कितनी बदली है बराक ओबामा की छवि

बराक ओबामा ने अमरीका के राष्ट्रपति का पद काफ़ी साहसपूर्ण उम्मीदों के बीच संभाला था.
लेकिन चार साल बाद ऐसा लग रहा है कि महान वक्ता माने जानेवाले ओबामा का आशावाद और बड़े-बड़े वादे अब कहीं पीछे छूट गए हैं और वो एक अलग शख्सियत के रूप में नज़र आने लगे हैं.
चार साल पहले ओबामा के उत्साही चुनाव अभियान और चुनावी नतीजों को देखने के बाद वामपंथ हो या दक्षिणपंथ, डेमोक्रैट हों या रिपब्लिकन, किसने सोचा था कि बराक ओबामा को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए संघर्ष करना होगा.
मसीहा की छवि
एक समय ओबामा की छवि राजनीतिक मसीहा और मुक्तिदाता की थी जो अमरीकी लोगों को एक कर सकता था और बुश शासन के प्रति लोगों की नाराज़गी मिटा सकता था.
लेकिन आज ऐसा लगता है कि ओबामा अमीर रिपब्लिकन उम्मीदवार मिट रोमनी से चुनाव हार भी सकते हैं.

करिश्माई बराक ओबामा के समर्थन में आई इस गिरावट का पता लगाने के लिए हम शिकागो, वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में लोगों के बीच गए सिर्फ ये जानने कि ओबामा से लोगों जो उम्मीदें लगाई थीं उसका क्या हुआ?
क्या 2008 के गंभीर आर्थिक संकट और दूसरी मंदी की आशंका ने ओबामा से लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया?
या फिर कम अनुभव वाले ओबामा के किए असंभव वादों ने उनकी छवि को बदल कर रख दिया?
आर्थिक संकट
ओबामा प्रशासन के पहले चरण की आर्थिक नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिकागो के अर्थशास्त्री ऑस्टिन गूल्सबी का कहना है कि एक के बाद एक लगने वाले आर्थिक झटकों ने ओबामा की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है.
गुल्सबी का कहना है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ओबामा ने जो नीतियां अपनाईं उससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह धराशायी होने से बच सकी, साथ ही उन्होंने जोखिम में पड़े ऑटोमोबाइल उद्योग को भी उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.
लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ओबामा तत्कालीन आर्थिक हालात को ठीक से समझ नहीं पाए और इसीलिए उसे सुधारने के सही उपाय भी नहीं कर पाए.

दुनिया के विख्यात अर्थशास्त्री माने जानेवाले जेफरी सैक्स ने मुझे बताया कि ओबामा प्रशासन ने बिना किसी योजना के आधे खरब डॉलर का राजकोषीय घाटा होने दिया जो कि एक घातक परिस्थिति थी.
जेफरी सैक्स कहते हैं, "देश की हालत आज ठीक नहीं है. 15 फीसदी लोग ग़रीब हैं, देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज वित्तीय रूप से संघर्ष कर रहा है."
मुश्किलें बढ़ीं
हमने तमाम लोगों से बात की जिन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में ओबामा द्वारा किए सुधारों की सराहना की लेकिन साथ ही ये भी कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में शायद वो इसी वजह से बहुत क़ामयाब नहीं हो सके.
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ओबामा द्वारा किए गए वादे उनके लिए मुश्किलों भरे साबित हुए.
2010 में जो मध्यावधि चुनाव हुए उसके नतीजे डेमोक्रैट्स के लिए बहुत घातक साबित हुए. 1948 के बाद डेमोक्रैट्स का ये सबसे ख़राब प्रदर्शन था. उसके बाद से घरेलू मोर्चे पर ओबामा काफी कमज़ोर हुए हैं.
बराक ओबामा ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद कहा था कि "हां, हम कर सकते हैं." लेकिन जनता की नज़रों में वो इस इरादे को क़ामयाब बनाने में उतने सफल नहीं रहे हैं.
विदेश नीति की बात करें तो ओसामा बिन लादेन की हत्या और चरमपंथियों के खिलाफ ड्रोन हमले की नीति उनकी बड़ी क़ामयाबी मानी जाती है.
भूल

लेकिन ग्वांतानामो बे को बंद करने और मुस्लिम दुनिया के साथ संबंधों के एक नए युग की शुरुआत करने के ओबामा के वादे कभी पूरे नहीं हो सके. दरअसल उन्होंने कई ऐसे वादे कर दिए जो शायद ही पूरे हो सकते थे.
ओबामा को लगता था कि वो परिवर्तन के प्रतीक बन सकते हैं लेकिन शायद वो ये नहीं समझ सके कि परिवर्तन का प्रतीक होना और परिवर्तन करनेवाली शख्सियत होना - ये दोनों दो अलग-अलग बातें हैं.
ओबामा आज इस आरोप से बच नहीं सकते कि वो सच्चाई को जनता तक ठीक तरीके से पहुंचाने में सफल नहीं हो सके.
उनकी जीवनीकार और न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार जोडी कैंटर का आकलन है कि ओबामा अपनी बौद्धिक क्षमता पर ज़रूरत से ज़्यादा यक़ीन करते हैं. वो कहती हैं, "वो बेहद एकांतप्रिय व्यक्ति हैं और पिछले कई दशकों में अमरीका के सबसे ज़्यादा अंतर्मुखी राष्ट्रपति हैं."
सच्चाई ये है कि अमरीका एक महान देश है जो कि अपना आर्थिक वर्चस्व धीरे-धीरे खोता जा रहा है और इस संकट से कैसे उबरा जाए उस पर देश में कोई आम सहमति नहीं बन पा रही है.
अमरीका के जो हालात हैं उन्हें देखकर यही कहा जा सकता है कि ओबामा एक चतुर और पसंद करने योग्य व्यक्ति तो हैं लेकिन वो मसीहा नहीं हैं.












