ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ को आतंकी घोषित करने से क्या होगा?

ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड आतंकी प्रतिबंध

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इमेज कैप्शन, ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' में 1 लाख 90 हज़ार सैनिक बताए जाते हैं.

'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ईरान के लिए धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर लड़ने वाली सेना है.

ये घरेलू संकट के साथ विदेशी खतरों की स्थिति में इस्लामिक राष्ट्र के हितों की रक्षा करती है. ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन ईरान की इस स्पेशल फोर्स को जल्द ही आतंकी संगठन घोषित करने की तैयारी में हैं.

आतंकी संगठन घोषित करने के पीछे दलील क्या है?

कुछ दिन पहले ईरान की सरकार में पूर्व मंत्री अलीरेज़ा अकबरी को फांसी की सज़ा दे दी गई थी. अलीरेज़ा ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद यहीं रह रहे थे. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली के मुताबिक, 'अलीरेज़ा को सज़ा-ए-मौत के बाद ब्रिटेन ईरान की स्पेशल फोर्स को आतंकी संगठन घोषित करने पर विचार कर रहा है.'

क्लेवरली ने कहा कि, "अलीरेज़ा को प्रलोभन देकर ईरान बुलाया गया और इसके बाद मनमाने ढंग से वहां की कुख्यात न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें सज़ा सुनाई गई."

अलीरेज़ा अकबरी को ब्रिटेन के लिए जासूसी के आरोप में दोषी करार दिया गया था. उन्होंने ईरान के आरोपों को खारिज करते हुए ये आरोप लगाया था कि वहां की खुफ़िया एजेंसियों ने उन्हें टॉर्चर कर जबरन अपराध क़ुबूल कराया.

अलीरेज़ा के आरोपों का समर्थन करते हुए ब्रिटेन की खुफ़िया एजेसियों ने भी ये माना कि ईरान के इंटेलिजेंस एजेंट्स ने पिछले एक साल में ईरानी पत्रकारों समेत ब्रिटेन में रह रहे 10 लोगों को निशाना बनाया.

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इमेज कैप्शन, कुछ दिन पहले अलीरेज़ा अकबरी को ब्रिटेन के लिए जासूसी के आरोप में ईरान में फांसी दी गई थी.

जर्मनी के विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक और यूरोपियन कमिशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी यूरोपियन यूनियन से अपील की है कि वो आईआरजीसी को आतंकवादी संगठनों की अपनी लिस्ट में शामिल करे.

अपनी अपील के पीछे दोनों ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर सख़्ती करने में आईजीआरसी की भूमिका को वजह बताया. ईरान में ये प्रदर्शन पिछले साल 22 साल की कुर्द महिला महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से जारी हैं.

यूरोपियन संसद पहले ही आईआरजीसी को आतंकी संगठन घोषित करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर चुकी है. लेकिन ये प्रस्ताव अमल में तभी आएगा जब यूनियन के सदस्य देश इसे अपनी मंज़ूरी देंगे.

अमेरिका 2019 में ही आईआरजीसी पर ये आरोप लगाते हुए आतंकी संगठनों की सूची में शामिल कर चुका है कि, ये 'हिज़बुल्ला' जैसे संगठनों का समर्थन करता है.

'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' है क्या?

इस आर्म्ड ग्रुप की स्थापना 1979 में ईरानी क्रांति की सफलता के बाद की गई थी. मक़सद था देश में इस्लामी तंत्र की रक्षा करना. मूल रूप से ये ईरान की नियमित सेना के विकल्प के तौर पर काम करता है.

लंदन के 'कैथम हाउस इंटरनेशनल अफ़ेयर्स थिंक टैंक' से जुड़ी डॉ. सनम विकल कहती हैं, "शुरुआत में ये एक छोटा सैन्य समूह था, लेकिन आज ये बहुत बड़े संगठन का रूप ले चुका है."

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इमेज कैप्शन, IRGC की वायुसेना ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम की देखभाल करती है.

ईरान की इस स्पेशल फ़ोर्स के पास अपनी ज़मीन है, अपनी नौसेना और एयरफ़ोर्स भी है. इन सबको मिलाकर एक लाख 90 हजार लोगों के इस संगठन से जुड़े होने का अनुमान है.

ये फ़ोर्स ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम भी संचालित करता है.

आईआरजीसी ने अपना बड़ा कारोबारी साम्राज्य भी खड़ा किया है, जिसमें डिफ़ेंस, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं. माना जाता है कि ईरान की अर्थव्यस्था में इनकी हिस्सेदारी एक तिहाई के क़रीब है.

ईरान में आईआरजीसी क्या करता रहा है?

आईआरजीसी का एक पैरा मिलिट्री विंग है बासिज रेसिस्टेंस फोर्स (BRF). इस विंग के ज़रिए आईजीआरसी पूरे ईरान में आंतरिक सुरक्षा संभालता है. यही विंग पिछले 4 महीनों से जारी ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती करने में सबसे आगे है.

कुछ अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और न्यूज़ एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक़ अब तक विरोध प्रदर्शनों में शामिल 522 लोग मारे जा चुके हैं.

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर मरियम अलेम्ज़ादेह कहती हैं, "बासिज ने प्रदर्शकारियों पर आंख मूंद कर हिंसक कार्रवाई की. इसने कई लोगों को पीट-पीट कर मार डाला. इससे सरकार का कोई फ़ायदा नहीं हो रहा, बल्कि बासिज की हिंसा के बाद विरोध प्रदर्शन और तेज़ हुए"

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इमेज कैप्शन, IRGC की 'बासिज' विंग का इस्तेमाल सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने में होता है.

विदेशों में क्या करता है आईआरजीसी?

ईरान की इस स्पेशल फ़ोर्स की सबसे चर्चित शाखा है 'क़ुद्स फ़ोर्स'.

यहां से ये मध्य पूर्व में सक्रिय लेबनान के हिज़बुल्लाह जैसे आर्म्ड ग्रुप्स, ईराक़ की शिया मिलिशिया और सीरिया सरकार के लिए लड़ने वाले लड़ाकों की ट्रेनिंग के साथ पैसे और हथियार मुहैया कराता है.

प्रोफ़ेसर अलेम्ज़ादेह कहती हैं, "क़ुद्स फ़ोर्स उन जगहों पर तमाम आर्म्ड ग्रुप्स के बीच दोस्ताना संबंध मज़बूत करने की कोशिश करता है, जहां शक्ति संतुलन ईरान के पक्ष में बनाया जा सकता है."

वही डॉ. विकल बताती हैं, "ईरान की सरकार अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती हैं और ऐसे सभी ग्रुप्स का समर्थन करती हैं जो दूसरे देशों में अमेरिका पर हमला करें."

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इमेज कैप्शन, ईरान के सुप्रीम लीडर की तस्वीर के साथ लेबनान में प्रदर्शन करते 'हिज़बुल्लाह' समर्थक

अमेरिका क़ुद्स फ़ोर्स और इसके समर्थित ग्रुप्स पर ये आरोप लगाता है कि इन्होंने इराक़ और मध्य-पूर्व के दूसरे इलाक़ों में उसके सैकड़ों सैनिकों की हत्या की.

आईआरजीसी को आतंकी संगठन घोषित करने से क्या होगा?

आतंकी संगठन घोषित करने से सबसे बड़ा फ़र्क तो ये आएगा कि ईरान की इस स्पेशल फ़ोर्स से जुड़ना या इसे समर्थन करना एक अपराध हो जाएगा.

इसके अलावा जिस देश में भी इसकी संपत्तियां घोषित हैं, वो सब फ़्रीज कर दी जाएंगी. साथ ही इस संगठन को कोई भी नागरिक या कारोबारी संस्था किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं कर सकेगा.

डॉ. विकल के मुताबिक़, 'आईआरजीसी की घेराबंदी से ईरान को बड़ा नुकसान होगा, क्योंकि ईरान के अंदर और बाहर सरकार के अभियानों में इसकी भूमिका काफी बड़ी है. ये ईरान के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है, इस लिहाज़ से ये एक बेहतर टारगेट है.'

हालांकि डॉ. विकल इस बात के लिए आगाह भी करती हैं कि अपनी स्पेशल फ़ोर्स को आतंकी संगठन करार दिए जाने के बाद ईरान पलटवार कर सकता है. वो ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के देशों को आतंकी घोषित कर सकता है, जिसके बाद उन्हें मध्य-पूर्व में निशाना बनाना आसान हो जाएगा.

हालांकि प्रोफ़ेसर अलेम्ज़ादेह इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखतीं कि आईआरजीसी को आतंकी संगठन घोषित करने से उसके ऑपरेशन्स पर कोई असर पड़ेगा.

वो कहती हैं, "व्यावहारिक तौर पर इससे कोई बड़ा फ़र्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि ईरान पर पहले से ही इतने सारे प्रतिबंध लगे हुए हैं. ज़्यादा से ज़्यादा इसका असर सांकेतिक होगा."

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