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जी20 देशों की बैठक में रूस-यूक्रेन के सवाल पर सहमति नहीं, चीन के इनकार से हुई मुश्किल
- Author, ओलिवर स्लो
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के संगठन जी20 देशों के वित्त मंत्रियों के सम्मेलन के बाद जारी किए गए 'आउटकम डॉक्यूमेन्ट' पर सहमति नहीं बन पाई.
बेंगुलुरू में आयोजित सम्मेलन में चीन ने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा करने से इनकार कर दिया था. वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद जी20 के साझा बयान को आख़िरी रूप देने के वक़्त चीन ने इस पर आपत्ति जताई.
बयान में चीन ने उस हिस्से पर अपनी सहमति जताने से इनकार कर दिया जिसमें यूक्रेन पर रूसी हमले की 'कड़े शब्दों' में निंदा की गई है.
रूस ने भी जी20 देशों के वित्त मंत्रियों के सम्मेलन में युद्ध को लेकर अपना रुख़ जाहिर किया और कहा कि 'रूस विरोधी' पश्चिमी देशों ने जी20 की गतिविधियों को 'अस्थिर' कर दिया है.
जी20 देशों के वित्त मंत्रियों के इस सम्मेलन से पहले इसी सप्ताह चीन ने यूक्रेन-रूस संघर्ष को ख़त्म करने के लिए अपना 12 सूत्री पीस प्लान पेश किया था और कहा था कि यूक्रेन में शांति कायम करने की कोशिशें की जानी चाहिए.
बेंगलुरू में चल रहे जी20 देशों के सम्मेलन में भारत ने वित्त मंत्रियों की बैठक का सार पेश किया है. इस 'चेयर्स समरी' में कहा गया कि यूक्रेन में मौजूदा हालात और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर 'अलग-अलग आकलन' हैं.
इसमें एक फुटनोट में कहा गया है कि युद्ध के बारे में संक्षिप्त तौर पर बताने वाले दो पैराग्राफ़ (आउटकम डॉक्यूमेन्ट के तीसरे और चौथे पैराग्राफ़) पर 'रूस और चीन को छोड़ कर सभी देशों' में सहमति थी.
ये दोनों पैराग्राफ बीते साल नवंबर में जी20 देशों के बाली सम्मेलन के घोषणापत्र से लिए गए हैं. इसमें यूक्रेन पर रूस के हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई है.
यूक्रेन पर रूस के हमले को एक साल पूरा हो चुका है. इस दौरान चीन ने संघर्ष को ख़त्म करने में कोई ख़ास सक्रियता नहीं दिखाई, लेकिन हाल के दिनों में युद्ध के इर्द-गिर्द उसने अपने कूटनीतिक प्रयास तेज़ कर दिए हैं.
चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी ने इस सप्ताह यूरोप का दौरा किया. अपने दौरे के आख़िर में वो रूस पहुंचे जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाक़ात की.
चीन ने इस सप्ताह यूक्रेन में युद्ध ख़त्म करने के लिए अपना पीस प्लान पेश किया है उसमें संघर्ष ख़त्म करने के लिए शांति वार्ता और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की गई है. हालांकि चीन ने इसमें न तो यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा की है और न ही रूसी सेना के पीछे हटने के बारे में कुछ कहा है.
रूस ने चीन के इस पीस प्लान का स्वागत किया है. लेकिन इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने तंज करते हुए कहा, "राष्ट्रपति पुतिन इसकी तारीफ कर रहे हैं फिर ये बढ़िया कैसा हो सकता है?"
जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद भारत सरकार के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के सचिव अजय सेठ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चीन और रूस यूक्रेन को लेकर जारी किए जाने वाले बयान के शब्दों पर सहमत नहीं थे.
उन्होंने कहा, "वे आर्थिक और वित्तीय मसलों को सुलझाने पर ज़ोर दे रहे थे. दूसरी ओर अन्य 18 देशों को लग रहा था कि युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है."
सम्मेलन के 17वें पैराग्राफ़ के सार में तुर्की में हाल में आए भूकंप, कम और मध्य आय वाले देशों की कर्ज़ समस्या, ग्लोबल टैक्स पॉलिसी और खाद्य असुरक्षा का ज़िक्र किया गया है.
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे इस बात का अफ़सोस है कि "जी20 देश मिलकर इसकी गतिविधियों को अस्थिर करने में लगे हुए हैं... इसका इस्तेमाल रूस के ख़िलाफ़ होता है."
रूस ने कहा है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और जी7 देश साफ़ तौर पर ब्लैकमेलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं चीन ने कहा है कि इन देशों को बहुध्रुवीय दुनिया की वास्तविकताओं को स्वीकार कर लेना चाहिए.
सम्मेलन में जर्मनी के वित्त मंत्री क्रिश्चियन लिंडनर ने कहा, "ये युद्ध है और इस युद्ध की एक वजह है, सिर्फ एक वजह. वो वजह हैं रूस और व्लादीमिर पुतिन. जी20 देशों की बैठक में इसका साफ तौर पर ज़िक्र होना चाहिए था."
रूस ने पिछले साल फरवरी में यूक्रेन पर हमला किया था. इसके बाद जी20 सदस्य देशों की बैठक तो हुई लेकिन इस मुद्दे पर देश कोई संयुक्त बयान जारी करने में नाकाम रहे.
हालांकि गुरुवार को यूएन जनरल असेंबली में यूक्रेन पर रूस के हमले के ख़िलाफ़ लाया गया प्रस्ताव पारित हो गया.
प्रस्ताव के पक्ष में 141 देशों ने वोट दिया था. रूस समेत सात देशों ने इसके ख़िलाफ़ वोट दिया, जबकि भारत, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत 32 देशों ने इसमें वोट नहीं दिया था.
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