सुंदर होना क्या कमाई बढ़ाने का पैमाना है?

दक्षिण अफ़्रीका की मॉडल मारिके

इमेज स्रोत, Yulia.S Hugo

इमेज कैप्शन, मॉडल मारिके का कहना है कि अकसर लोग उन्हें ड्रिंक का ऑफ़र देते हैं और उन्हें लगता है कि ये उनकी सुंदरता की वजह से होता है

दक्षिण अफ़्रीका के केप टाउन की मॉडल मारिके का कहना है कि अक्सर लोग उन्हें ड्रिंक, लंच और इवेंट में साथ आने का ऑफ़र देते हैं.

क्यों? इसके जवाब में वो सादगी से कहती हैं कि ये उनकी सुंदरता की वजह से है.

लंबी, पतली और भूरे बालों वाली ये मॉडल बीबीसी बिज़नेस के रेडियो कार्यक्रम डेली में कहती हैं, "हो सकता है कि कुछ लोगों को ऐसा लगे कि ये ठीक नहीं हैं."

"लेकिन आप जैसे दिखते हैं और अपने उस रूप को बनाए रखने के लिए आप बहुत मेहनत करते हैं, तो फिर आपको ये सभी अतिरिक्त चीज़ें फ़्री में मिलती रहती हैं. मुझे लगता है कि जो मिल रहा है उसे लेना चाहिए और मौज करनी चाहिए."

चाहें हम इसे स्वीकारोक्ति को पसंद करें या नहीं, लेकिन सौंदर्य को लेकर पूर्वाग्रह हॉलीवुड, सोशल मीडिया और विज्ञापनों की दुनिया तक सीमित नहीं है, इस दिशा में हो रहे शोधों से पता चलता है कि आकर्षक लोगों के लिए जीवन अधिक आरामदायक और शानदार होता है.

लेकिन सुंदर लोग आख़िर दूसरों की तुलना में कितनी बेहतर स्थिति में होते हैं? चलिए पता करते हैं.

सोशल मीडिया की ताक़त

सुंदर दिखने वाले कई लोगों को ब्रांड सोशल मीडिया पर प्रचार करने के लिए मुफ़्त में उत्पाद देते हैं

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, सुंदर दिखने वाले कई लोगों को ब्रांड सोशल मीडिया पर प्रचार करने के लिए मुफ़्त में उत्पाद देते हैं

दुनियाभर में लोग इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं, 'सुंदर दिखने' वाले लोग उन स्टोरीज को स्वैप कर रहे हैं जिनमें कहा जा रहा है कि उन्हें सुंदर दिखने की वजह से मुफ़्त में उत्पाद मिलते हैं. एक महिला ने तो यहां तक कह दिया है कि एक कंपनी ने उन्हें उस नौकरी के लिए इंटरव्यू के लिए बुला लिया जिसके योग्य वो थी हीं नहीं क्योंकि कंपनी को वह बहुत सुंदर लगीं थीं.

सोशल मीडिया ने ज़ाहिर तौर पर कई लोगों को सशक्त किया है, पुरुष और महिला दोनों ही अपने घर से बाहर निकलने बिना ही सिर्फ़ अपने लुक्स के दम पर पैसा कमा रहे हैं.

मारिके तर्क देती हैं, "सुंदर लोगों को मिलने वाली प्राथमिकता वास्तव में बढ़ रही है, इसके पीछे इंस्टाग्राम को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है."

ब्रांड सोशल मीडिया पर मौजूद युवा ग्राहकों तक पहुंचने के लिए एक दूसरे से संघर्ष कर रहे हैं. ये युवा अब पारंपरिक मीडिया नहीं देखते हैं.

मारिके बताती हैं, "एक ब्रांड आपके इतने सारे उत्पाद भेजता है और आपके उसके लिए इंस्टाग्राम पर उस उत्पाद को शेयर कर बस लोगों को प्रभावित करना होता है."

मारिके कहती हैं कि उन्हें बहुत से आयोजनों, जैसे किसी रेस्त्रां का उद्घाटन में भी आमंत्रित किया जाता है.

"आपको बस वहां पहुंचना होता है और मस्ती करनी होती है. आयोजकों के ये अच्छा लगता है क्योंकि उनके रेस्त्रां में कई सारी सुंदर लड़कियां मस्ती करते हुए तस्वीरों में दिख जाती हैं."

मारिके स्वीकार करती हैं कि निजी तौर पर उन्हें मुफ़्त की चीज़ें लेना और लोगों का उनकी तरफ़ आकर्षित होना अच्छा लगता है.

वो कहती हैं, "एक मॉडल होने और ख़ूबसूरत होने की वजह से इस तरह के मुफ़्त के अनुभव और मौकों का होना अपने आप में शानदार है. जब आप बड़े शहर में रह रहे होते हैं तो आपको बहुत ख़र्च भी उठाने पड़ते हैं."

सुंदर लोग कितनी बेहतर स्थिति में होते हैं?

घर पर वीडियो बनाता फिटनेस ब्लॉगर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अर्थशास्त्री हेमरमेश ने पता लगाया है कि तथाकथित हैंडसम पुरुष आकर्षक महिलाओं से अधिक कमाते हैं

यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सस के डेनियल हेमरमेश एक अर्थशास्त्री हैं और कई सालों से 'सौंदर्य पूर्वाग्रह' कही जाने वाली इस अवधारणा का अध्ययन कर रहे हैं.

वो कहते हैं कि ख़ूबसूरत लोगों को अधिक वेतन मिलता है, बैंक से लोन लेने में कम दिक्कतें आती हैं और आमतौर पर उन्हें बेहतर नौकरी और संसाधनों का प्रस्ताव मिलता है.

हेमरमेश कहते हैं, "जिन लोगों को हम अच्छा दिखने वाला मानते हैं, वो अच्छा करते हैं और जो करते हैं उसके बदले में उन्हें ज़्यादा मिलता है."

महिला पुलिस अधिकारी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, हेमरमेश का कहना है कि सौंदर्य पूर्वाग्रह उन नौकरियों में भी होता है जहां आप इसकी अपेक्षा नहीं करते हैं.

" ये यूनिवर्सिटी शिक्षण के क्षेत्र में भी है, जो कि सुंदरता पर निर्भरता के लिए बहुत चर्चित नहीं है. यहां तक कि अर्थशास्त्र जैसे विषय में भी, कुछ शोध से ये पता चला है कि सुंदर दिखने वाले अर्थशास्त्री अधिक कमाते हैं."

वो अनुमान लगाते हैं कि दिखने में अधिक सुंदर एक कर्मचारी अपने जीवनकाल में औसतन 230,000 डॉलर दूसरों की तुलना में अतिरिक्त कमाता है. उनकी ये गणना प्रति घंटा 20 डॉलर के वेतनमान पर आधारित है.

वो कहते हैं कि अगर इस आर्थिक मॉडल को किसी हेज फंड के मैनेजर पर लागू किया जाए तो बहुत आकर्षक दिखने वाले मैनेजर और कम आकर्षक दिखने वाले मैनेजर की आय में बहुत बड़ा फासला नज़र आएगा.

वो ये भी मानते हैं कि लैंगिक वेतन भेद सुंदर दिखने वाले लोगों पर भी लागू होता है. हेमरमेश को पता चला है कि आकर्षक दिखने वाले पुरुष आकर्षक दिखने वाली महिलाओं की तुलना में अधिक पैसा कमाते हैं. उन्होंने पाया है कि कम आकर्षक दिखने वाला पुरुष आकर्षक दिखने वाले पुरुष के मुक़ाबले में 10 प्रतिशत कम कमाता है.

हेमरमेश स्वीकार करते हैं कि अन्य कारक जैसे कि व्यक्तित्व, बुद्धिमत्ता, शिक्षा, उम्र और नस्ल आदि भी मायने रखते हैं लेकिन उनका तर्क है कि सुंदरता इन सबसे अलग एक कारक है.

"अगर आप लोगों के बीच में इन सभी भेदों को भी शामिल कर लें तब भी सुंदरता एक ऐसा कारक है जो श्रम बाज़ार या नौकरी को प्रभावित करता है."

सुंदरता की परिभाषा क्या है?

तीन महिला मॉडल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एक प्रसिद्ध कहावत है कि सुंदरता देखने वालों की आंखों में होती है

कई लोग ये तर्क देते हैं कि सुंदरता को परिभाषित करना मुश्किल है, लेकिन हेमरमेश इससे सहमत नहीं हैं. वो कहते हैं कि अधिकतर लोग इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि कौन अच्छा दिख रहा है और कौन कम आकर्षक है.

"अगर मैं और आप सड़क पर चलते हैं और दस लोगों को देखते हैं और उनमें से एक दो ऐसे हैं जो बहुत सुंदर दिखते हैं. तो कौन सुंदर दिख रहा है इसे लेकर हमारी राय एक जैसी हो सकती है."

वो ये तर्क भी देते हैं कि नस्ल से सौंदर्य पूर्वाग्रह पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता है.

"नस्ल आज चाहें जो भी हो लेकिन सुंदरता को लेकर हमारे विचार लगभग एक जैसे हैं. एक अफ़्रीकी जो आकर्षक है, उसे पूरी दुनिया में आकर्षक महिला के रूप में ही देखा जाएगा. किसी एशियाई महिला या कॉकेशस क्षेत्र की महिला के बारे में भी ऐसा ही होगा."

ख़ूबसूरत चेहरे और मोटापे से डर

बहुत सी महिलाएं आकर्षक दिखने के लिए अपने होठ मोटे कराती हैं

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बहुत सी महिलाएं आकर्षक दिखने के लिए अपने होठ मोटे कराती हैं

चेहरे को ख़ास रूप से आकर्षक बनाने के लिए अब बोटोक्स और लिप फिलिंग जैसे कॉस्मेटिक उपचार सामान्य होते जा रहे हैं.

लेकिन हेमरमेश मानते हैं कि ऐसा ज़रूरी नहीं है कि इस तरह की प्रक्रिया के बाद व्यक्ति ख़ूबसूरत हो ही जाए.

"लोगों को लगता है कि इससे उन्हें मदद मिल है. वो अच्छे कपड़े, बेहतर कॉस्मेटिक और बाल ले सकते हैं. लेकिन शंघाई में हुए एक शोध से पता चला है कि जो लोग अधिक ब्यूटी उत्पाद इस्तेमाल करते हैं और सुंदर दिखने पर अधिक ख़र्च करते हैं वो उनसे बहुत ज़्यादा सुंदर नहीं समझे गए जो कम पैसे ख़र्च करते हैं."

और जब बात सुंदरता और नौकरी की होती है- लेखिका एमिली लॉरेन डिक तर्क देती हैं कि वज़न को लेकर भेदभाव बहुत अधिक होता है.

हालांकि, अधिकतर देशों में श्रम क़ानून नौकरी से संबंधित कारकों के अलावा किसी भी कारण, जैसे नस्ल, लिंग, विकलांगता या उम्र आदि के आधार परभेदभाव को प्रतिबंधित करते हैं, एमिली कहती हैं कि शारीरिक रूप को लेकर कोई सुरक्षा कवच नहीं. वो कहती हैं कि कार्यस्थल नीतियों में बदलाव होना चाहिए और इस भेदभाव के ख़िलाफ़ लोगों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए.

वो तर्क देती हैं, "फ़ैट फोबिया, यानी मोटे होने को लेकर और नफ़रत एक तरह का नस्लवाद ही है."

कनाडा की लेखिका एमिली कहती हैं, "जब गुलामी का दौर शुरू हुआ तो गोरी महिलाओं काली महिलाओं से अपने आप को अलग दिखाने के लिए अपना शरीर पतला रखती थीं."

वो ये भी कहती हैं कि विज्ञापन और फ़िल्में मोटे लोगों 'नापसंदीदा और बेवकूफ़' की तरह पेश करते हैं. वो कहती हैं कि ये ऐसी धारणा है जिसकी वजह से आम जीवन में मोटे लोगों को शोषण और उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है.

वो कहती हैं, "पतले शरीर वाले कर्मचारियों की तुलना में मोटे लोगों की कमाई कम हो सकती है और ये धारणाओं और उनकी हैसियत क्या है, इससे भी जुड़ा होता है."

लगता है विज्ञान भी उनकी इस अवधारणा का समर्थन करता है. ब्रिटेन के शेफील्ड की हैलम यूनिवर्सिटी में हुआ एक शोध तो यही इशारा करता है.

नियोक्ताओं को एक जैसे बायोडाटा दिए गए थे. पहले मोटे लोगों की तस्वीर लगाकर और फिर बाद में पतले लोगों की फोटो लगाकर. नतीजा स्पष्ट रूप से पतले लोगों की तरफ़ झुका रहा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में मोटे लोगों की संख्या सौ करोड़ को पार कर गई है. अब लगता है कि सुंदरता और वज़न को लेकर हमारे अपने अचेतन पूर्वाग्रहों को चुनौती देने का सही समय आ गया है.

दक्षिण अफ़्रीकी मॉडल मॉरिके

इमेज स्रोत, Marike

इमेज कैप्शन, मॉडल मारिके को लगता है कि अब फैशन उद्योग बदल रहा है और सुंदरता के अलावा व्यक्तित्व को भी अहमियत दीजा रही है

सुंदरता की तरफ झुकाव कोई नई बात नहीं है और यह ना सिर्फ़ हॉलीवुड बल्कि समान्य लोगों को भी पीढ़ी दर पीढ़ी प्रभावित करता रहा है.

म़ॉडल मारीके कहते हैं कि समाज में रंग-रूप के लिए पागलपन पर अब ग़ौर किया जा रहा है और फ़ैशन उद्योग में अब अपेक्षाएं बदल रही हैं.

"आज कल लोग उन कलाकारों और अभीनेताओं में दिलचस्पी लेते हैं जिनके पास कोई कहानी है, जो अभिनय के अलावा भी कुछ करते हैं या अन्य क्षेत्रों में भी रूची रखते हैं. इसलीए अब व्यकितत्व बहुत मायने रखता है."

यह उद्योग के भीतर बढ़ती हुई ट्रेंड है जो कि बेहद शानदार चिज़ है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)