शहबाज़ शरीफ़ ने नरेंद्र मोदी के साथ 'ईमानदार बातचीत' की पहल की, लेकिन फिर पलट गए

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 'ईमानदार बातचीत' चाहते हैं.

अरबी टीवी चैनल अल अरबिया के साथ बातचीत में शहबाज़ शरीफ़ ने भारत के साथ रिश्तों पर विस्तार से बात की.

उन्होंने कहा कि वे भारत के साथ कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर गंभीरता से बातचीत चाहते हैं.

हालाँकि बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस इंटरव्यू पर स्पष्टीकरण जारी किया है.

पीएमओ का ये कहना है कि पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने ये स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए बिना भारत के साथ बातचीत संभव नहीं.

हालाँकि इंटरव्यू के दौरान शहबाज़ शरीफ़ ने ये भी कहा था कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत और पाकिस्तान को बातचीत के टेबल पर लाने पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

पाकिस्तानी पीएम ने कहा- भारतीय नेतृत्व और पीएम नरेंद्र मोदी को मेरा संदेश यही है कि चलिए कश्मीर सहित अन्य मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत करते हैं.

हालाँकि उन्होंने कश्मीर में हर दिन मानवाधिक हनन का आरोप भी लगाया.

शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि भारत ने अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीरियों को मिली स्वायत्तता ख़त्म कर दी है.

कश्मीर पर फ़ैसला

भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया था. पाकिस्तान भारत के इस फ़ैसले को एकतरफ़ा और ग़लत बताता रहा है.

शहबाज़ शरीफ़ ने इंटरव्यू के दौरान दुनिया को ये भी याद दिलाया कि भारत और पाकिस्तान पड़ोसी हैं और उन्हें एक-दूसरे के साथ ही रहना है.

उन्होंने कहा- ये हम पर है कि हम शांति के साथ रहते हैं और प्रगति करते हैं या फिर एक दूसरे से लड़ाई में समय और संसाधनों की बर्बादी करते हैं. भारत के साथ हमने तीन युद्ध किया है और इससे ग़रीबी, बेरोज़गारी और दुर्गति ही आई है. हमने सबक सीख लिया है और हम शांति के साथ रहना चाहते हैं अगर हम अपनी समस्याओं को हल करने में सफल रहें. हम ग़रीबी ख़त्म करना चाहते हैं, लोगों को रोज़गार, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं. हम अपने संसाधान बम और हथियारों पर नष्ट नहीं करना चाहते हैं. ये संदेश मैं पीएम मोदी को देना चाहता हूँ.

शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और अगर दोनों देशों में युद्ध छिड़ गया, तो कोई बताने के लिए भी नहीं रहेगा कि क्या हुआ था.

शहबाज़ शरीफ़ के इस इंटरव्यू के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि पीएम ने इंटरव्यू के दौरान ये स्पष्ट रूप से कहा है कि कश्मीर विवाद का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावना के अनुसार होना चाहिए.

पाकिस्तान पीएमओ ने ये भी स्पष्ट किया है कि पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने बार-बार रिकॉर्ड पर ये कहा है कि भारत के साथ बातचीत तभी हो सकती है, जब वो कश्मीर पर अपना पाँच अगस्त 2019 वाला फ़ैसला वापस ले. इसके बिना भारत के साथ बातचीत संभव नहीं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान कई मोर्चों पर परेशानियाँ झेल रहा है. पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के अलावा आर्थिक समस्याओं का भी दौर चल रहा है.

बिलावल का विवादित बयान

नरेंद्र मोदी से बातचीत की पाकिस्तानी पीएम की पेशकश ऐसे समय आई है, जब पिछले महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने नरेंद्र मोदी को 'गुजरात का कसाई' तक कह दिया था.

भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन भी किया था. नरेंद्र मोदी को इस मामले में विपक्ष के कई नेताओं का समर्थन भी मिला था.

हालाँकि शहबाज़ शरीफ़ ने बिलावल भुट्टो के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं दी थी. लेकिन कई जानकारों ने ये ज़रूर कहा था कि बिलावल भुट्टो का बयान भारत के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में काम नहीं करेगा.

थिंक टैंक साउथ एशिया सेंटर के निदेशक उज़ैर यूनुस ने लिखा था- भारत से रिश्ते सुधारना वक़्त की ज़रूरत है, लेकिन इस कड़वी सच्चाई को इस्लामाबाद और रावलपिंडी में अनदेखा किया जाएगा.

पिछले साल अप्रैल में जब पाकिस्तान में इमरान ख़ान की सरकार गिर गई थी और शहबाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री बने थे, उस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी थी.

उस समय नरेंद्र मोदी ने लिखा था- भारत इस क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त चाहता है, जहाँ शांति और स्थिरता रहे, ताकि हम विकास की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अपने लोगों की समृद्धि और ख़ुशहाली सुनिश्चित कर सकें.

बातचीत की पहल नहीं

लेकिन पाकिस्तानी नेशनल असेंबली में प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में शहबाज़ शरीफ़ ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का मुद्दा उठाया था. उन्होंने ये भी कहा था कि उनकी सरकार वहाँ के लोगों को कूटनीतिक और नैतिक समर्थन उपलब्ध कराती रहेगी. साथ ही वे इस मुद्दे को हर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाएँगे.

शहबाज़ शरीफ़ ने आगे कहा- हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं लेकिन जब तक कश्मीर मसले का हल नहीं होता, स्थायी शांति संभव नहीं.

पाकिस्तान में पिछले साल जब भयानक बाढ़ आई, तो भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने संवेदना संदेश लिखा, तो शहबाज़ शरीफ़ ने उसका जवाब तो दिया. लेकिन उनके संदेश से ऐसा लगा कि उन्हें इस आपदा में भारत से कोई मदद नहीं चाहिए.

हालाँकि उनकी सरकार के कुछ मंत्री ये सार्वजनिक रूप से कह चुके थे कि वे किसी भी देश से मदद लेने को तैयार हैं. बाद में शहबाज़ शरीफ़ ने बाढ़ की आपदा से निपटने के लिए कई देशों और संगठनों से वित्तीय मदद ली.

शहबाज़ शरीफ़ के कार्यकाल में कभी भारत के साथ खुलकर बातचीत की पेशकश नहीं की गई और न ही उनके पूर्ववर्ती इमरान ख़ान ने ही कोई पहल की.

अपने शासनकाल के आख़िरी दौर में इमरान ख़ान ने ज़रूर भारत की विदेश नीति की तारीफ़ की. लेकिन उन्होंने कई मौक़े पर नरेंद्र मोदी की सरकार को फ़ॉसिस्ट और भारत में इस्लामोफ़ोबिया का आरोप लगाया था.

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