सामाजिक आंदोलन के लिए कन्या पूजा

आयोजकों का दावा है कि बुधवार को नेपाल में अब तक की सबसे बड़ी कन्या पूजा की गई.
पश्चिमी नेपाल के नवलपरासी ज़िले के रामनगर में कन्या पूजा का आयोजन किया गया जिसमें 11, 111 लड़कियां शामिल थीं. कन्या पूजा हिंदूओं का धार्मिक रिवाज़ है जिसमें लड़कियों को देवी का रूप मान कर उनकी पूजा की जाती है.
पूजा के आयोजक, ब्रह्मांडिया सनातन धर्म महासभा का कहना है कि बराबरी और सामाजिक समानता का संदेश फैलाने के लिए उन्होंने इसमें सभी जाति और समुदायों की बच्चियों को शामिल किया.
बीबीसी नेपाली सेवा के माधव नेपाल का कहना है कि कार्यक्रम से पहले एक बड़ी रैली आयोजित की गई थी जिसमें पारंपरिक वेशभूषा पहने विभिन्न समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया.
सामाजिक आंदोलन
वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा की गई. इनमें से कई लड़कियां स्कूल की वर्दी पहने थीं. आयोजन समिति के अध्यक्ष भरत राज पाउडल ने बताया, "देवी भगवती का अवतार समझे जाले वाली कन्याओं की पूजा करना हमारी वैदिक परंपरा है."
उनका ये भी कहना था कि पूजा इस तरह से की गई जिससे 'सामाजिक आंदोलन' आए और 'छुआछूत' जैसी परंपराओं का अंत हो. उन्होंने कहा, "हम जातीय विद्वेष को दूर करना चाहते हैं."
हाल के दिनों में नेपाल में संविधान तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान देश के पुनर्गठन के स्वरूप पर बहस के बाद जातीय विद्वेष के मामले सामने आए हैं. जनजाति नाम के मूल निवासियों के एक समुदाय के कुछ वर्ग जातीय पहचान के आधार पर प्रांतों के सीमांकन की मांग करते रहे हैं. ये समुदाय ब्राह्मणों और क्षत्रियों के 'राजनीति में आधिपत्य' का भी विरोध कर रहे हैं.
कन्या पूजा की विधि के बाद दो सप्ताह तक महायज्ञ होता है. आयोजकों के मुताबिक महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य हिंदू परंपराओं, फलसफ़े और जीवन मूल्यों का संरक्षण है.
इस कार्यक्रम के लिए भारत से भी पंडितों को आमंत्रित किया गया है.
छह वर्ष पहले नेपाल एक हिंदू राष्ट्र से धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र बना था.












