
अन्ना हजारे भारत में भ्रष्टाचार विरोधी हालिया मुहिम के अगुवा रहे हैं
दुनिया भर में भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा सूची पर नजर डालें तो भारत को भ्रष्टाचार से दामन बचाने में अब भी लंबा रास्ता तय करना है.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 2012 के लिए अपनी सूची जारी कर दी है जिसमें 176 देशों को वहां पाए जाने वाले भ्रष्टाचार के अनुसार 0 से 100 बीच अंक दिए गए हैं.
यानी जिस देश को जितने ज्यादा अंक दिए गए हैं, वहां उतना ही कम भ्रष्टाचार है.
90 अंकों के साथ डेनमार्क, फिनलैंड और न्यूजीलैंड पहले पायदान पर हैं और वहां सबसे कम भ्रष्टाचार है. दूसरी तरफ आठ अंकों के साथ उत्तर कोरिया, सोमालिया और अफगानिस्तान दुनिया के सबसे भ्रष्ट देश हैं.
सबसे कम भ्रष्ट देश
- डेनमार्क
- फिनलैंड
- न्यूजीलैंड
- स्वीडन
- सिंगापुर
सबसे ज्यादा भ्रष्ट
- अफगानिस्तान
- उत्तर कोरिया
- सोमालिया
- सूडान
- म्यांमार
भारत को इस सूची में 36 अंकों के साथ 94वें स्थान पर रखा गया है. पिछले साल तैयार की गई 183 देशों की सूची में भारत को 95वां स्थान दिया गया था.
भ्रष्टाचार का पैमाना
दक्षिण एशिया के जिन देशों में भारत से ज्यादा भ्रष्टाचार होने का अनुमान जताया गया है उनमें 139वें स्थान पर पाकिस्तान और नेपाल और 144वें स्थान पर बांग्लादेश है.
वहीं श्रीलंका और भूटान में भारत से कम भ्रष्टाचार बताया गया है. इस सूची में श्रीलंका को 79वें और भूटान को 33वें स्थान पर रखा गया है.
अमरीका को इस सूची में 19वें स्थान पर रखा गया है, जबकि पिछले साल तैयार की गई सूची में उसे 24वें स्थान पर रखा गया था.
जर्मनी को 2012 की सूची में 13वें स्थान पर रखा गया है. उसकी स्थिति में एक पायदान की बेहतरी हुई जबकि जापान 17वें स्थान पर बना हुआ है.
ब्रिटेन को भी 17वां स्थान दिया गया है. फ्रांस 22वें पायदान पर है.
एशिया में सबसे तेजी से उभरते हुए चीन को इस सूची में 80वें स्थान पर रखा गया है. यानी वहां भारत से कम भ्रष्टाचार है.
वहीं संकट से जूझ रहे ग्रीस के सरकारी क्षेत्र को यूरोपीय संघ में सबसे भ्रष्ट बताया गया है. यूरोप के अन्य संकटग्रस्त देश पुर्तगाल, आयरलैंड और इटली में भी भ्रष्टाचार बढ़ा है.
इसके अलावा अरब देश में हो रही क्रांतियों के बावजूद वहां भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा है.








