरे दिल को पता है कि इस शहर के मौजूदा हालात को ख़बरों के जरिए बताना एक सही फ़ैसला है.












