ईरान: तेल की कमाई में 45 फ़ीसदी गिरावट

पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते पिछले नौ महीनों में ईरान को तेल से होने वाली कमाई में 45 प्रतिशत तक की कमी आई है.
एक प्रमुख ईरानी नेता ग़ुलाम रज़ा कातिब ने कहा है कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था मुश्किल में है. कातिब ईरान की राष्ट्रीय योजना एवं बजट समिति के सदस्य हैं.
बढ़ते संकट का एक और सूचक ये भी है कि तेल मंत्रालय ने कुछ उन एयरलाइंस को ईंधन देना बंद कर दिया है जिन्होंने पूरा बिल नहीं चुकाया है.
ईरान को जितना भी राजस्व मिलता है उसमें तेल निर्यात का ही सबसे बड़ा हिस्सा होता है.
कातेब ने कहा कि तेल मंत्री रुस्तम क़ासेमी की एक संसदीय रिपोर्ट में निर्यात में इस कमी का ज़िक्र किया गया है.
कातेब ने इसना समाचार एजेंसी को बताया, "रिपोर्ट के आधार पर पिछले नौ महीनों में तेल की बिक्री में 40 फ़ीसदी तक की कमी आई है और आय में 45 फ़ीसद गिरावट."
हाल के महीनों में तेल मंत्री इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि ईरान ने तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों का बख़ूबी सामना किया है.
उड़ानें रद्द
इस बीच बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स के अनुसार कई एयरलाइंस को अपनी उड़ानें तक रद्द करनी पड़ी हैं. राष्ट्रीय उड्डयन कंपनी ईरान एयर की उड़ानों पर वैसे कोई असर नहीं पड़ा है.
वैसे तो ये विवाद अगले कुछ दिनों में सुलझा लिए जाने की संभावना है मगर जिस तरह उड़ानें रद्द हो रही हैं वो दिखाता है कि ईरान की अर्थव्यवस्था संकट में है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार ईरान की सरकार को धन के लिए इन निर्यात पर काफ़ी हद तक निर्भर रहना पड़ता है.
साल 2011 से अब तक रियाल की क़ीमत 80 प्रतिशत तक गिर चुकी है क्योंकि अमरीका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को देखते हुए उस पर कई व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए हैं.
अमरीका और यूरोपीय संघ की ओर से ईरान पर आरोप लगता रहा है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है मगर ईरान ज़ोर देकर कहता है कि वह सिर्फ़ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में विकास कर रहा है.
ईरान पर अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के तहत संयुक्त राष्ट्र ने उसे हथियारों के निर्यात और परमाणु प्रौद्योगिकी के निर्यात पर रोक लगा रखी है. इसके अलावा यूरोपीय संघ ने वित्तीय लेन-देन रोक रखा है और कच्चा तेल भी वहाँ से नहीं ख़रीदा जा रहा है.
अमरीका ने तो ईरान से लगभग हर तरह के व्यापार पर रोक लगाई है.












