एक्जिट पोल के मुताबिक चार अहम प्रांत ओबामा के पक्ष में

अमरीका के राष्ट्रपति पद के चुनावों के एक्जिट पोल के अनुसार ओबामा ने न्यू हैम्पशयर और विस्कॉन्सिन के साथ-साथ मिशिगन और पेन्नसिलवेनिया के स्विंग स्टेच यानी कांटे की टक्कर के राज्य जीत लिए हैं.

मिशिगन और पेन्नसिलवेनिया में रोमनी के जीतने की संभावना थी. इस चुनाव को अमरीकी इतिहास में लड़े गए सबसे करीबी चुनावों में से एक माना जा रहा है.

लाखों की संख्या में अमरीकी मतदाताओं ने देश का नया राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान किया है और अब रुझानों के साथ-साथ नतीजे आने शुरु हो गए हैं.

<link type="page"> <caption> कहाँ कहाँ है कांटे की टक्कर?</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/10/121003_usa2012_battleground_guide.shtml" platform="highweb"/> </link>

पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि दोनों उम्मीदवारों में से कोई भी जीते लेकिन दोनों के मतों के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं होगा. अमरीका में किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए 270 मतों की जरूरत है. जिस प्रांत में किसी भी उम्मीदवार को ज्यादा मत मिलते हैं, उस पूरे प्रांत के इलेक्टोरल वोट उसी उम्मीदवार की झोली में चले जाते हैं.

अमरीका के डेलावेयर विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉक्टर मुक़्तदर खान ने बीबीसी को बताया, "फ्लोरिडा और वर्जीनिया में ओबामा और रोमनी के बीच इतनी कड़ी टक्कर हुई है कि ओबामा के समर्थकों को इसकी उम्मीद नहीं थी. ओबामा ओहायो में आगे चल रहे हैं और यदि वे ओहायो जीतते हैं तो रोमनी को फ्लोरिडा, वर्जीनिया, पेन्नसिलवेनिया जीतना होगा...नहीं तो ओबामा बने रहेंगे...मेरी सलाह - यदि ओबामा ओहायो जीत जाते हैं, तो अपने-अपने काम पर जाएँ क्योंकि वे ही राष्ट्रपति बनेंगे...." <link type="page"> <caption> </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/10/121003_usa2012_battleground_guide.shtml" platform="highweb"/> </link>

'आऊटसोर्सिंग पर बहस, चीन रहे सतर्क'

उधर अमरीका में बसे दक्षिण एशियाई नागरिकों के बारे में वरिष्ठ भारतीय पत्रकार इंदर मल्होत्रा ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य गिनाए.

इंदर मल्होत्रा कहते हैं, "अधिकतर दक्षिण एशियाई लोग डेमोक्रेट राष्ट्रपति के पक्ष में वोट करते हैं लेकिन मेरा अमरीका में पिछले तीन महीने का अनुभव बताता है कि जो दक्षिण एशियाई लोग व्यवसाय और उद्योग जगत में सक्रिय हैं वो मानते हैं कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति अर्थव्यवस्था को बेहतर संभाले. कहना मुश्किल है लेकिन दक्षिण एशियाओं के वोट में कुछ विभाजन संभव है."

<link type="page"> <caption> देखे: तस्वीरों में मतदान </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/11/121106_america_polling_picturegallery_ss.shtml" platform="highweb"/> </link>

इंदर मल्होत्रा ने बीबीसी हिंदी के रेडियो कार्यक्रम में कहा, "चाहे ओबामा राष्ट्रपति बनें या फिर रोमनी, भारत के लिए कोई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव नहीं होंगे. लेकिन ओबामा ने लगातार आऊटसोर्सिंग की बात कही है जिससे भारत में चिंता जरूर होगी. लेकिन रोमनी ने जिस तरह से चीन के विरुद्ध बातें कही हैं और यदि वे राष्ट्रपति बनने के बात उस पर कायम रहते हैं तो उससे तो वैश्विक व्यापार जंग शुरु हो सकती है. मेरे हिसाब से अगले राष्ट्रपति की सबके बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था ही बनी रहेगी."

उधर डेलावेयर विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉक्टर मुक़्तदर खान कहते हैं, "ओबामा के लिए आर्थिक स्थिति का सुधरना एक महत्वपूर्ण मुद्दा था लेकिन वो इस दिशा में ज्यादा कामयाब नहीं हो पाए हैं...एक राष्ट्रपति, कोई भी राष्ट्रपति अपने आप से ये बदलाव नहीं ला सकता है...ये बहुत ही धीमी प्रक्रिया होती है. जहाँ तक आऊटसोर्सिंग का सवाल है तो भारत को जहाँ अमरीका बीपीओ आऊटसोर्सिंग करता है, वहीँ चीन को वह मैन्यूफैक्चरिंग आऊटसोर्स करता है. इस दिशा में पिछले दो साल में ओबामा ने काफी काम किया है और यदि ओबामा सत्ता में लौटते हैं तो आऊटसोर्सिंग पर बहस भारत से ज्यादा चीन पर असर करेगी."

ओबामा, रोमनी
इमेज कैप्शन, रोमनी ने अंत तक प्रचार किया जबकि प्रचार समाप्त कर ओबामा ने बॉस्केटबॉल का मैच खेला और जीता भी

<link type="page"> <caption> नतीजों पर क्षण-क्षण का हाल जानें</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/121107_usa2012_livepage_pp.shtml" platform="highweb"/> </link>

पूरी ताकत के साथ

राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा और रिपब्लिकन पार्टी के मिट रोमनी ने चुनाव के केवल एक दिन पहले तक प्रचार में अपनी पूरी ताक़त झोंक दी थी.

<link type="page"> <caption> चुनावी नतीजे लाइव जानने के लिए क्लिक करें</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121105_usa2012_live_result_sssi.shtml" platform="highweb"/> </link>

सोमवार को रोमनी ने फ़लोरिडा, वर्जीनिया, न्यू हैम्पशायर और ओहायो का दौरा किया. जबकि ओबामा ने संगीतकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन के साथ विस्कॉंन्सिन और ओहायो का दौरा किया था.

उसी तरह दक्षिण और मध्य पश्चिमी राज्यों को रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है और उन्हें 'रेड स्टेट्स' कहा जाता है. इनके पास 191 वोट हैं.

राष्ट्रपति बनने के लिए चुनाव में कम से कम 270 वोट की ज़रूरत होती है और इसलिए दूसरे राज्यों के वोट ही दरअसल अंतिम फ़ैसला करते हैं.

कोलोराडो, फ्लोरिडा, ओहायो जैसे 13 राज्य ऐसे हैं जहां स्थिति कभी भी स्पष्ट नहीं रहती और यहां कोई भी उम्मीदवार बाज़ी मार सकता है.

<link type="page"> <caption> जो आप जानना चाहेंगे अमरीकी राष्ट्रपतियों के बारे में</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/10/121023_usa2012_presidetial_trivia_aa.shtml" platform="highweb"/> </link>

बच्चे चुनाव प्रचार करते हुए
इमेज कैप्शन, बच्चे चुनाव प्रचार करते हुए

इन्हीं 13 राज्यों को 'पर्पल स्टेट्स' कहा जाता है. इन राज्यों के पास कुल 161 वोट हैं. उम्मीदवारों को इन्हीं राज्यों में प्रचार के दौरान सबसे अधिक समय और सबसे ज़्यादा पैसा ख़र्च करना पड़ता है.

इसीलिए दोनों उम्मीदवारों ने प्रचार के अंतिम दिनों में इन्हीं राज्यों में अपना समया बिताया और इन्हीं राज्यों के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करते रहें.

बदलाव

वर्जीनिया में प्रचार के दौरान मिट रोमनी ने ओबामा पर हमला करते हुए कहा कि ओबामा ने 2008 में किए गए अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं किया है इसलिए अब बदलाव का वक़्त आ गया है.

<link type="page"> <caption> ओबामा-रोमनी ने जितना चुनावी चंदा एकत्र किया उससे क्या खरीद सकते हैं?</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121101_usa2012_money_pp.shtml" platform="highweb"/> </link>

मिट रोमनी ने कहा, ''आप इनके रिकॉर्ड को देखें. चार साल पहले ओबामा ने बहुत सारे वादे किए थे लेकिन उन्होंने बहुत थोड़ा काम किया है. क्या अगले चार साल भी पिछले चार साल की तरह चाहते हैं? या आप सचमुच का बदलाव चाहते हैं?''

ओहायो में प्रचार के दौरान ओबामा ने मतदाताओं का दिल जीतने के लिए कहा, ''मुझमें अभी लड़ाई करने की क्षमता बाक़ी है.''

हालांकि 34 ज़िलों में लगभग एक तिहाई मतदाता पहले ही अपने वोट डाल चुके हैं क्योंकि अमरीका में चुनाव के दिन से पहले भी वोट डालने का प्रावधान है.

सबकी निगाहें राष्ट्रपति चुनाव पर टिकी हैं, लेकिन राष्ट्रपति पद के अलावा संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के 435 सदस्यों और ऊपरी सदन सीनेट के 100 में से 33 सीनेटर और 11 राज्यों के गवर्नरों के लिए भी चुनाव हो रहे हैं.