You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
यूक्रेन युद्ध में रूस की क्या मदद कर रहा है चीन?
- Author, रियलिटी चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से चीन बड़ी तेज़ी से, रूस का सबसे अहम व्यापारिक पार्टनर बनता जा रहा है.
असल में, चीन से व्यापार बढ़ाकर रूस अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों का असर कम करने की कोशिश कर रहा है.
अब अमेरिका ने कहा है कि चीन, रूस को हथियार और गोला-बारूद देने के बारे में विचार कर रहा है.
हालांकि, चीन ने इस आरोप का सख़्ती से खंडन किया है.
क्या चीन, रूस को हथियार दे रहा है?
चीन, हथियार और गोला-बारूद बनाने की अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है. और अब वो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के साइमन वेज़ेमैन कहते हैं कि 'चीन के हथियार अब लगातार उन्नत होते जा रहे हैं. मिसाल के तौर पर चीन के ड्रोन हासिल करने में शायद रूस की बहुत दिलचस्पी हो.'
अमेरिका कहता है कि चीन की कंपनियां पहले ही रूस को ऐसी मदद दे रही हैं जो 'घातक नहीं' हैं. अमरीका ये भी कहता है कि उसके पास ऐसी ख़बर है कि चीन बहुत जल्द रूस को 'घातक मदद' भी मुहैया करा सकता है.
मारिया शगीना, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में आर्थिक प्रतिबंधों की विशेषज्ञ हैं.
वो कहती हैं कि चीन ने रूस को खुलकर हथियार तो नहीं मुहैया कराए, मगर हो सकता है कि वो छुपकर रूस को अपने ऐसे आधुनिक उत्पाद दे रहा हो, जिन्हें सेना के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हो.
मारिया कहती हैं कि 'इस बात के सुबूत हैं कि चीन, सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा निर्यातक है. वो इन्हें अक्सर हॉन्ग कॉन्ग और संयुक्त अरब अमीरात में रजिस्टर्ड फ़र्ज़ी कंपनियों के ज़रिए रूस को बेचता है. चीन की कुछ कंपनियां, असैनिक ड्रोन भी रूस को दे रही हैं. इसके लिए वो सैन्य और नागरिक मक़सद से इस्तेमाल करने के बीच की गफ़लत का फ़ायदा उठा रही हैं.'
अमेरिका का सेंटर फॉर एडवांस्ड डिफेंस स्टडीज़ कहता है कि हो सकता है कि चीन की कंपनियां, रूस को एंटी-एयरक्राफ़्ट मिसाइल राडार के इलेक्ट्रॉनिक कल-पुर्ज़ों का निर्यात कर रहा हो.
अमरीका ने एक चीनी कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जिनके बारे में अमरीका का कहना है कि वो यूक्रेन में लड़ रही रूस के भाड़े के सैनिकों वाली फ़ौज को सैटेलाइट तस्वीरें देकर मदद कर रही है.
रूस का सबसे अहम व्यापारिक साझीदार
एक साल पहले जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, तो पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. रूस से तेल के आयात करने और उसे उच्च तकनीकी उत्पाद निर्यात करने पर पाबंदियां लगा दी थीं.
पश्चिमी देशों की बहुत सी कंपनियों ने रूस से अपना पूरा कारोबार समेट लिया था. और 2022 में अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देशों के साथ रूस का व्यापार बहुत कम होता गया था.
हालांकि, रूस के साथ चीन का व्यापार 2022 में रिकॉर्ड 190 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जो उससे पहले के साल की तुलना में 30 फ़ीसद का इज़ाफ़ा है.
पिछले एक साल में चीन से रूस का आयात 13 प्रतिशत बढ़कर 76 अरब डॉलर पहुंच गया, और चीन को उसका निर्यात 43 प्रतिशत बढ़कर 114 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
साल 2022 में जैसे जैसे पश्चिमी देशों के साथ रूस का कारोबार कम होता गया, उसकी तुलना में चीन उसका कई गुना बड़ा और सबसे अहम व्यापारिक साझीदार बनता गया.
रूस से कितना तेल और गैस ख़रीद रहा है चीन?
रूस की सरकार की लगभग आधी सालाना आमदनी तेल और गैस बेचने से होती है. और, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते यूरोपीय संघ के देशों को रूस से तेल और गैस का निर्यात बहुत कम हो गया है. रूस इस कमी का एक बड़ा हिस्सा एशियाई देशों को अपना निर्यात बढ़ाकर पूरा कर रहा है.
रूस ने 2021 की तुलना में 2022 में चीन को दो गुने से ज़्यादा तरल पेट्रोलियम गैस का निर्यात किया है. इसके अलावा, पावर ऑफ़ साइबेरिया पाइपलाइन के ज़रिए रूस ने चीन को 50 प्रतिशत ज़्यादा प्राकृतिक गैस और 10 फ़ीसद अधिक कच्चा तेल निर्यात किया है.
आर्थिक रूप से विकसित देशों के समूह G7 ने यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर, समुद्र के रास्ते निर्यात होने वाले रूस के तेल की क़ीमत को सीमित करने की कोशिश की है.
लेकिन चीन ने इस प्रतिबंध को मानने से इनकार कर दिया, और वो रूस से बाज़ार भाव पर तेल ख़रीद रहा है.
रूस और चीन ने ऊर्जा संबंधों के विस्तार के लिए दूरगामी योजनाएं भी बनाई हैं.
दोनों देश मिलकर एक नई गैस पाइपलाइन (पावर ऑफ़ साइबेरिया 2) बनाने के लिए भी सहमत हो गए हैं.
अभी जिस पाइपलाइन से गैस भेजी जा रही है, वो 2019 में चालू हो गई थी. इससे गैस भेजने के लिए रूस और चीन के बीच 30 साल का समझौता हुआ है, जिसकी क़ीमत लगभग 400 अरब डॉलर है.
ये भी पढ़ें -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)