तीन साल बंधक रहने के बाद छुडा़ए गए भारतीय

समुद्री डाकू
इमेज कैप्शन, ऐसा कहा जाता है कि सोमालिया के तट पर बीते दो वर्षों में समुद्री डाकुओं के हमलों में कमी आई है

अधिकारियों का कहना है कि सोमालिया के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र पुंटलैंड से 22 बंधकों को समुद्री लुटेरों के कब्जे से छुड़ाया गया है जिन्हें लगभग तीन वर्ष पहले अगवा किया गया था.

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, पुंटलैंड बंदरगाह और समुद्री डाकुओं के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित मंत्री सईद मोहम्मद रागे का कहना है कि इन बंधकों में पांच भारतीय भी शामिल हैं.

उनका कहना है कि रिहा कराए गए अन्य लोगों में यमन के आठ, पाकिस्तान के दो, घाना के चार, सूडान के दो और फिलीपिनो का एक नागरिक शामिल है.

पुंटलैंड सरकार का कहना है कि ये सभी बंधक पनामा के एमवी आइसबर्ग-1 नामक जहाज पर सवार थे जिन्हें सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद रिहा कराया गया है.

संयुक्त राष्ट्र के समुद्री-डाकू निरोधी कार्यक्रम के प्रमुख एलन कोल का कहना है कि एमवी आइसबर्ग-1 उन जहाजों में से एक है जिन्हें समुद्री डाकुओं ने सबसे अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा.

शारीरिक प्रताड़ना

इस जहाज को यमन के तट से साल 2009 में अगवा किया गया था. इसके बाद से ही जहाज और इसमें सवार लोगों को मुडुग इलाके के गाराड गांव के पास बंधक बनाकर रखा गया था.

सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ''इन लोगों को दो साल नौ महीने बंधक बनाकर रखा गया. इस दौरान उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया. ये लोग बीमार भी पड़ गए थे.''

बयान में कहा गया है, ''सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है और अब उनकी चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है.''

हमलों में कमी

अधिकारियों ने बताया कि उनके समुद्री सुरक्षा बलों ने इन बंधकों की रिहाई के लिए दो हफ्ते पहले कार्रवाई शुरू की थी.

सोमालिया के तट पर समुद्री डाकुओं के हमले की घटनाएं बीते दो वर्षों में पहले के मुकाबले कम हुई हैं.

बीबीसी संवाददाता मैरी हार्पर का कहना है कि जहाजों पर निजी सुरक्षाकर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं और गश्ती दल के साथ बेहतर तालमेल हो रहा है जिसकी वजह से ऐसी घटनाओं में कमी आई है.

उनका ये भी कहना है कि समुद्री डाकुओं के खिलाफ सोमालिया के सुरक्षा बल इस तरह की कार्रवाई आमतौर पर नहीं कर पाते हैं.