चिली:पाब्लो नेरूदा के अवशेषों की जाँच

1965 में पाब्लो नेरूदा बीबीसी से बात करते हुए.
इमेज कैप्शन, 1965 में पाब्लो नेरूदा बीबीसी से बात करते हुए.

चिली की अदालत ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि पाब्लो नेरूदा की मौत की जाँच के लिए उनके अवशेषों को निकाले जाने की तारीख तय कर दी है.

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का दल 8 अप्रैल को जाँच शुरू करेगा. विशेषज्ञ इस बात की पड़ताल करेंगे कि प्रसिद्ध कवि पाब्लो नेरूदा को 1973 में ज़हर दिया गया था या नही.

कवि और वामपंथी कार्यकर्ता पाब्लो नेरूदा की मृत्यु चिली में सैन्य तख्तापलट के बाद 12 दिनों के बाद हुई थी. इस तख्तापलट में समाजवादी राष्ट्रपति सल्वाडोर एलेंदो की जगह जनरल आगस्तो पिनोचेट सत्तासीन हुए थे.

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि के परिवार का कहना है कि पाब्लो नेरूदा की मौत 69 वर्ष की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ जाने चलते हुई थी.

पाब्लो नेरूदा के पूर्व ड्राइवर मैनुअल अराया ओसारियो के इन आरोपों के बाद कि उन्हें ज़हर दिया गया था, चिली की सरकार ने 2011 में उनकी मौत की जाँच शुरु की थी.

उनके अवशेषों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के पर्यवेक्षकों के दल में अर्जेंटीना और स्पेन के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे.

मौत के कारणों का जाँच

पाब्लो नेरूदा को राजधानी सैंटियागो के 120 किलोमीटर दूर स्थित ‘इसला नेग्रा” में उनकी पत्नी मेटिलडे उर्रुटिया के बगल में दफनाया गया है.

पाब्लो नेरूदा की विचारधारा साम्यवादी थी और वो राष्ट्रपति एलेंदो के मित्र थे.

नेरूदा सैन्य तख्तापलट के कट्टर आलोचक थ और उनकी इस आलोचना को देशद्रोह के रुप में देखा गया.

लेकिन ऐसा नही है कि सिर्फ नेरूदा की मौत की ही फिर से जाँच की जा रही है.

दरअसल इतिहास की उस अवधि के दौरान कई लोगों की मौत की जाँच हुई है.

2011 के दिसम्बर महीने में राष्ट्रपति एलेंदो के अवशेषों को निकाला गया था. जाँच में इस बात की पुष्टि हुई कि उन्होंने आत्महत्या की है.

इससे पहले उनकी मौत के बारे में तर्क दिए जाते थे कि उनकी मौत तख्तापलट के दौरान राष्ट्रपति के महल पर धावा बोलने वाले सैनिकों के हाथों हुई.