मिस्र में 15 दिसंबर को जनमत संग्रह

मिस्र प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, मिस्र में विरोधियों और मुर्सी के समर्थकों के बीच संघर्ष हो रहा है

मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने कहा है कि देश के नए संविधान के मसौदे पर 15 दिसंबर को जनमत संग्रह होगा.

उन्होंने ये घोषणा इस्लामी बहुमत वाली संविधान सभा के सामने की जिसने इस हफ्ते की शुरुआत में इस मसौदे को स्वीकृति दी थी.

मुर्सी के दो फैसलों ने हाल के दिनों में राष्ट्रपति के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन को भड़का दिए थे. ये दो फैसले थे- संविधान का मसौदा और एक विवादास्पद आदेश के ज़रिए राष्ट्रपति को असीमित अधिकार हासिल करना.

लेकिन शनिवार को राजधानी काहिरा में मुर्सी के समर्थन में भी एक रैली हुई. इसके अलावा दूसरे शहरों में भी मुर्सी के समर्थकों ने प्रदर्शन किया. रैली ऐसे समय में हुई जब मिस्र में मुर्सी के समर्थक और विरोधी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.

संविधान के मसौदे की प्रति मिलने के बाद मोहम्मद मु्र्सी ने "सभी मिस्रवासियों" से जनमत संग्रह में हिस्सा लेने का आह्वान किया, चाहें वो उसके पक्ष में हों या विपक्ष में.

आरोप

मुर्सी के विरोधियों का आरोप है कि संविधान का मसौदा इस्लामी बहुल विधानसभा में शुक्रवार को आनन-फानन में पारित करा लिया गया.

विपक्ष के एक अहम नेता मोहम्मद अलबरादेई ने शनिवार को ट्विटर पर कहा, "मुर्सी संविधान के जिस मसौदे पर जनमत संग्रह करा रहे हैं वो बुनियादी स्वतंत्रता को कमज़ोर और सर्वव्यापी मूल्यों का हनन करता है."

अगर ये मसौदा पारित हो जाता है, तो नया संविधान अब तक की सभी संवैधानिक घोषणाओं को खारिज कर देगा. साथ ही इसके तहत नई संसद का चुनाव 60 दिनों में होना चाहिए.

मसौदे में सेना पर किसी तरह के नागरिक नियंत्रण की बात भी है.

समर्थन रैली

शनिवार को मुर्सी के हजारों समर्थक हाथों में तख्तियां, बैनर, पोस्टर और मुर्सी की तस्वीर लिए काहिरा विश्वविद्यालय के बाहर जमा हुए.

वे लोग चिल्ला रहे थे, “जनता राष्ट्रपति का समर्थन करती है. जनता अल्लाह के संविधान पर अमल चाहती है.”

प्रदर्शन की वजह से सड़कें जाम हो गई थीं, हालांकि बाद में भीड़ को नियंत्रित कर लिया गया.

वहीं मुर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और बीस अन्य लोग घायल हो गए.

मिस्र में विरोध प्रर्दशन
इमेज कैप्शन, मुर्सी के दो फैसलों ने हाल के दिनों में राष्ट्रपति के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन भड़का दिए थे.

मुर्सी के समर्थक और मुस्लिम ब्रदरहुड के लोगों ने विशाल रैली के जरिए लोगों को ये दिखाने की कोशिश की कि रास्ट्रपति को इन मुद्दों पर कितना समर्थन हासिल है.

विरोध

इस बीच तहरीर चौक पर सरकार विरोधी लोगों का प्रदर्शन लगातार नौंवें दिन भी जारी रहा.

राष्ट्रपति मुर्सी ने नए कानून के जरिए जो शक्तियां हासिल की हैं उन्हें कहीं चुनौती नहीं जा सकती है.

मुर्सी का कहना है कि जनमत संग्रह के बाद नए संविधान को मंजूरी मिलने के साथ ही वो अपनी असाधाराण शक्तियों को खुद-ब-खुद त्याग देंगे.

मुर्सी ने ऐसे बहुत से जजों को किनारे कर दिया है जो जनमत संग्रह की निगरानी करते.

दरअसल राष्ट्रपति मुर्सी को मिले इस अधिकार ने अदालत की ताकत छीन ली है. जजों में ज्यादातर तो मुबारक के जमाने में ही नियुक्त हुए हैं उनमें से कइयों ने मुर्सी का विरोध किया है.

हालांकि मुर्सी कहते हैं कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं.