माली में आतंकवाद खत्म नहीं हुआ: फ्रांसीसी राष्ट्रपति

इस्लामी विद्रोहियों के खिलाफ़ माली में अभियान के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसस्वा ओलांड ने कहा है कि ये मान लेना गलत होगा कि माली में आंतकवाद खत्म हो गया है.
राष्ट्रपति फ्रासस्वा ओलांद ने ये बयान टिंबकटू पहुंचकर दिया है. हाल ही में फ्रांसीसी सेनाओं ने टिंबकटू पर फिर कब्ज़ा किया है. टिंबकटू पहुंचे ओलांड का हज़ारों लोगों ने नारे लगाकर स्वागत किया. उन्होंने कहा कि फ्रांस माली में पुनर्निमाण में मदद केरगा.
फ्रांस्वां ओलांड शनिवार को अपने रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री के साथ माली पहुँचे थे जहां माली के अंतरिम राष्ट्रपति डियोगकूंडा ट्राआव्रे ने हवाईअड्डे पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति से मुलाकात की.
इसके बाद दोनों नेता हवाईजहाज़ से टिंबकटू पहुंचे और 700 साल पुरानी मिट्टी से बनी मस्जिद और अहमद बाबा संस्थान भी गए. चरमपंथियो ने इस संस्थान में रखी अमूल्य 2000 पांडुलिपियों में भी आग लगा दी थी.
ओलांड ने कहा कि फ्रांसीसी सैनिक तब तक माली में रहेंगे तब तक उनकी वहां ज़रुरत हैं.
इस बीच नरसंहार रोकने के मामलों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सलाहकार अदामा जंग ने कहा है कि माली की सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं. इसमें सामूहिक हत्या से लेकर लोगों को गायब करने तक के आरोप शामिल हैं
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का कहना था कि आतंकवादियों समते सभी के मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए. उन्होने कहा कि विश्व की नज़र माली पर है और सामूहिक न्याय को नकारा नहीं जा सकता.
जवाबी हमलों की आशंका
वहीं संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि उत्तर के तवारैग और अरब्स समुदायों पर जवाबी हमले हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने कहा कि इस तरह की खबरें भी आई है कि तवारैग और अरब समुदाय के लोगों को सरेआम मारा गया है और उनके परिसरों को लूटा गया है.
तवारैग और अरब समुदाय के लोगों पर आरोप लगते रहे हैं कि उन्होने हथियारबंद इस्लामी संगठनों का सहयोग किया था.
मानवाधिकार उल्लंघन के ये आरोप ऐसे समय में लग रहे हैं जब फ्रांसीसी और माली सेना उत्तरी माली में आगे बढ़ रही है.
उत्तर-पश्चिमी शहर किदाल के हवाई अड्डे पर कब्ज़ा किए जाने के बाद अब सेनाओं की कोशिश है कि शहर पर कब्ज़ा किया जाए. ये शहर चरमपंथी विद्रोहियों का आखिरी गढ़ है.












