बिलावल भुट्टो के बयान पर क्या बोले पाकिस्तानी, दुनिया की मीडिया ने दी कितनी जगह

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को आतंकवाद का 'एपिसेंटर' बताया और उसके बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल ज़रदारी भुट्टो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादित बयान दिया.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सीधे-सीधे तो नहीं लिया लेकिन गुजरात में हुए दंगों का हवाला देकर उन पर टिप्पणी की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिलावल भुट्टो की टिप्पणी की भारत, पाकिस्तान और दुनिया के दूसरे देशों में खासी चर्चा है. भारत में उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. इसे लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए हैं.

पाकिस्तान में भी उनके बयान पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

पाकिस्तान में सोशल मीडिया में कुछ लोग बिलावल के 'बयान का समर्थन' कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो उनकी पार्टी और उनकी विदेश यात्रा पर हुए खर्च की आलोचना कर रहे हैं.

ट्विटर पर सहर शिनवारी ने लिखा, "मेरी बिलावल भुट्टो के बयानों से कई राजनीतिक मुद्दों पर भले ही असहमति हो लेकिन उनका मोदी पर बयान ठीक लगता है. पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिका ने प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का अपने यहां प्रवेश बंद रखा था. अमेरिका ने ये पाबंदी राजनयिक वजहों से हटाई."

तैयब बलोच ने लिखा, "बिलावल की डिप्लोमेसी आला राजयनिकों का दिल जीत रही है."

सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स की राय है कि बिलावल ने पाकिस्तान की तरफ से अच्छी दलील पेश की.

नेमत ख़ान ने लिखा, "इसमें कोई शक़ नहीं कि बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तान की ओर से जबर्दस्त दलील दी. शानदार."

शरजील इनाम मेमन ने लिखा, "नरेंद्र मोदी को इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कड़ा मैसेज दिया है."

अर्सलान ख़ान ने लिखा, "पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने शानदार काम किया है."

पाकिस्तान में बिलावल की आलोचना

लेकिन ऐसा नहीं है पाकिस्तान में हर कोई बिलावल भुट्टो का समर्थन ही कर रहा हो. उन्हें आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है.

कुछ लोग उनके विदेश दौरे पर हुए ख़र्च को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं.

फातिमा ने लिखा है, "विदेश मंत्री के तौर पर बिलावल के दौरे पर एक अरब 75 करोड़ डॉलर खर्च किए गए हैं. दूसरी ओर इस सरकार के एक मंत्री ने स्वीकार किया है कि उनके पास लोगों की सैलरी और पेंशन देने के लिए पैसे नहीं हैं."

फ्ऱिकोइकोनॉमिस्ट नाम के एक यूज़र ने अपने पोस्ट में साल 2015 में मोदी के अचानक लाहौर जाकर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ से मुलाक़ात करने की बात की ज़िक्र किया.

उन्होंने लिखा, "याद कीजिये 'गुजरात के बुचर' ने बिलावल की सहयोगी पार्टी के प्रमुख के शासन के दौरान उनके परिवार की शादी में शिरकत की थी. उनका शानदार स्वागत हुआ. नवाज़ शरीफ ने गुलाबी साफा बांध रखा था और उन्हें गिफ्ट भी मिला था. ''

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने क्या कहा?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी बिलावल और जयशंकर के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई तक़रार की चर्चा हो रही है.

क़तर के चैनल अल-ज़जीरा की न्यूज़ वेबसाइट में इस घटना का ज़िक्र किया गया है.

जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरते हुए उस पर तीखे हमले किए. बाद में जब बिलावल को इस पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया तो उन्होंने कहा, "भारत ये लगातार कहता रहा है कि मुस्लिम और चरमपंथी एक हैं."

'वॉशिंगटन पोस्ट' ने भी इस ख़बर को जगह दी है.

अख़बार ने भुट्टो को उस बयान को भी जगह दी है, जिसमें उन्होंने कहा है, "एक मुस्लिम, एक पाकिस्तानी और आतंकवाद का शिकार होने के नाते मेरा मानना है कि 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद बने इस्लामोफ़ोबिया के नैरेटिव से दूरी बनाने का समय आ गया है. क्योंकि हमने देखा है कि आतंकवाद का कोई धर्म, कोई देश और कोई सीमा नहीं होती."

उन्होंने कहा, "भारत से ज़्यादा पाकिस्तान के लोगों ने आतंकवाद के हाथों गंवाई है, लेकिन भारत आज भी कहता है कि मुस्लिम और आतंकवादी एक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के दंगों के दौरान मारे गए लोगों को बचाने के कुछ नहीं किया."

'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने भी भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई तकरार को जगह दी है.

अख़बार ने लिखा जब जयशंकर ने पाकिस्तान को 'आतंकवाद का एपिसेंटर' बताया तो बिलावल भुट्टो ने पलट कर नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की.

अख़बार ने कहा है, "परमाणु हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर रिश्ते तनावपूर्ण बन रहे हैं. भारत ने पाकिस्तान पर 2008 में मुंबई में हुए हमले के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया है."

बांग्लादेशी अख़बार 'डेली स्टार' ने नरेंद्र मोदी पर बिलावल भुट्टो की टिप्पणी को लेकर आए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची के बयान को जगह दी है.

बागची ने कहा था, "पाकिस्तान के विदेश मंत्री निश्चित तौर पर 1971 के दिनों को भूल गए होंगे. यह पाकिस्तानी शासकों की ओर से बंगालियों और हिंदुओं का जातीय सफ़ाया था. दुर्भाग्य से पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के साथ अपने बर्ताव को अब तक बदल नहीं पाया है. भारत पर उंगली उठाने की विश्वसनीयता उसने खो दी है."

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