गांधीजी का लिखा ख़त 96 लाख में बिका

महात्मा गांधी के लिखे ख़त की नीलामी से पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि वो ख़त ज़्यादा से ज़्यादा 10 से 15 हज़ार पाउंड यानी लगभग आठ से बारह लाख के बीच में बिकेगा. लेकिन जब नीलामी हुई तो नतीजा कुछ और निकला.
महात्मा गांधी का लिखा सिर्फ़ एक पत्र लगभग 96 लाख रूपए में बिका.
<link type="page"> <caption> गांधी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130130_gandhi_letters_ml.shtml" platform="highweb"/> </link> ने वो ख़त 1943 में लिखा था जब अंग्रेज़ों ने उन्हें क़ैद कर रखा था.
उस ख़त में गांधी ने अपनी आज़ादी की गुहार लगाई थी.
ब्रिटेन में लडलो के शहर श्रौपशायर में हुए नीलामी के बाद नीलामी करने वाली संस्था मलौक्स के मालिक रिचर्ड वेस्टवुड ब्रुक्स ने कहा, "मुझे यक़ीन है कि किसी भी भारतीय नेता के ज़रिए लिखे गए पत्र की अबतक की ये सबसे बड़ी क़ीमत लगी है."
ब्रुक्स के अनुसार गांधी का ये ख़त एक भारतीय नागरिक के पास था जो स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी के साथ थे.
<link type="page"> <caption> वो घर जहां पैदा हुए थे महात्मा गांधी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/10/121002_gandhi_home_pix_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link>
ब्रुक्स के मुताबिक़ भारतीय नागरकि ने वो ख़त इसलिए नीलाम कर दिया क्योंकि उससे मिलने वाली रक़म के ज़रिए उन्हें अपने घर का ख़र्च चलाना था.
ख़त पर बंदीगृह का पता लिखा है और 26 अक्तूबर, 1943 की तारीख़ पड़ी हुई है.
ब्रुक्स के मुताबिक़ ये ख़त अब तक नीलाम किए गए गांधी के महत्वपूर्ण ख़तों में से एक है क्योंकि इससे भारत की आज़ादी के लिए गांधी की ख़ुफ़िया बातचीत का पता चलता है.
भारत के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव को लिखे गए इस ख़त में गांधी अपनी और अपने समर्थकों की रिहाई की अपील करते हैं.
इसी संस्था ने पिछले साल गांधी के चश्मे और उनकी कुछ धार्मिक किताबें नीलाम की थीं.












