अल्बनीज़ के भारत दौरे पर ऑस्ट्रेलिया का मीडिया क्या बोला?

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच में प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की मौजूदगी पर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में कवरेज काफ़ी दिलचस्प है.
कुछ अख़बार जहाँ भारत-ऑस्ट्रेलिया के व्यापारिक और सामरिक संबंधों की अहमियत की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ अख़बारों ने संपादकीय टिप्पणियाँ लिखी हैं जिनमें नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पीएम मोदी की मौजूदगी में मनाए गए जश्न को लेकर काफ़ी कुछ लिखा गया है.
ये टिप्प्णियाँ ऐसे समय पर आई हैं जबकि शुक्रवार दोपहर भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री द्विपक्षीय मुलाक़ात कर रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख समाचारपत्र हेरल्ड सन ने लिखा है, "अल्बनीज़ की तीन दिन की यात्रा के दौरान सौर ऊर्जा और सामरिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने वाले हैं."
'हेरल्ड सन' ने प्रधानमंत्री अल्बनीज़ के नौसैनिक युद्धपोत आइएनएस विक्रांत के दौरे का भी ज़िक्र किया है और कहा है कि इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'एक्ससरसाइज़ मालाबार' का आयोजन करेगा.
टॉस में हुई देरी का ज़िक्र
अख़बार 'द वेस्ट ऑस्ट्रेलियन' ने रथ पर सवार मोदी और अल्बनीज़ की तस्वीर छापी है, अख़बार ने इसे मैच का 'की-मोमेंट' यानी ख़ास पल बताया है.
अख़बार ने लिखा है कि दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाक़ात और मौजूदगी मैच के ऊपर छा गई थी, 'द वेस्ट ऑस्ट्रेलियन' ने लिखा है, "एक समय तो ऐसा लग रहा था कि मैच देर से शुरू होगा, टॉस चार मिनट की देरी से हुआ लेकिन पहली गेंद सही समय पर फेंकी गई."
'द वेस्ट ऑस्ट्रेलियन' ने अहमदाबाद में 'मैच से पहले के राजनीतिक तमाशे' का ज़िक्र किया है, उसके बाद प्रधानमंत्री अल्बनीज़ के एक जुमले को प्रकाशित किया है, जिसे 'कोट ऑफ़ द डे' यानी आज का कथन कहा गया है. अल्बनीज़ ने कहा, "यहाँ आना मेरे जीवन का एक हाइलाइट है, भारत और ऑस्ट्रेलिया बेहतरीन दोस्त हैं."
'मोदी का विचित्र नाटक क्रिकेट पर भारी'

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ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख अख़बार 'संडे मॉर्निंग हेरल्ड' ने मैच से पहले हुए आयोजन पर तीखी टिप्पणी की है और उसकी हेडलाइन है--'चैंट्स, लिंक्ड आर्म्स एंड ए बैटमोबाइल: मोदीज़ एब्सर्ड थिएटर टेक्स ओवर क्रिकेट', इसका अनुवाद होगा--'नारे, हाथों में हाथ और बैट वाला रथ: मोदी का विचित्र नाटक क्रिकेट पर भारी'.
अख़बार ने लिखा है, "मोदी और उनके मेहमान के लिए 45 मिनट का एक सुनियोजित उत्सव का आयोजन किया गया था, स्टेडियम में 'मोदी, मोदी, मोदी' के नारे लग रहे थे, स्टेडियम के बाहर विशाल पोस्टर लगे थे जिनसे ज़ाहिर हो रहा था कि नेता कितने बड़े हैं और अदना खिलाड़ी उनके मनोरंजन के लिए बुलाए गए हैं."
'संडे मॉर्निंग हेरल्ड' ने लिखा है, "ऐसा पहले शायद कभी नहीं हुआ जब खिलाड़ियों को किनारे हटा दिया गया ताकि मोदी और अल्बनीज़ के लिए खुला मंच हो."
अख़बार के मुताबिक़ इस आयोजन का मुख्य आकर्षण वह रथ था जिस पर मोदी और अल्बनीज़ सवार थे, "रथ को क्रिकेट बैटों से इस तरह सजाया गया था मानो वे गेम ऑफ़ थ्रोन्स के तलवार हों. इस रथ पर चढ़कर दोनों नेताओं ने करीब पचास हज़ार दर्शकों का अभिवादन किया जिसकी वजह से टॉस होने में सात मिनट की देरी हुई."
'राजनीतिक रैली के बीच क्रिकेट मैच'
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'द ऑस्ट्रेलियन' ने अहमदाबाद के आयोजन को 'राजनीतिक रैली के बीच क्रिकेट मैच' बताया है. अख़बार ने गिडियन हे का एक लेख छापा है जिसकी ट्विटर पर काफ़ी चर्चा हो रही है, इस लेख के पे-वाल के पीछे होने के बावजूद लोग उसे इमेज के तौर पर शेयर कर रहे हैं. इस लेख का शीर्षक है--'क्रिकेट्स मोदी क्वेश्चन: व्हाइ आर वी टॉलरेटिंग द इनटॉलरेंट?'इस लेख में बीबीसी की डॉक्युमेंट्री 'इंडियाज़ मोदी क्वेश्चन' का भी ज़िक्र है, हेडलाइन इसी वजह से 'क्रिकेट्स मोदी क्वेश्चन' का प्रयोग किया गया है.
अख़बार ने लिखा है कि ये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बाद किसी विदेशी नेता का इस क्रिकेट स्टेडियम का पहला दौरा था.इस लेख में गिडियन हे ने आरोप लगाया है कि मोदी ने क्रिकेट की लोकप्रियता का राजनीतिक इस्तेमाल किया है और कई क्रिकेट खिलाड़ी ट्विटर पर उनकी राजनीतिक बातों को आगे बढ़ाते हुए नज़र आते हैं, इस लेख में रविंद्र जडेजा की पत्नी के विधानसभा चुनाव लड़ने का भी ज़िक्र किया गया है.
मानवाधिकार का सवाल

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ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख प्रसारक 'एसबीएस न्यूज़' की हेडलाइन है--"ह्यूमन राइट्स इश्यूज़ लूम ओवर एंथनी अल्बनीज़ ट्रिप टू इंडिया" यानी 'एंथनी अल्बनीज़ की भारत यात्रा पर मानवाधिकार मसलों की छाया.'
एसबीएस ने लिखा है, "अल्बनीज़ अपने साथ 25 बिज़नेस लीडर्स का प्रतिनिधिमंडल लेकर गए हैं, वे भारत के साथ अपने संबंध और गहरा बनाने के लिए उत्सुक हैं, भारत एक ऐसा देश है जो इस साल के अंत तक आबादी के मामले में चीन से बड़ा हो जाएगा. विदेश से ऑस्ट्रेलिया आने वाले छात्रों में सबसे बड़ी तादाद भारत से आती है. ऑस्ट्रेलिया में विदेश से आने वाले लोगों की तादाद के मामले में भी भारत चीन से आगे निकल गया है."
लेख में लिखा गया है कि अल्पसंख्यकों, ख़ास तौर पर मुसलमानों के उत्पीड़न को नज़रअंदाज़ करने का आरोप मोदी पर लगातार लगता रहा है, वे और उनके सहयोगी इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
इस लेख में गुजरात के 2002 के दंगों पर बीबीसी की डॉक्युमेंट्री का ज़िक्र किया गया है, सीबीएस ने लिखा है, "सरकार ने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस डॉक्युमेंट्री को भारत में दिखाए जाने पर रोक लगा दी थी."
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