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चीन ने कहा, रिश्ते मजबूत करने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार
सीमा पर बने तनाव को लेकर रिश्तों में आई तल्खी की ख़बरों के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ 'रिश्ते मजबूत करने की दिशा में काम करने को तैयार है.'
वांग यी ने रविवार को कहा, "हम चीन-भारत रिश्तों की निरंतरता और उन्हें मजूबती के साथ आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार हैं."
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दुनिया के दूसरे देशों के साथ चीन के संबंधों पर भी बात की और कहा कि अगले साल (2023) वो अपना कूटनीतिक एजेंडा और 'अधिक मज़बूती से' आगे बढ़ाएंगे.
रविवार को दुनिया के दूसरे देशों से साल 2022 में चीन के संबंधों पर आयोजित एक कार्यक्रम में वांग यी ने कहा, "आने वाले साल में हम वैश्विक विज़न बनाए रखेंगे और अधिक मज़बूती के साथ आगे बढ़ेंगे. हम नया इतिहास लिखेंगे और व्यापक नज़रिए के साथ देश की कूटनीति में नई सफलताएं हासिल करेंगे."
बीजिंग में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के साथ संबंधों पर वांग यी ने कहा कि दोनों देश 'कूटनीतिक और सेना के चैनल्स' के माध्यम से आपसी संपर्क बनाए हुए हैं.
भारत को लेकर वांग यी का ये बयान ऐसे वक़्त आया है जब इसी महीने अरुणाचल के तवांग में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प की तस्वीरें सामने आईं थीं. भारत में इसे लेकर विपक्ष ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से तीखे सवाल पूछे थे.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया था, "नौ दिसंबर 2022 को पीएलए सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांगत्से एरिया में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफ़ा बदलने का प्रयास किया. चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया है."
उन्होंने कहा, "इस फ़ेस-ऑफ़ (झड़प) में हाथापाई भी हुई है. भारतीय सेना ने पीएलए को उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया."
राजनाथ सिंह ने कहा था, "इस झड़प में दोनों तरफ़ के सैनिकों को चोटें भी आई हैं. इस घटना में हमारे किसी भी सैनिक की न तो मृत्यु हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है."
वांग यी ने भारत की बात करते हुए इस घटना का कोई ज़िक्र नहीं किया. लेकिन उन्होंने ये ज़रूर कहा कि दोनों देश संपर्क में हैं.
उन्होंने कहा, "चीन और भारत के बीच राजनयिक और मिलिट्री टू मिलिट्री चैनल्स के जरिए संपर्क बना हुआ है. दोनों देश बॉर्डर इलाक़ों में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
भारत-चीन सीमा विवाद
अप्रैल 2020 के बाद से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव है. वांग यी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भारत चीन बाउंन्ड्री मेकनिज़्म में विशेष प्रतिनिधि हैं, लेकिन सीमा विवाद के बाद से ये मेकनिज़्म फिलहाल निष्क्रिय है.
विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों में कॉर्प्स कमांडर स्तर की 17 दौर की बातचीत हो चुकी है. आख़िरी बात 20 दिसंबर को हुई बातचीत में दोनों में सहमति बनी थी कि दोनों कूटनीतिक और सेना के चैनल्स के माध्यम से संपर्क बनाए रखेंगे.
पाकिस्तान पर क्या बोले वांग यी?
पाकिस्तान के साथ संबंधों पर वांग यी ने कहा कि दोनों देश एकदूसरे का पूरी तरह समर्थन करते हैं और आने वाले वक्त में ऐसा करते रहेंगे.
उन्होंने कहा कि दोनों देश रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण अपने रिश्तों को और मज़बूत करेंगे.
अमेरिका के साथ संबंधों पर क्या बोले?
अमेरिका के साथ चीन के रिश्तों पर वांग यी ने कहा कि उनका देश अमेरिका की 'ग़लत चीन नीति' का कड़े शब्दों में विरोध करता है और वो दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर करने के लिए रास्तों की तलाश जारी रखेगा.
इसके पहले इसी सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा था, 'चीन को अमेरिका अपना एकमात्र प्रतिद्वंदी मानता है.'
अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं और दोनों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के दौर से जारी ट्रेड वॉर अभी भी थमा नहीं है.
अमेरिका दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ाते दबदबे के सख्त ख़िलाफ़ है और इस इलाक़े में नैविगेशन की आज़ादी का हवाला देते हुए अपने युद्धपोत भेजता रहता है. वहीं चीन इस इलाक़े को अपना मानता है और उसके इस इलाक़े में कई कृत्रिम द्वीप बनाए हैं. इनमें से कुछ पर उसने अपने सैन्य अड्डे भी बनाए हैं.
वांग यी ने ताइवान का मुद्दा भी उठाया और कहा कि ताइवान पर अमेरिका के रुख़ से वो नहीं डरता. उन्होंने कहा कि चीन अपने हितों और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
ब्लिंकन के बयान के बाद वांग यी ने 23 दिसंबर को फ़ोन पर उनसे बात की. इस दौरान उन्होंने उनसे कहा कि नए साल में दोनों देशों को अपने रिश्ते बेहतर करने चाहिए और दुनिया को एक सकारात्मक संदेश देना चाहिए.
रूस के साथ संबंधों पर क्या बोले?
यूक्रेन युद्ध से हटकर रूस के मामले में वांग यी ने कहा कि दोनों मुल्कों के रिश्ते मज़बूत हो रहे हैं.
उन्होंने कहा, "अच्छे पड़ोसी के तौर पर हमारे रिश्ते, दोस्ती और हमारा सहयोग गहरा हुआ है. इस कारण दोनों के बीच रणनीतिक साझेदारी अब परिपक्व है."
उन्होंने कहा बीते साल चीन और रूस ने एकदूसरे के हितों को देखते हुए एकदूसरे का समर्थन किया है और दोनों के बीच राजनीतिक और आपसी भरोसा और मज़बूत हुआ है.
यूक्रेन संकट पर क्या बोले?
उन्होंने यूक्रेन संकट पर कहा कि इस मामले में हमने लगातार वस्तुनिष्ठता और निष्पक्षता के मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखा है. न तो हमने किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं किया है और स्थिति स्वार्थी उद्देश्य पूरा करने के लिए न ही आग में घी डालने का काम किया है.
हमने दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता की बात की है और मूल मुद्दे तक पहुंच कर उसे सुलझाने की बात की है.
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पहले भी कहा है कि युद्ध का कोई विजेता नहीं होता, और किसी जटिल मुद्दे का आसान हल नहीं होता. दो बड़े मुल्कों के बीच संघर्ष को हर हाल में टाला जाना चाहिए. "
सऊदी अरब को लेकर क्या कहा?
सऊदी अरब के साथ रिश्तों को लेकर वागं यी ने कहा कि इसमें ऐतिहासिक प्रगति हुई है.
उन्होंने कहा कि साल 2022 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग सबसे पहले चीन-अरब सम्मेलन में शामिल हुए और 1949 में चीन के अस्तित्व में आने के बाद से पहली बार कूटनीतिक स्तर पर अपने उच्चतम स्तर पर संपर्क स्थापित किए हैं.
बेल्ट एंड रोड परियोजना में अब 150 देश शामिल
चीन का महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड परियोजना के बारे में उन्होंने कहा कि चीन साल 2023 में परियोजना के तहत तीसरे अंतरराष्ट्रीय फोरम का आयोजन करेगा.
उन्होंने कहा कि 2022 में चीन ने पांच और देशों के साथ इस परियोजना को लेकर समझौते किए हैं और अब इस बड़ी परियोजना में कुल 150 देश और 32 अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं शामिल हो गई हैं.
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