आर्मस्ट्रांग को लेकर चौतरफ़ा निंदा और निराशा

मशहूर साइकिलिस्ट लांस आर्मस्टांग की ओर से डोपिंग के आरोप कबूल लेने की चर्चा दुनिया भर के मीडिया में छाई हुई है.
अंतरराष्ट्रीय मीडिया का कहना है कि अमरीकी टीवी एंकर ओप्रा विन्फ्री के साथ इंटरव्यू में आर्मस्ट्रांग ने इस उम्मीद के साथ आरोप कबूले होंगे कि इससे उन्हें अपनी छवि को हुए नुकसान से उबरने में मदद मिलेगी, लेकिन ये इतना आसान नहीं है.
41 वर्षीय आर्मस्ट्रांग ने माना कि साल 1999 से 2005 तक लगातार सात बार जीते गए उनके टूअर डि फ्रांस खिताबों के लिए उन्होंने प्रदर्शन को बढ़ाने वाली दवाओं का सहारा लिया था.
उन्होंने यहां तक कहा है कि डोपिंग के बिना उनका जीतना ही मुमकिन नहीं था.
निशाने पर आर्मस्ट्रांग
अमरीका के 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने लिखा है कि आर्मस्ट्रांग के इंटरव्यू को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इसकी उन्होंने काफी पहले से तैयारी की थी.
वहीं 'न्यूयॉर्क पोस्ट' का कहना है कि आर्मस्ट्रांग इस इंटरव्यू में उतने ही स्वाभाविकता और दक्षता के साथ सच बोल गए जैसे वो इतने बरसों तक झूठ बोलते रहे.

अखबार कहता है कि उनके इस कबूलनामे को किसी व्याख्या की जरूरत नहीं है. लेकिन आर्मस्ट्रांग ने विस्तार से ब्यौरा नहीं दिया है जिससे कई जानकारों को निराशा हुई है.
लेकिन जर्मनी के 'ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग' का कहना है कि आर्मस्टांग ने बातें तो बहुत की लेकिन कुछ भी नया नहीं कहा.
वहीं स्पेन के अखबार 'एबीसी' का कहना है कि आर्मस्ट्रांग के आरोप कबूलने से उन लोगों के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा है जिन्होंने इन रेसों को देखा और आर्मस्ट्रांग को एक आदर्श माना.
वहीं फ्रांस के 'ला मोंदे' का कहना है कि आर्मस्ट्रांग ने आरोप तो कबूले हैं लेकिन उन्हें देख कर ये नहीं लगता है कि उन्हें इसका पछतावा है.
वहीं चीन के अखबारों में आर्मस्ट्रांग से सहानुभूति दिखती है. 'पीपल्स डेली' लिखता है कि हर कोई आर्मस्ट्रांग की निंदा कर रहा है. भले ही आर्मस्ट्रांग ने दुनिया से बरसों झूठ बोला हो, लेकिन उन्होंने लिवस्ट्रांग फाउंडेशन भी बनाया था जो कैंसर से पीड़ित लोगों की मदद कर रहा है.












