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बिलावल भुट्टो ने मोदी पर विवादित टिप्पणी को ठहराया सही, अमेरिका ने भी दी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान को सही ठहराते हुए कहा है कि उन्होंने वही कहा जो इतिहास में दर्ज है.
ब्लूमबर्ग से बात करते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा, "मैं एक ऐतिहासिक सच्चाई की बात कर रहा था. मैंने जो शब्द इस्तेमाल किए वो मेरे शब्द नहीं थे. मैंने वो शब्द नहीं गढ़े. मैंने मोदी के लिए 'गुजरात का कसाई' शब्द ख़ुद से नहीं बनाया है. गुजरात दंगों के बाद ख़ुद भारत के मुसलमानों ने ये शब्द उनके लिए इस्तेमाल किया था. मुझे लगता है मैंने एक ऐतिहासिक तथ्य दोहराया लेकिन वो मानते हैं कि ऐतिहासिक तथ्य दोहराना व्यक्तिगत हमला है. दो दिन पहले नरेंद्र मोदी की पार्टी एक सदस्य ने मेरे सिर पर दो करोड़ रुपये का इनाम रखा है. मुझे नहीं लगता कि ये मेरी टिप्पणी से असहमत होने का ये अतिवादी तरीक़ा सही है."
इससे पहले भारत ने बिलावाल भुट्टो के बयान पर कड़ा एतराज जताया था और इसे असभ्य क़रार दिया था. पाकिस्तान के भी कई राजनयिकों का कहना है कि बिलावल भुट्टो व्यक्तिगत हमला करके डिप्लोमैसी नहीं चला सकते हैं.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से सोमवार को बिलावल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया मांगी गई थो उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने जो कहा, उससे यही उम्मीद की जा सकती है.
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिका ने भी बिलावल भुट्टो के बयान पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि दोनों ही देशों के साथ अमेरिका की साझेदारी है और वह दोनों देशों के बीच ज़ुबानी युद्ध नहीं देखना चाहता.
अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, "हमारी भारत के साथ वैश्विक कूटनीतिक साझेदारी है. लेकिन पाकिस्तान से भी हमारे गहरे संबंध हैं. हम इन दोनों ही देशों को एक-दूसरे से इनके रिश्तों के नज़रिए से नहीं देखते."
"दोनों देशों के साथ हमारी साझेदारी है. हम भारत और पाकिस्तान के बीच ज़ुबानी जंग नहीं देखना चाहते हैं. हम भारत और पाकिस्तान के बीच ज़रूरी बातचीत देखना चाहते हैं. हमें लगता है कि यह पाकिस्तानी और भारतीय लोगों की भलाई के लिए ज़रूरी है. बहुत काम है जो हम द्विपक्षीय रूप से मिलकर कर सकते हैं. "
उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे मतभेद हैं, जिन्हें निश्चित रूप से संबोधित करने की ज़रूरत है, अमेरिका दोनों के लिए एक भागीदार के रूप में मदद करने के लिए तैयार है."
बयान जिससे बिगड़ते जा रहे हैं भारत-पाकिस्तान के रिश्ते
दरअसल, बीते सप्ताह पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि "ओसामा बिन लादेन की तो मौत हो चुकी है लेकिन 'गुजरात के कसाई' आज वहाँ के प्रधानमंत्री बनकर बैठे हैं."
भारत ने बिलावत भुट्टो के इस बयान को असभ्य बताया है.
वहीं सोमवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि पाकिस्तान से इससे ज़्यादा उम्मीद भी नहीं की जा सकती है.
इंडिया टुडे के कार्यक्रम में जयशंकर से सवाल पूछा गया कि पड़ोसी मुल्क के विदेश मंत्री की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर जो कहा गया है, उसे वह कैसे देखते हैं?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हमें जो कहना है वो हम पहले ही कह चुके हैं. हमारा बयान सबके सामने है. इसे ऐसे समझ लिजिए कि पाकिस्तान से हमारी उम्मीदें कभी बहुत ज़्यादा नहीं रही हैं."
दरअसल, इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा है कि 'जो मुल्क पड़ोसी देश की संसद पर हमला करता हो और लादेन की मेज़बानी करता हो, उसे यहाँ ज्ञान नहीं देना चाहिए.' जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद का 'एपिसेंटर' बताया था.
इसके बाद पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी ख़ान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि " किसी भी देश ने आंतकवाद का उतना बेहतर इस्तेमाल नहीं किया है जितना भारत ने किया."
रब्बानी के बयान पर पलटवार करते हुए जयशंकर ने कहा था, ''मुझे पता है कि हम बीते ढाई साल कोविड से जूझे हैं. इसकी वजह से हममें से ज़्यादातर लोग ब्रेन फ़ॉग से जूझ रहे हैं. लेकिन मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि दुनिया ये नहीं भूली है कि आतंकवाद कहाँ जन्म लेता है. इस क्षेत्र (दक्षिण एशिया) और इससे परे सामने आने वाली आंतकी गतिविधियों पर किसकी उंगलियों के निशान हैं. मैं ये कहूंगा कि उन्हें आदतन इस तरह की फंतासी भरी कहानियों में उलझने से पहले ख़ुद को इस बात का इल्म कराना चाहिए."
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