ईरान में विरोध प्रदर्शन का एक महीना, अब तक क्या हुआ

ईरान में पिछले एक महीनों से विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है लेकिन प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं.

हाल के कुछ दशकों में ईरान में ऐसे प्रदर्शन नहीं देखे गए थे. ईरान की सरकार के लिए ये प्रदर्शनकारी बड़ी चुनौती बन गए हैं.

आखिर ईरान में लोग सड़क पर उतरकर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? पुलिस की सख़्ती के बाद भी लोग पीछे हटने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं?

ईरान में इन प्रदर्शनों को समाज के हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है.

प्रदर्शन की वजह

ईरान में ये प्रदर्शन महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए हैं. 22 वर्षीय अमीनी को 13 सितंबर को मोरेलिटी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उन पर हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप था.

ईरान के कानून के मुताबिक महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलते वक्त सिर को हिजाब या स्कार्फ से ढकना जरूरी है. इस संबंध में कड़े नियम हैं. ऐसी रिपोर्ट सामने आईं हैं कि पुलिस अफसरों ने अमीनी को गिरफ्तार करने के बाद उनके सिर पर डंडे से चोट की थी.

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अमीनी की 'मौत हार्ट अटैक से हुई.' अपने दावे के समर्थन में उन्होंने अमीनी का फुटेज जारी किया, जिसमें अमीनी को बेहोश होकर गिरते दिखाया गया है लेकिन अमीनी की तस्वीरों ने ईरान के लोगों को गुस्से से भर दिया.

ईरान के आम लोग इससे खासे ख़फा हैं. अमीनी के अंतिम संस्कार के बाद पहला प्रदर्शन ईरान के पश्चिमी शहर सक्कज़ में हुआ. यहां महिलाओं ने अमीनी की मौत का विरोध करते हुए अपने सिर पर बंधे स्कार्फ फाड़ डाले.

इसके बाद ईरान में लोगों का विरोध बढ़ता ही जा रही है. अब लोग ज्यादा आज़ादी की मांग से लेकर सरकार को उखाड़ फेंकने के नारे लगा रहे हैं. विरोध इतना बढ़ गया है कि लोग ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए मुखर होते दिख रहे हैं.

विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं की भूमिका ?

वीडियो में दिख रहा है कि महिलाएं विरोध में अपने सिर के स्कार्फ आग में झोंक रही हैं. वे सार्वजनिक तौर अपने बाल काट रही हैं और नारे लगा रही हैं, 'महिला, जिंदगी आज़ादी.' वो 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगा रही हैं. महिलाओं का इशारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की ओर है.

कुछ महिलाएं पहले भी खुलेआम हिजाब के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर चुकी हैं लेकिन ये इक्का-दुक्का मामले थे और इनसे सख्ती से निपटा गया था. लेकिन अभी हिजाब के ख़िलाफ़ जिस बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं वैसा पहले नहीं देखा गया था.

प्रदर्शन कर रही महिलाओं को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है. उनके समर्थन में स्कूली छात्राएं खेल के मैदानों और गलियों में प्रदर्शन कर रही हैं. पुरुष और किशोर भी बड़ी संख्या में महिलाओं की मांग के समर्थन में उतर आए हैं.

अधिकारियों का रुख क्या है?

प्रशासन चाह रहा है कि विरोध प्रदर्शन को ज्यादा अहमियत नहीं दी जाए. वे पूरी ताकत से इसे कुचलने में लगे हैं. अयातुल्लाह ख़ामनेई ने कहा है, 'ईरान के पुराने दुश्मन अमेरिका और इसराइल दंगे करा रहे हैं.'

आलोचकों का कहना है, 'ये प्रदर्शन खुद नहीं हो रहे हैं कराए जा रहे हैं.'

विरोध प्रदर्शनों में अब तक कितनी मौतें?

बीबीसी और दूसरे स्वतंत्र मीडिया को ईरान से रिपोर्टिंग करने से रोक दिया गया है. इसलिए ईरान के सरकारी मीडिया की ओर से किए जा रहे दावों की पुष्टि मुश्किल है. सोशल मीडिया, आंदोलनकारी और मानवाधिकार समूह वहां की तस्वीरें मुहैया करा रहे हैं. प्रशासन इंटरनेट और फोन सेवा पर रोक लगाता रहा है.

नॉर्वे से काम कर रहे संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स ने कहा है कि सुरक्षा बलों की ओर से प्रदर्शनों को कुचलने के दौरान कम से कम 201 लोगों की मौत हो गई है.

इनमें 23 बच्चे हैं लेकिन सुरक्षाबलों ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान किसी की मौत नहीं हुई है. हालांकि प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के वीडियो आ रहे हैं.

पहले और अब के प्रदर्शनों में क्या अंतर है?

ईरान में साल 2009 में भी प्रदर्शन हुए थे. उस दौरान भी लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे. लेकिन ये प्रदर्शन विवादित राष्ट्रपति चुनाव को लेकर थे.

हालांकि तब प्रदर्शन और अशांति बड़े शहरों तक सीमित थी. आंदोलन का नेतृत्व भी मध्य वर्ग कर रहा था.

साल 2017 और 2019 में आर्थिक कठिनाइयों से परेशान लोगों ने देश भर में प्रदर्शन किए थे. लेकिन ये प्रदर्शन ज्यादातर उन इलाकों मे हुए थे जहां कामगार लोग रहते थे.

लेकिन अब पहली बार ऐसे प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें समाज के सभी वर्ग और सभी उम्र के लोग हिस्सा ले रहे हैं. ये प्रदर्शन ईरान के दर्जनों शहरों और नगरों में फैल गए हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)