विश्व मीडिया ने मोदी पर उठाए कई सवाल!

गुजरात विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत की गूंज अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी सुनाई दी है. विश्व मीडिया की कुछ टिप्पणियों में कहा गया है कि इससे भारत में ‘हिंदुत्व की राजनीति’ की वापसी हो सकती है.
मोदी की जीत पर बेशक उनके समर्थक जश्न मना रहे हैं, लेकिन विश्व मीडिया में कई सवाल पूछे जा रहे हैं.
ब्रिटेन के 'इंडिपेंडेंट' अखबार ने मोदी को ‘हिंदू कट्टरपंथी’ कहा है तो पाकिस्तान का अखबार न्यूज ट्रिब्यून लिखता है कि इस जीत से ‘धर्मनिरपेक्ष’ भारत में 'सांप्रदायिक राजनीति' की वापसी हो सकती है.
पाकिस्तान के कई अखबारों ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि गुजरात में जीतने के बाद प्रधानमंत्री पद पर मोदी की दावेदारी मजबूत होगी.
बड़ी भूमिका
'डॉन' अखबार ने गुजरात में मोदी जीते, बड़ी भूमिका पर नज़र शीर्षक से लिखा है कि उनकी पार्टी को गुजरात में पिछली बार से कुछ कम सीटें मिलती हैं लेकिन इस जीत के बाद मोदी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के और करीब आ गए हैं.
अखबार के अनुसार मोदी को रतन टाटा और अंबानी बंधुओं से जैसे नामी उद्योगपतियों का समर्थन पहले ही प्राप्त है.

अमरीका के 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने लिखा है कि मोदी ने चुनाव प्रचार तो गुजराती भाषा में किया लेकिन जीत के बाद टीवी कैमरों के सामने उन्होंने अपना भाषण हिंदी में दिया, जो साफ तौर पर उनके भावी इरादों की झलक देता है. हिंदी के जरिए वो छह करोड़ गुजरातियों से परे देश के एक बड़े हिस्से से मुखातिब थे.
ब्रिटेन के 'गार्डियन' ने माना है कि मोदी जनमत को बांटने की क्षमता रखते हैं और इसलिए अखबार ने उन्हें 'विभाजन की राजनीति' करने वाला नेता बताया है. अखबार का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का रुतबा तो बढ़ा है लेकिन 2002 के गुजरात दंगों में भूमिका से जुड़े आरोप उनका खेल खराब कर सकते हैं.
चीन के साउथ मॉर्निंग चाइना पोस्ट ने उन्हें 'हिंदू राष्ट्रवादी' कह कर संबोधित किया है. ब्रिटेन के इंडिपेंडेंट ने भी उन्हें यही कह कर पुकारा है. अखबार में मोदी का बयान है, “मतदाता जानते हैं कि उनके लिए क्या अच्छा है. मतदाताओं की नज़र भविष्य पर है.”
वहीं, पाकिस्तान के अखबार 'नेशन' ने लिखा है कि मोदी अपनी जीत को ‘विकास की राजनीति की जीत’ बता रहे थे लेकिन उनके समर्थक “पीएम, पीएम” के नारे लगा रहे थे.












