अमेरिका पहुंचने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं प्रवासियों को

विलमैरी कपाचो
इमेज कैप्शन, विलमैरी कपाचो अपनी बेटी के साथ.
    • Author, बर्न्ड डेबुसमन जूनियर
    • पदनाम, एल पासो, टेक्सस

अमेरिका में दाखिल होने की कोशिश के दौरान गुजरात के बृजकुमार यादव की अभी हाल ही में मौत हुई है. वो ट्रंप वॉल को अवैध रूप से फांदने की कोशिश कर रहे थे.

उनकी ही तरह दुनिया भर के हज़ारों प्रवासी अमेरिका के पड़ोसी देश से सीमा पार करने की कोशिश करते हैं. कुछ को सफलता मिलती है कुछ को जान से हाथ धोना पड़ता है या क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है.

लेकिन सीमा तक पहुंचना भी कम कठिन नहीं होता, कई देशों से गुजर कर हज़ारों किलोमीटर की यात्रा में जंगल, पहाड़, नदी पार कर वे सीमा पर पहुंचते हैं.

अमेरिकी सीमा के पास टेक्सस में एल पासो शहर प्रवासियों का अंतिम अड्डा है, यहां बीबीसी ने ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से प्रवासियों के हालात के बारे में जानने की कोशिश की.

अमेरिकी सीमा पर पहुंचने के लिए विलमैरी कमाचो को अपने चार महीने के बच्चे और तीन साल की बेटी के साथ पहाड़ों और जंगलों को पार करते हुए, बीमारियों से लड़ते हुए और रास्ते में हिंसक लूट पाट का सामना करते हुए हज़ारों मील का सफ़र करना पड़ा था.

वेनज़ुएला की रहने वाली विलमैरी ने बीबीसी को बताया, "इस पूरी यात्रा में जंगल वाला हिस्सा सबसे कठिन था. जंगल में लोग मरे पड़े मिले, ऊपर से जंगली जानवरों का डर भी था. ये बहुत ख़तरनाक यात्रा थी."

वो कहती हैं, "हमारे पास बच्चे थे. इन बच्चों के साथ हर दिन मुश्किल बढ़ती जा रही थी."

वीडियो कैप्शन, अमरीका का जानलेवा सफ़र क्यों कर रहे प्रवासी

अमेरिकी सीमा पर पहुंचने पर क्या होता है?

इसी सप्ताह मिस कमाचो अपनी बड़ी बेटी मिया के साथ शहर के डाउनटाउन में फ़ुटपाथ पर बैठीं थीं. उनके पास कंबलों का ढेर लगा हुआ था. उनके पति इससे कुछ ही दूरी पर सिगरेट पीते हुए अपनी आगे की यात्रा की योजना बना रहे थे.

उनकी यात्रा अभी ख़त्म होने वाली नहीं थी. उन्होंने कहा, "ये तो आधा भी नहीं है. हम डेनवर की ओर जा रहे थे. हमने अपने टिकट ले लिए हैं."

तेईस साल की कमाचो उन 20 लाख प्रवासियों में से एक हैं जो पिछले एक साल में यहां पहुंचे. आशंका है कि अगले साल ये संख्या और बढ़ने वाली है. एल पासो एक ऐसा शहर है जहां प्रवासियों की भीड़ हाल के सप्ताहों में तेज़ी से बढ़ी है जिसकी वजह से स्थानीय प्रशासन को ज़रूरी संसाधन जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है.

कमाचो परिवार की तरह ही अमेरिका में शरण मांगने वालों की ज़िंदगी का एक नया अध्याय शुरू होता है. उन्हें अमेरिकी बॉर्डर पर मौजूद कस्टम्स एंड बॉर्डर पेट्रोल (सीबीपी) के सामने खुद को पेश करना होता है.

यहां प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें स्थानीय प्रशासन और संस्थाओं को सौंप दिया जाता है, जो उनके खाना, पानी, कपड़ा और रहने का फ़ौरी इंतज़ाम करते हैं.

एल पासो में ही प्रति दिन क़रीब 1500 प्रवासी पहुंचते हैं.

यहां मदद करने वाले ग्रुप प्रवासियों के आगे की यात्रा की योजनाओं में मदद करते हैं. इसके बाद उन्हें अपनी अर्ज़ी पर कोर्ट के फैसले का इंतज़ार करना पड़ता है.

अदालत ही तय करती है कि देश में उनका स्टेटस क्या होगा.

इस दौरान लोग अमेरिका में अपने परिवार के साथ मिलने या काम पाने की उम्मीद में आगे की यात्रा की योजना बनाते हैं.

इसी हफ़्ते एल पासो की सड़कों पर बीबीसी ने कई प्रवासियों से अमेरिका में उनके गंतव्य के बारे में बात की.

इनमें से कुछ 'स्पांसर्ड' प्रवासी थे, जिनके रिश्तेदारों या दोस्तों ने उनकी आर्थिक मदद का वादा किया हुआ था, जबकि कुछ प्रवासी तो ऐसे भी हैं जो बिना किसी संपर्क के ही यात्रा कर रहे थे जबकि उनके पास उनके कपड़ों के अलावा बहुत थोड़ा ही सामान था.

एलोईज़ एसीवीदो
इमेज कैप्शन, एलोईज़ एसीवीदो

अच्छे भविष्य की उम्मीद में सहने पड़ रहे बेइंतहा कष्ट

निकारागुआ की रहने वाली एलोईज़ एसीवीदो कहती हैं, "मैं न्यूयॉर्क जा रही हूं. मेरी वहां एक रिश्तेदार है."

उन्होंने बताया कि इस यात्रा में उनके सारे पैसे लूट लिए गए. वो अकेली हैं और अब उनके पास एक पैसा नहीं है.

उन्होंने बताया, "शहर से एक लड़का आया और मदद करने का वादा कर गया. लेकिन उसके बाद कोई भी मदद करने को नहीं आया."

मिस एसीवीदो को न्यूयॉर्क पहुंचना बहुत ज़रूरी है. अपनी डबडबाई आंखों से उन्होंने बताया कि निकारगुआ में वो अपने एक साल के बेटे समेत तीन बेटों को छोड़ कर आई हैं और उन्हें बस अपने रिश्तेदार से ही उम्मीद है.

एलोईज़ कहती हैं, "ये एक बलिदान है...निकारागुआ में जीना असंभव था. मैं ग़ुलाम की तरह काम करके भी हफ्ते में करीब 30 डॉलर कमा पाती थी. खाना भी बहुत महंगा था. शुक्र है कि अब मैं वापस पैसे भेज सकूंगी. बस इतनी ही मेरी इच्छा थी."

डोमिनिकन रिपब्लिक की रहने वाली एलियानी रोड्रिगेज़ ने बीबीसी को बताया कि इस यात्रा का सबसे कठिन हिस्सा इंतज़ार है, कि अब आगे क्या होगा.

वो न्यूजर्सी जाना चाहती हैं जहां उनके दोस्त और रिश्तेदार हैं. अमेरिका के इस राज्य में डोमिनिकन मूल के लोगों की अच्छी ख़ासी संख्या है.

उन्होंने कहा, "मैं इस पागल कर देने वाली हालत में पिछले नौ दिनों से रहते हुए सिर्फ इस बात का इंतज़ार कर रही हूं कि मैं अपने परिवार के लिए एक अच्छे भविष्य की शुरुआत कर पाउंगी."

वो कहती हैं, "इसके बाद कोर्ट की तारीख़ का इंतज़ार करना होगा और कोई ग़लती नहीं करनी होगी. बस सिम्पल जीवन जीना है."

मिस रोड्रिगेज़ को हो सकता है कि लंबा इंतज़ार न करना पड़े. बुधवार को उन्होंने बताया कि शहरी प्रशासन ने उनके लिए न्यूयॉर्क के टिकट का इंतज़ाम कर दिया है.

रोड्रिगेज़ ने कहा, "उन्होंने बस इतना कहा कि सरकार लोगों को न्यूयॉर्क तक पहुंचने में मदद कर रही है. हम बहुत शुक्रगुजार हैं."

एल पासो टेक्सस
इमेज कैप्शन, एल पासो टेक्सस में प्रवासियों की कतार.

इंतज़ार, इंतज़ार और इंतज़ार

इंतज़ार करना, एल पासो में प्रवासियों की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है, चाहे उनकी अगली यात्रा का मामला हो या बस खाना हासिल करना हो.

52 साल के पूर्व आर्मी अफ़सर रोड्रिगो एन्तोनियो हर्नान्डेज़ ने बताया कि सरकारी एजेंटों के टॉर्चर के बाद वो वेनेज़ुएला से भाग आए.

उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रवासी स्थानीय निवासियों के लिए कोई मुश्किल नहीं पैदा करना चाहते और शांति से चले जाना चाहते हैं.

हाल ही में एक सुबह स्थानीय फ़ूड बैंक से खाना आने का इंतज़ार करते हुए हर्नान्डेज़ बाकी प्रवासियों को अपने अपनी जगहों की साफ़ सफ़ाई करने और कूड़े को डस्टबिन में डालने के निर्देश दे रहे थे.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "हमें अनुशासित रहना है."

सिटी पार्क में एहतियात से लपेटे गए बिस्तर और सलीके से रखे गए थैलों की ओर उन्होंने इशारा करते हुए कहा, "हम नहीं चाहते कि लोगों या पूरे समुदाय में हमारे प्रति दुराव पैदा हो. अगर हम इस इलाके को गंदा करेंगे, तो प्रवासियों के बारे में लोगों के मन में ख़राब ख़्याल आएंगे."

वीडियो कैप्शन, Watch: Families will spend Christmas far from home - and loved ones.

अमेरिका में कहां जाएंगे, क्या करेंगे कुछ नहीं पता

जहां कुछ लोगों को आगे के बारे में कुछ भी नहीं पता, वहीं कुछ लोग अमेरिका में एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करना चाहते हैं.

इन्हीं में से एक हैं चिली की नागरिक केनिया कांट्रेरास और उनके वेनेज़ुएलियन पति एंथनी वाब्रा. इनके साथ इनका चार साल का बेटा भी है.

आख़िरकार ये लोग अमेरिका पहुंच गए लेकिन चिली से अमेरिकी बॉर्डर तक पहुंचने के लिए उन्हें नौ देशों से होकर गुजरना पड़ा.

एंथनी कहते हैं, "हम यहां अटलांटा में हैं और ह्यूस्टन में मेरा परिवार है. लेकिन हम किसी ज़िंदगी में बाधा नहीं डालना चाहते. अगर बाकी लोग बिना किसी मदद के ये कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं. हम यहां काम करने के लिए आए हैं, मदद मांगने नहीं."

हालांकि उनका कहना है कि वे कहां जाएंगे और वे क्या करेंगे उन्हें नहीं पता.

मिस कांट्रेरास कहती हैं, "मैं इस बच्चे को बेहतर ज़िंदगी देना चाहती हूं...खुदा जहां ले जाएगा, वहां जाएंगे." वो ये बात कहते हुए फ़ुटपाथ पर बैठकर अपने जूतों के फीते से खेलते बच्चे की ओर इशारा करती हैं.

वो कहती हैं, "जो भी हो, चाहे हमें कैंडी या कैरामेल बेचना पड़े. लेकिन एक बार जब काम मिल जाएगा तो हम जान लगा देंगे."

एलेक्जेंडर ओस्टासीविच की एडिशनल रिपोर्टिंग

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