यूक्रेन युद्ध: अमेरिकी पेट्रियट मिसाइल से यूक्रेन को सुकून पर मॉस्को में ख़तरे की घंटी

    • Author, क्रिस पेर्ट्रिज
    • पदनाम, हथियारों के विशेषज्ञ, बीबीसी न्यूज़

यूक्रेन को अमेरिका एक एडवांस मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम दे रहा है. ये रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों के ख़िलाफ़ एक कारगर हथियार साबित होगा.

आज यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमीर ज़ेलेंस्की वॉशिंगटन पहुँच रहे हैं. इनके पहुँचने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है.

फ़रवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ही पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को कई एयर डिफ़ेंस सिस्टम भेजे हैं. इनमें स्टिंगर मिसाइलें और अन्य कई छोटी मिसाइलें शामिल हैं. कुछ तो रडार-संचालित एडवांस मिसाइलें भी यूक्रेन पहुँची हैं.

इन सभी मिसाइलों से रूस की ओर से आने वाले ख़तरों से कई स्तर पर मदद मिलती रही है.

पेट्रियट मिसाइल इसी श्रेणी में एक और हथियार है. लेकिन इसका यूक्रेन पहुँचना रूस को क्रोधित कर सकता है.

लेकिन ये मिसाइल यूक्रेन के लिए हर मर्ज़ की दवा तो बिल्कुल नहीं है.

क्यों है पेट्रियट मिसाइल ख़ास

ऐसा नहीं है कि पेट्रियट मिसाइल यूक्रेन को रूस के साथ युद्ध में कोई निर्णायक बढ़त दे सकेगी. लेकिन ये बहुत ही कारगर, उपयोगी और महंगी मिसाइल है. सिर्फ़ पेट्रियट मिसाइल की क़ीमत क़रीब 8.28 करोड़ रुपए है.

ये अमेरिका की नेशनल एडवांस सर्फ़ेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (NASAMS) से तीन गुना महंगी है.

यूक्रेन के युद्ध में पहले से ही दो NASAMS मिसाइलें तैनात हैं.

व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा है, "पेट्रियट मिसाइल एडवांस सिस्टम यूक्रेन के लोगों को रूस के बर्बर हमलों से बचाने के लिए एक अहम हथियार होगा."

पेट्रियट मिसाइलों का प्रयोग पहले 1990 के दशक में खाड़ी युद्ध में रूस में बनी स्कड मिसाइलों को धराशाई करने के लिए किया गया था. इन्हें बनाने वाली रेथियॉन नामक कंपनी तब से इन मिसाइलों को और अधिक सटीक बनाती आई है.

ये मिसाइलें एक कमांड सेंटर, आसमान से आने वाले ख़तरे को डिटेक्ट करने के लिए रडार स्टेशन और लॉन्चर्स के साथ आती हैं. तोपखाने यानी आर्टिलरी की भाषा में इन सबको मिलाकर एक बैट्री कहा जाता है.

कितनी रेंज और कितनी उपयोगिता

पेट्रियट मिसाइल दरअसल दुश्मन की मिसाइलों को उड़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है. इनकी रेंज 40 किलोमीटर से 160 किलोमीटर तक हो सकती है.

इन्हें पॉइंट डिफ़ेंस सिस्टम भी कहा जाता है क्योंकि इनका प्रयोग शहरों या अहम स्थानों की हिफ़ाज़त के लिए किया जाता है. दूसरे शब्दों में ये मिसाइलें हाई-वेल्यू असेट्स की रक्षा के लिए तैनात की जाती हैं.

अमेरिका और कोई नेटो देश यूक्रेन के भीतर पेट्रियट मिसाइलों का प्रयोग नहीं कर सकता. उनका इस्तेमाल करने के लिए यूक्रेन की सेना को ट्रेनिंग दी जाएगी. ये ट्रेनिंग भी यूक्रेन के बाहर ही दी जा सकेगी.

ये संभव है कि यूक्रेन की सेना को ऐसी ट्रेनिंग देने की शुरुआत भी हो चुकी हो. हालांकि अमेरिकी सेना पहले ही कह चुकी है कि वो जनवरी से यूक्रेन के सैनिकों को जर्मनी में पेट्रियट मिसाइल चलाना सिखाएगा.

रूस की प्रतिक्रिया

रूस ने पेट्रियट मिसाइलों की तैनाती को पहले ही एक 'उकसाने वाला क़दम' बताया है. उसका कहना है कि ये यूक्रेन का युद्ध में अमेरिकी सेना की भागीदारी का विस्तार है.

रूस ने ये भी साफ़ कर दिया है कि ये मिसाइलें उनके हमले का 'जायज़ निशाना' होंगी.

लेकिन पेट्रियट मिसाइल के यूक्रेन के हाथ लगने का युद्ध पर क्या असर पड़ेगा ये कहना मुश्किल है. ये तय है कि मिसाइल से यूक्रेन को सुरक्षा की अतिरिक्त परत मिलेगी.

ये भी सच है कि यूक्रेन को इन मिसाइलों के बहुत कम यूनिट मिलने वाले हैं.

एक बात साफ़ है कि यूक्रेन की सोवियत ज़माने वाली ज़मीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें बहुत पुरानी हो चुकी हैं. अब यूक्रेन उन्हें पश्चिम से मिल रही अत्याधुनिक मिसाइलों से बदल रहा है.

और यूक्रेन की इन कारगुज़ारियों से रूस ख़ासा चिंतित है.

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