जो बाइडन बोले, पुतिन से बात करने को तैयार, लेकिन रखी शर्त

बाइडन और मैक्रों

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करना चाहते हैं बशर्ते रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन में जारी युद्ध ख़त्म करने की इच्छा दिखाएं.

जो बाइडन ने ये बातें अपने समकक्ष फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में कही. इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं.

इस दौरान मैक्रों ने व्हाइट हाउस में बाइडन से मुलाक़ात की और दोनों नेताओं के बीच फ्रांस की उर्जा ज़रूरतों के बरे में बात हुई. मैक्रों ने बाइडन को बताया कि स्वच्छ उर्जा को लेकर अमेरिका जो सब्सिडी दे रहा है उसका असर यूरोप में नौकरियों पर पड़ेगा.

दोनों नेताओं के बीच यूरोप की परेशानियों का निपटारा करने के लिए एक ज्वायंट टास्क फोर्स बनाने पर भी सहमति हुई. इसके अलावा दोनों के बीच रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर चर्चा हुई.

साझा प्रेस कॉर्फ्रेंस में जो बाइडन ने कहा, "इस युद्ध को ख़त्म करने का एक रास्ता है. सबसे पहले पुतिन अपनी सेना को यूक्रेन से बाहर निकालें. लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि वो ये करने वाले हैं. ऐसा न कर पाने के लिए उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है लेकिन वो यूक्रेन में अविश्वसनीय तरीक़े से आम नागरिकों की मौत की वजह बन रहे हैं. वो अस्पतालों, स्कूलों, नर्सरी स्कूलों पर बम बरसा रहे हैं. वो जो कर रहे हैं वो घटिया है."

"लेकिन असल बात ये है कि मेरा राष्ट्रपति पुतिन से तुरंत संपर्क करने की कोई योजना नहीं है. अगर उनकी युद्ध ख़त्म करने में कोई रूचि है तो मैं उनसे बात करने के लिए तैयार हूं. अगर ऐसा होता है तो मेरे फ्रांसीसी और नेटो दोस्तों के परामर्श से मुझे पुतिन के साथ बैठने में खुशी होगी. इमैनुएल ने जो कहा वो बेहद अहम है. हमें यूक्रेन के लोगों का समर्थन करना चाहिए."

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इस दौरान इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और अमेरिका को यूक्रेन में युद्ध के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि रूस के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में यूक्रेन को शामिल करना ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, "हम यूक्रेन के लोगों से कभी मांग नहीं करेंगे कि वो ऐसा समझौता करें जो वो नहीं चाहते क्योंकि उससे स्थायी शांति नहीं आएगी. अगर हम लंबे समय तक शांति चाहते हैं तो हमें यूक्रेन के लोगों के फ़ैसले का सम्मान करना होगा कि वो कब और किन शर्तों पर अपनी ज़मीन और भविष्य को लेकर बातचीत करना चाहते हैं."

उन्होंने अमेरिका के लिए कहा, "हम लोगों का साझा इतिहास है और इस नाते हमारे कर्तव्य हैं. यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की आक्रामकता और हमारे देशों और समुदायों के सामने मौजूद संकटों और यूरोपीय धरती पर युद्ध की वापसी को देखते हुए हमें एक बार फिर से हाथ मिलाने की ज़रूरत है."

बाइडन और मैक्रों के संवाददाता सम्मेलन की जो ब्रीफ़िग व्हाइट हाउस ने जारी की है उसके अनुसार वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की और पुतिन के बीच आख़िरी मुलाक़ात दिसंबर 2019 को हुई थी. उस वक्त जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल थीं और मैक्रों मिस्क समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी कर रहे थे.

उनका कहना था कि "राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से ज़ेलेन्स्की बातचीत करने में इच्छुक थे, केवल पुतिन ही थे जो युद्ध छेड़ना चाहते थे. और इसी साल फरवरी में मैंने अपने रूस और यूक्रेन के दौरे के दौरान ये देखा. ऐसे में ये सही है कि ज़ेलेन्स्की बातचीत के लिए कुछ शर्तें लगा रहे हैं."

माइकोला दानिल्युक

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यूक्रेन का आरोप, रूस कर रहा है ख़ास मिसाइलों का इस्तेमाल

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यूक्रेनी सेना का आरोप है कि यूक्रेनी हवाई सुरक्षा को नुक़सान पहुंचाने के लिए रूस परमाणु हथियार ले जा सकने में सक्षम मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है जिसमें विस्फोटक नहीं लगे हैं. इससे यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ रहा है.

यूक्रेन ने उसके दो पश्चिमी इलाकों लवीव और ख्मेलनित्स्की में मिले सोवियत दौर के बने X-55 क्रूज़ मिसाइल (जिसे नैटो AS-15 के नाम से जानता है) के टुकड़े दिखाए हैं, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं.

गुरुवार को राजधानी कीएव में एक संवाददाता सम्मेलन में यूक्रेनी अधिकारी माइकोला दानिल्युक का कहना था कि रूस ये रॉकेट दाग़कर "यूक्रेन के एयर डिफेन्स सिस्टम को परेशान करना चाहता है."

उन्होंने कहा कि इन मिसाइलों के टुकड़ों की जांच में रोडियोधर्मी गुण नहीं पाए गए हैं.

यूक्रेनी सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि हाल के सप्ताहों में यूक्रेन पर हमलों में रूस ने मिसाइलों का अपना बड़ा भंडार युद्ध में इस्तेमाल कर डाला हो.

उनका कहना है कि इस कारण अब रूस इस तरह के बिना विस्फोटक वाले मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है.

इसी साल नवंबर में यूके ख़ुफ़िया एजेंसियों की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें भी इसी तर्ज़ पर बात की गई थी.

रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा था. लेकिन अब तक इस मामले में रूस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

यूक्रेन

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ज़ेलेंस्की के सहयोगी ने मानी 13000 सैनिकों की मौत की बात

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यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से अब तक क़रीब 13 हज़ार यूक्रेनी सैनिकों की मौत हो चुकी है. यूक्रेन के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है.

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के सलाहकार मिख़ाइलो पोदोल्याक का कहना है कि युद्ध में अब तक 10 हज़ार से 13 हज़ार सैनिकों की जान गई है.

ऐसा कम ही होता है जब यूक्रेन अपने मारे गए सैनिकों की जानकारी दे. पोदोल्याक के इस बयान की किसी अन्य सैन्य अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है.

उन्होंने कहा कि जून महीने में हर दिन 100 से 200 सैनिकों की मौत हो रही थी.

बीते महीने अमेरिका ने एक सर्वोच्च सैन्य अधिकारी, मार्क मिली ने कहा था कि युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन के क़रीब एक लाख और रूस के भी एक लाख सैनिक या तो घायल हुए हैं या मारे जा चुके हैं.

यूरोपीय कमीशन की प्रमुख उर्सूला फ़ॉन देर लेयन ने बुधवार को एक वीडियो संबोधन में दावा किया कि युद्ध में यूक्रेन के एक लाख सैनिक मारे जा चुके हैं. हालांकि, बाद में ईयू कमीशन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े ग़लती से बोले गए. असल में ये घायलों और मारे जाने वालों को मिलाकर इतने सैनिक प्रभावित हुए हैं.

यूक्रेनी टीवी चैनल 24 पर पोदोल्याक ने कहा कि यूक्रेन "मारे जाने वालों की संख्या के बारे में ख़ुलकर बात कर रहा है. हमने कई स्तर पर औपचारिक तरीक़े से जानकारी जुटाई है और इसके अनुसार 10 से 13,000 के बीच सैनिक मारे गए हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि युद्ध में मारे गए आम नागरिकों की संख्या भी 'बड़ी' हो सकती है. बीबीसी न्यूज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था जून महीने के मध्य तक क़रीब 3,600 आम नागरिकों की जान जा चुकी थी.

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