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चीन ने अपने अमेरिकी राजदूत को विदेश मंत्री क्यों बनाया
- Author, प्रियंका झा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
चीन ने अमेरिका में अपने राजदूत क़िन गांग को देश का नया विदेश मंत्री बनाया है.
56 साल के क़िन गांग दशक भर से चीन के विदेश मंत्री रहे वांग यी की जगह लेंगे.
वांग यी को अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो के लिए चुना गया है और अब वो विदेश नीति में पहले से बड़ी भूमिका निभाते दिखेंगे.
क़िन गांग की विदेश मंत्री के तौर पर नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब अपनी आक्रामक विदेश नीति के चलते चीन दुनियाभर में निशाने पर है.
अमेरिका में भी क़िन गांग का राजदूत के तौर पर 17 महीनों का कार्यकाल दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव का ही गवाह रहा.
हालात ये थे कि साल 2021 में जब वो वॉशिंगटन पहुँचे तो बहुत कम ही अमेरिकी अधिकारियों तक उनकी पहुँच थी. कई बार आग्रह के बावजूद अमेरिकी अधिकारी उनसे मिलने से हिचकते रहे.
हालांकि, व्हाइट हाउस इन दावों को ख़ारिज किया और कहा कि समय-समय पर उनके अधिकारियों ने किन से बातचीत जारी रखी है.
क़िन के प्रमोशन को व्यापक स्तर पर अमेरिका से कूटनीतिक रिश्तों को स्थिर करने के लिए चीनी प्रयासों से ही जोड़कर देखा जा रहा है, जो बीते कुछ समय में मानवाधिकार, ताइवान, तकनीकी जैसे कई मुद्दों पर सबसे ख़राब दौर में पहुंच गए हैं.
अमेरिका से विदाई पर क़िन गांग क्या बोले?
"अमेरिका को चीन को दबाने और नियंत्रित करने की कोशिश बंद कर देनी चाहिए."
"ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका को लाल लकीर पार नहीं करनी चाहिए."
ऊपर लिखे दोनों बयान चीन के पूर्व विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में दिए थे. हालांकि, अमेरिका को लेकर उनके आक्रामक बयान अक्सर चर्चा के विषय रहते आए हैं.
लेकिन अपने पूर्ववर्ती से उलट किन ने विदेश मंत्री बनाए जाने पर एक के बाद एक कई ट्वीट किए, जिनका सार देखें तो वो अमेरिका की तारीफ़ करने के साथ ही चीन के कूटनीतिक हितों का बचाव करते भी दिखते हैं.
पांच सौ से अधिक दिन अमेरिका में बिताने के बाद क़िन गांग ने अमेरिका और अमेरिकियों की तारीफ़ की है.
अपने सिलसिलेवार ट्वीट्स की शुरुआत क़िन गांग ने अमेरिका और चीन के बीच तल्ख रिश्तों के ज़िक्र से की.
गांग बताया कि साल 2021 में उन्होंने अमेरिका में चीन के राजदूत का पद तब संभाला जब दोनों देश बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति में थे. अपने कार्यकाल में उन्होंने अमेरिका के 22 राज्यों, सरकारी एजेंसियों, कांग्रेस, थिंक टैंक, फ़ैक्टरियों, बंदरगाहों, खेतों, स्कूलों और खेल के मैदानों का दौरा किया और बहुत से अमेरिकियों को अपना दोस्त बनाया.
क़िन गांग ने कहा कि वो कई मेहनतकश, प्रतिभावान और मैत्रीपूर्ण अमेरिकियों के देखकर बहुत प्रभावित हुए.
उन्होंने कहा, "मैं चीन-अमेरिका संबंधों के विकास की देखभाल और समर्थन करना जारी रखूंगा, दोनों देशों के लोगों के बीच संवाद, आपसी समझ और आत्मीयता को प्रोत्साहित करूंगा."
वापसी के लिए चीन की उड़ान भरने से पहले भी क़िन गांग ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से फ़ोन पर बात की और दोनों देशों के बीच "बेहतर" रिश्तों पर ज़ोर दिया.
शी जिनपिंग का क़रीबी होना अहम फ़ैक्टर?
विदेश मंत्री के तौर पर क़िन गांग का प्रमोशन ये संकेत देता है कि वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग के क़रीबी हैं.
बीते साल अक्टूबर में किन को कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमिटी में नियुक्त कर के जिनपिंग ने ये साफ़ संकेत दिया कि क़िन उनके भरोसेमंद हैं.
क़िन गांग को जब साल 2021 में अमेरिका का राजदूत चुना गया था, तब उनका नाम सबके लिए चौंकाने वाला था.
उन्हें अमेरिका के साथ चीन के रिश्तों को संभालने का कोई अनुभव नहीं था, इसलिए राजदूत के तौर पर उनका नाम दूर-दूर तक फ़ेहरिस्त में नहीं था.
तियानजिन में सन् 1966 में जन्में क़िन ने इंटरनेशनल रिलेशन्स की पढ़ाई की. उन्होंने साल 2005-2010 और फिर 2011 से 2014 के बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के तौर पर काम किया. लेकिन उनके करियर में अहम मोड़ साल 2014 में आया.
'द चाइना प्रोजेक्ट' नाम की वेबसाइट के एक आर्टिकल के अनुसार, 2014 में क़िन को विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल डिपार्टमेंट की ज़िम्मेदारी दी गई. ये एक ऐसा पद था जहां देश के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ क़रीबी बढ़ाने के पर्याप्त मौक़े होते हैं, ख़ासतौर पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ.
अमेरिका संग संबंध सामान्य करवा पाएंगे क़िन?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की तत्कालीन अध्यक्ष नैंसी पेलोसी का ताइवान दौरे ने चीन और अमेरिका के खराब होते रिश्तों में आग की तरह काम किया.
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इस दौरे को लेकर चीन ने अमेरिका को "भारी कीमत चुकाने" की धमकी तक दे दी थी.
नैंसी पेलोसी के दौरे के जवाब में चीन ने अपने लड़ाकू विमान ताइवान के हवाई क्षेत्र में भेज दिए थे, जिसके बाद ये आशंका जताई जाने लगी कि चीन ताइवान पर हमला कर सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सार्वजनिक तौर पर ये तक कहा कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा.
हालांकि, साल के आख़िरी महीनों में चीन और अमेरिका के तल्ख रिश्तों में बीते साल थोड़ी नरमी देखने को मिली.
जब नवंबर के मध्य में इंडोनेशिया के बाली में जी-20 सम्मेलन के दौरान पहली बार शी जिनपिंग और जो बाइडन आमने-सामने मिले.
अमेरिका, चीन का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. इससे पहले सिर्फ़ यूरोपियन यूनियन और आसियान के देश ही आते हैं.
कूटनीतिक रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बीच बीते साल दोनों के बीच कारोबार 8 फ़ीसदी बढ़ा था.
कहा जा रहा है कि क़िन गांग की असल परीक्षा इसपर निर्भर है कि वो अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के चीन दौरे को किस तरह संभालते हैं.
पॉलिटिको ने यूएस-चाइना बिज़नेस काउंसिल के प्रेज़िडेंट ऐलन के हवाले से लिखा है, "हमारी समझ से ब्लिंकन फ़रवरी महीने में चीन जाएंगे. अगर इससे पहले अमेरिका के रिपबल्किन नेता केविन मैकर्थी अपने वादे के अनुसार, ताइवान के दौरे पर जाते हैं तो ब्लिंकन को चीन में कूटनीतिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है."
केविन मैकर्थी ने कहा था कि अगर वो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष बनते हैं तो वो ताइवान की यात्रा पर जाएंगे.
ब्लिंकन ने अभी तक ये जानकारी नहीं दी है कि उनके चीन दौरे पर अहम मुद्दे क्या होंगे. लेकिन माना जा रहा है कि मादक पदार्थों के ख़िलाफ़ अभियान, चीन के बढ़ते परमाणु हथियारों के मुद्दों पर उन्हें किन गांग की मदद की ज़रूरत पड़ सकती है.
वॉशिंगटन में स्टिमसन सेंटर के चीन से जुड़े एक प्रोग्राम की निदेशक सन यन कहती हैं, "चीन की कूटनीति के नए चेहरे को अमेरिका-चीन रिश्तों के साथ ही मॉस्को के साथ संबंधों पर भी काम करना है."
वेबसाइट एनपीआर से बात करते हुए उन्होंने कहा, "उनकी शीर्ष प्राथमिकता अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारना होगा, क्योंकि दो सप्ताह के भीतर ब्लिंकन चीन दौरे पर रहेंगे. लेकिन उन्हें चीन की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए अन्य विकसित देशों से भी बेहतर रिश्ते बनाने होंगे. इसके बाद उन्हें रूस और उत्तर कोरिया जैसे मसलों से भी निपटना होगा."
क़िन चीन में कोई नया चेहरा नहीं है. चीन के विदेश मंत्रालयों में सबसे बुलंद आवाज़ों में से एक माने जाने वाले क़िन ने अमेरिका पहुंचते ही अपने रुख में नरमी दिखाना शुरू कर दिया था.
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था, "चीन-अमेरिका के रिश्तों के दरवाज़े जो पहले ही खुले हैं, बंद नहीं हो सकते."
अमेरिका में अपने छोटे से कार्यकाल में किन को कभी किसानों से मिलते तो कभी एलन मस्क के साथ बातचीत करते देखा गया.
एनपीआर को दिए इंटरव्यू में क़िन ने माना कि चीन का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता अमेरिका के साथ है लेकिन ताइवान के मुद्दे को उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के बीच सबसे बड़ा "विवाद" बताया.
ये भी पढ़ें: चीन ने क्यों दी अमेरिका को ख़मियाज़ा भुगतने की धमकी
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