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रूस-यूक्रेन युद्ध: व्लादिमीर पुतिन को युद्ध अपराध मामले में क्या गिरफ़्तार किया जा सकता है?
- Author, रॉबर्ट प्लमर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गिरफ़्तार करने के अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) के आदेश के बाद दक्षिण अफ़्रीका की सरकार पुतिन को न्योता देने पर विचार कर रही है. दक्षिण अफ़्रीका में ये सम्मेलन इस साल अगस्त में होने वाला है.
इस महीने की 17 तारीख़ को जारी किए गए इस वारंट को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. आईसीसी के इस वारंट पर क्या वाक़ई कार्रवाई हो सकेगी और क्या किसी भी देश की सरकार असल में पुतिन को गिरफ़्तार करना चाहेगी.
पुतिन पर क्या हैं आरोप?
- आईसीसी ने 17 मार्च 2023 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चिल्ड्रेन्स राइट्स के लिए रूस की कमिश्नर मारिया लवोवा-बेलोवा के ख़िलाफ़ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया.
- आईसीसी ने फ़रवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस का हमला होने के बाद यूक्रेन से बच्चों के आपराधिक डिपोर्टेशन के मामले में दोनों पर निजी तौर पर ज़िम्मेदार होने का आरोप लगाया.
- आईसीसी ने पुतिन पर इसे रोकने के लिए राष्ट्रपति के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल न करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके ख़िलाफ़ मामला चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं.
- आईसीसी ने कहा कि यूक्रेन के सैकड़ों बच्चों को अनाथालयों और बाल गृहों से रूस लाया गया ताकि रूस में रह रहे परिवार उन्हें गोद ले सकें. यूक्रेन के नेशनल इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो के अनुसार, 16,221 बच्चों को जबरन रूस ले जाया गया है.
- कोर्ट ने कहा जिस वक्त बच्चों को डिपोर्ट किया गया उन्हें चौथे जेनेवा कन्वेन्शन के तहत सुरक्षा दी गई थी.
- यूक्रेन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट से अपनी ज़मीन पर हो रहे युद्ध अपराधों की जांच करने की गुज़ारिश की थी जिसके बाद इसकी सुनवाई की गई.
- ये पहली बार है जब कोर्ट ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से एक के नेता के ख़िलाफ़ अरेस्ट वारंट जारी किया है.
- यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इस फ़ैसले का स्वागत किया और इसे "ऐतिहासिक फ़ैसला" बताया जो "इस मामले में ज़िम्मेदारी तय करेगा."
- रूस ने कोर्ट के इस फ़ैसल को अस्वीकार्य बताया और कहा कि ये गिरफ़्तारी वारंट किसी काम का नहीं है.
क्या है अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट?
- अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट का मुख्यालय नीदरलैंड्स के द हेग में है.
- ये कोर्ट नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों की जांच करती है और इसके लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति पर मुक़दमा चलाती है.
- 1998 में रोम संविधि के तहत इसकी स्थापना हुई थी, हालांकि इसने 2002 में ही अपना काम करना शुरू किया था.
- इसका सालाना बजट 13 करोड़ पाउंड का है जिसे ये मामलों की जांच पर खर्च करती है. अब तक ये कोर्ट 31 मामलों की सुनवाई कर चुकी है और 10 लोगों को सज़ा सुना चुकी है.
- आईसीसी जजों ने अब तक कुल 40 अरेस्ट वारंट जारी किए हैं. अब तक दूसरे मुल्कों की मदद से 21 लोगों पकड़ कर आईसीसी डिटेन्शन सेंटर में रखकर कोर्ट के सामने पेश किया गया है जबकि 16 को अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
- पांच लोगों के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप व्यक्ति की मौत के बाद हटा लिए गए थे.
- फिलहाल 123 देश आईसीसी यानी रोम संविधि के सिग्नेटरी हैं और इसके अधिकार को स्वीकार करते हैं. हालांकि जो देश इसके सिग्नेटरी नहीं हैं उनमें रूस, अमेरिका और चीन शामिल हैं.
- न तो भारत, न पाकिस्तान और न ही नेपाल रोम संविधि का सिग्नेटरी है. हालांकि भारत के पड़ोसी अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश इसके सिग्नेटरी हैं.
- दक्षिण अफ़्रीका ने 17 जुलाई 1998 को रोम संविधि पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद 27 नवंबर 2000 को उसने इसे रेटिफ़ाई किया था.
क्या आईसीसी पुतिन को गिरफ़्तार कर सकती है?
आईससी वारंट तो जारी कर सकता है, लेकिन उसके पास व्यक्ति को गिरफ़्तार करने का अधिकार नहीं है.
कोर्ट के अध्यक्ष प्युटर हॉफ़मैनस्की ने कहा है कि पुतिन को गिरफ़्तार करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर निर्भर करता है.
लेकिन रूस में मौजूदा वक्त में पुतिन की जो हैसियत है उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सकता. रूस आईसीसी का सिग्नेटरी भी नहीं है, ऐसे में रूस में उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकेगा, इसकी संभावना बेहद कम है.
रूसी राष्ट्रपति की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने पहले ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मारिया लवोवा-बेलोवा के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को "बिना मतलब का" कहते हुए ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि ये आदेश "अमान्य" है.
हालांकि आईसीसी के अधिवक्ता ख़ालिद ख़ान ने बीबीसी को बताया कि केवल इसलिए कि रूस आईसीसी को मान्यता नहीं देता, ऐसा नहीं है कि इन दोनों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध के मामेल में सुनवाई नहीं हो सकती.
उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन करना सभी मुल्कों का दायित्व है."
आईसीसी के लिए कौन करेगा गिरफ़्तारी?
इस साल अगस्त 22 से लेकर 24 तक ब्रिक्स देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका) का 15वां सम्मेलन होने वाला है. इसके लिए राष्ट्रपति पुतिन दक्षिण अफ़्रीका पहुंच सकते हैं.
दक्षिण अफ़्रीका आईसीसी का सिग्नेटरी है और फ़िलहाल वहां की सरकार इसे लेकर पसोपेश में है कि वो अदालत के आदेश का पालन करे या नहीं.
दक्षिण अफ़्रीकी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो सम्मेलन में शामिल होने आए राष्ट्राध्य के तौर पर पुतिन का स्वागत करे या फिर उनके ख़िलाफ़ जारी अरेस्ट वारंट पर कार्रवाई करे.
देश की विदेश मंत्री नालेदी पैन्डोर ने हाल में कहा था, "दक्षिण अफ़्रीका को अपने क़ानून में मौजूद प्रावधानों को देखना होगा."
उन्होंने आईसीसी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा, "कई देश ऐसे हैं जहां के नेताओं पर संघर्ष की स्थिति में गंभीर अत्याचार करने का आरोप है, लेकिन उन्हें अब तक उसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया."
दक्षिण अफ़्रीका और रूस के बीच दोस्ताना संबंध हैं और दोनों मुल्कों की सेनाओं ने इसी साल फ़रवरी में साझा सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया था.
दक्षिण अफ़्रीका पहले भी आईसीसी के अरेस्ट वारंट की अनदेखी कर चुका है.
साल 2009 और 2010 में आईसीसी ने मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के लिए सूडान के राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर की गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया था.
ये मामला 2003 का है, जब पश्चिमी सूडान के दारफ़ूर में हुए गृह युद्ध में तीन लाख लोगों की मौत हुई थी. यहां काले अफ़्रीकी मूल के किसानों और खानाबदोश अरब समुदाय के बीच संघर्ष हुआ था.
रिपोर्टों के अनुसार, सूडान सरकार ने अरब विद्रोहियों को समर्थन दिया था जिन्होंने वहां सैंकड़ों गांवों को नष्ट कर दिया और लाखों लोगों की जान ले ली.
ये मामला अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने 4 मार्च 2009 और 12 जुलाई 2010 को ओमर हसन अहमद अल-बशीर के ख़िलाफ़ वारेंट जारी किया. उन्हें अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है.
साल 2015 में अल-बशीर ने दक्षिण अफ़्रीका का दौरा किया था, लेकिन दक्षिण अफ़्रीका के अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार करने से इनकार कर दिया था.
पुतिन के विदेशी दौरे
इस साल जून में रूसी राष्ट्रपति पुतिन शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन की बैठक के लिए भारत के वाराणसी आने वाले हैं. वहीं इसी साल सितंबर में जी20 देशों के सम्मेलन के लिए वो एक बार फिर भारत में होंगे.
लेकिन भारत आईसीसी का सिग्नेटरी नहीं है, उसके लिए आईसीसी के वारंट का पालन करना बाध्यकारी नहीं है और ऐसी उससे उम्मीद भी नहीं की जा रही.
हंगरी सरकार के साथ रूस के दोस्ताना संबंध हैं और उसने कहा है कि वो आईसीसी का सिग्नेटरी तो है, लेकिन अगर पुतिन किसी कारण उनके देश में आए तो वो उन्हें गिरफ़्तार नहीं करेगा. उसने कहा है कि ऐसा करना उसके ख़ुद के संविधान के विरुद्ध होगा.
इस साल फ़रवरी में यूक्रेन के ख़िलाफ़ 'विशेष सैन्य अभियान' छेड़ने के बाद से पुतिन आठ देशों का दौरा कर चुके हैं जिनमें सोवियत संघ में शामिल रहे मुल्क और ईरान शामिल हैं. इन सभी मुल्कों के रूस के साथ दोस्ताना संबंध हैं.
इसकी संभावना बेहद कम है कि वो किसी ऐसे देश का दौरा करेंगे जहां उन्हें गिरफ़्तार किया जा सके. हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि देश से बाहर जाने पर गिरफ़्तार होने के ख़तरे के कारण उनकी आवाजाही पर कुछ हद तक लगाम लग जाएगी.
क्या पुतिन के ख़िलाफ़ चल सकता है मुक़दमा?
अगर ये मान भी लिया जाए कि पुतिन को गिरफ़्तार किया जा सकता है, तो भी उनके ख़िलाफ़ मामला चलाने को लेकर क़ानूनी तौर पर अदालत के सामन कई चुनौतियां होंगी.
ये कोर्ट उन देशों की तरफ़ से मामलों की सुनवाई करने के लिए बनाया गया था जो आईसीसी के सिग्नेटरी हैं और जो इसके अधिकारक्षेत्र को मानते हैं और रूस उनमें से एक नहीं है.
रही बात यूक्रेन की तो उसने आईसीसी से रूस के ख़िलाफ़ कथित युद्ध अपराधों के मामले में जांच की गुज़ारिश ज़रूर की है, लेकिन वो ख़ुद पूरी तरह आईसीसी का सिग्नेटरी नहीं है (यूक्रेन ने 20 जनवरी 2020 को रोम संविधि पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन उनसे अब तक इसे रेटिफ़ाई नहीं किया है).
इस मुश्किल के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट ने ये कहते हुए रूसी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ अरेस्ट वारंट जारी करने के फ़ैसले का बचाव किया है कि यूक्रेन में रूस के युद्ध अपराध लगातार जारी हैं और वो रूस को और अपराध करने से रोकने की कोशिश कर रहा है.
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