चीन और अमरीका को नज़दीक लाने वाले की मौत

चीन और अमरीका के बीच 1970 के दशक के बीच तल्खी को कम करने में अहम भूमिक निभाने वाले चीन के टेबल टेनिस खिलाड़ी जुआंग डुंग का 73 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया है.

उनके द्वारा उठाए गए कदमों को ‘पिंग पॉन्ग डिप्लोमेसी’ के नाम से जाना जाता है.

जुआंग ने 1971 में जापान में हुए एक मुकाबले में अमरीकी खिलाड़ी ग्लेन कान को एक सिल्क की पेंटिंग भेंट की थी. जिसके बाद हुए घटनाक्रम में अमरीका की टीम ने उसी साल चीन का दौरा किया.

उसके बाद 1972 में अमरीका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन का दौरा भी किया. किसी अमरीका राष्ट्रपति का कम्युनिस्ट चीन का ये पहला दौरा था.

इस दौरे ने चीन के लिए विश्व के दरवाज़े खोल दिए और शीत युद्ध के शक्ति संतुलन को बदल दिया.

अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन ने उपने चीन दौरे के बारे में कहा था, “वो सप्ताह जिसने दुनिया को बदल दिया.”

चीन और अमरीका के 1979 में संबध सामान्य हो गए थे.

पिंग पॉन्ग डिप्लोमेसी

जापान के नगोया में हुए विश्व चैंपियनशिप मुकाबले के दौरान अमरीकी खिलाड़ी ग्लेन कान की अमरीकी टीम बस छूट गई थी. जिसके बाद चीन की टीम ने उन्हें अपनी बस में मैदान तक पहुंचाया.

जुआंग डुंग ने 2007 में रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि उनके साथियों ने अमरीकी खिलाड़ी को टीम बस में बुलाने के मना किया था लेकिन उन्हें साथियों की सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया था.

अपने दुभाषिए की मदद से जुआंग डुंग ने कहा, “हालांकि अमरीकी सरकार के चीन के साथ दोस्ताना संबध नहीं है लेकिन अमरीकी लोग चीनी लोगों के दोस्त हैं. मैं तुम्हें ये तस्वीर चीनियों की अमरीकियों से दोस्ती की निशानी के तौर पर दे रहा हूं”

जैसे ही दोनों की मुलाकात की ये तस्वीरें अखबारों में आई,चीन के नेता माओत्से तुंग ने तुरंत विदेश मंत्रालय को आदेश दिए की अमरीकी टीम को चीन आने का न्योता दिया जाए.

बताया जाता है कि माओत्से तुंग ने कहा, “जुआंग डुंग ना सिर्फ ये जानते हैं कि शानदार पिंग पॉन्ग कैसे खेला जाए बल्कि ये भी जानते हैं कि शानदार डिप्लोमेसी कैसे की जाए.”

जुआंग डुंग तीन बार के विश्व चैंपियन और 1960 के दशक में चीन में बड़े खिलाड़ी की पहचान रखते थे.

वो खेल मंत्री भी रहे और उन्हें कम्यूनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य भी चुना गया.

लेकिन 1976 में माओ की मौत के बाद जुआंग डुंग को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें टेबल टेनिस खेलने से रोक दिया गया. वो 1985 में ही आंतरिक निर्वास से वापस लौटे.

अमरीकी खिलाड़ी ग्लेन कान की 2004 में मौत हो गई थी.