अमरीका: पाक पर लग सकती है पाबंदी

गैस पाइपलाइन
इमेज कैप्शन, आसिफ़ अली ज़रदारी और अहमदीनेजाद ने ईरान में गैस पाइपलाइन समझौते पर दस्तख़्त किए

अमरीका ने <link type="page"> <caption> पाकिस्तान-ईरान गैस पाइपलाइन</caption> <url href=" Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130311_iran_pak_gas_pipeline_rd.shtml" platform="highweb"/> </link> परियोजना पर अपनी आपत्ति जताते हुए कहा है कि अगर इस परियोजना पर सचमुच में काम आगे बढ़ता है तो पाकिस्तान को प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है.

सोमवार को ईरान और पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पाकिस्तान-ईरान गैस पाइपलाइन परियोजना का उदघाटन किया था.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता विक्टोरिया न्यूलैंड ने पत्रकारों से रोज़ाना की प्रेस ब्रिफ़िंग के दौरान इस परियोजना पर अमरीकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तान पर पाबंदी लगाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि जैसा कि दो सप्ताह पहले अमरीका ने कहा था कि अगर इस परियोजना पर काम आगे बढ़ता है तो अमरीका-ईरान प्रतिबंध क़ानून के तहत पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि अमरीका ने पाकिस्तान को इस बारे में अपनी स्थिति बता दी है.

ग़लत दिशा

अमरीकी प्रवक्ता का कहना था कि पहले भी कई बार कहा गया है कि गैस पाइपलाइन परियोजना की घोषणा कर दी गई है इसलिए अमरीका पहले देखेगा कि दरअसल इस परियोजना के बारे में क्या होता है.

<link type="page"> <caption> पाकिस्तान</caption> <url href=" Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/pakistan/2012/03/120301_gas_pipeline_ia.shtml" platform="highweb"/> </link> की ऊर्जा ज़रूरतों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमरीकी प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे समय में जब अमरीका और पाकिस्तान मिलकर साथ काम कर रहें हैं, अगर पाइपलाइन का काम आगे बढ़ा तो ये पाकिस्तान को ग़लत दिशा में ले जाएगा.

इससे पहले सोमवार को अमरीका के विरोध के बावजूद पाकिस्तान और ईरान को जोड़ने वाली विवादित गैस पाइपलाइन पर एक क़दम आगे बढ़ते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने इस परियोजना के दूसरे चरण का उदघाटन किया.

ईरान में पाइपलाइन का काम क़रीब-क़रीब पूरा हो गया है. अब पाकिस्तान में इसके निर्माण की शुरुआत हुई है.

अगले दो साल में कुल 780 किलोमीटर पाइपलाइन तैयार की जानी है.

पाकिस्तान में माना जाता है कि ये बहुप्रतीक्षित पाइपलाइन देश के गंभीर ऊर्जा संकट को कम करने में मदद कर सकती है.

इस पाइपलाइन परियोजना पर 1994 में बात शुरू हुई थी और शुरुआत में इसे भारत तक गैस सप्लाई करनी थी. लेकिन 2009 में भारत इस समझौते से बाहर हो गया था.