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ईरान: तेहरान की यूनिवर्सिटी में छात्रों पर पुलिस की 'बर्बरता'
ईरान में 22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद बरपा हंगामा बढ़ता ही जा रहा है.
ईरान के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक तेहरान स्थित शरीफ़ यूनिवर्सिटी में रविवार की रात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की.
सोशल मीडिया पर जो वीडियो सामने आए हैं उनमें छात्र भागते हुए नज़र आ रहे हैं और गोलियों की आवाज़ सुनाई दे रही है.
ईरान में क्या कुछ हो रहा है जानिए 10 प्वाइंट में
- सितंबर से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अपने चरम पर हैं. ये प्रदर्शन एक नौजवान लड़की महसा अमीनी की मोरैलिटी पुलिस द्वारा की गई गिरफ़्तारी के बाद हुई मौत को लेकर शुरु हुआ है.
- 22 साल की अमीनी मोरैलिटी पुलिस की गिरफ़्तारी के कुछ घंटे बाद ही कोमा में चली गई. उन्हें हिजाब ठीक से ना पहनने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. कथित रूप से हिरासत में पुलिस ने अमीनी को बैटन (लाठी) से मारा, उनका सिर पुलिस की गाड़ी पर पटका गया. हालांकि पुलिस का कहना है कि अमीनी के साथ की गई मारपीट के दावे का कोई भी सबूत नहीं है. पुलिस कह रही है कि उनकी मौत 'अचानक हुए हार्ट अटैक' के कारण हुई.
- अमीनी के अंतिम संस्कार से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन ईरान भर में फैल गया और अब ये विरोध प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है और सालों से देश में हुआ ये सबसे बड़ा प्रदर्शन है.
- शरीफ़ यूनिवर्सिटी के इस्लामिक एसोसिएशन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर, रविवार की रात जो कुछ भी सुरक्षा बलों ने किया उसका विस्तृत विवरण साझा किया है, रविवार को सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी में डर और दमन का माहौल साफ़ नज़र आ रहा है.
- रविवार को शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में फर्स्ट ईयर वाले छात्रों का पहला दिन था. अर्ध-सरकारी मेहर समाचार एजेंसी के मुताबिक रविवार की दोपहर करीब 200 छात्र इकट्ठा हुए. छात्रों ने 'महिला, जिंदगी, आजादी' और छात्र अपमान के लिए मौत की सजा की मांग करते हैं जैसे नारे लगाए गए. धीरे धीरे सरकार के विरोध में नारे और ज्यादा कट्टरपंथी होते गए. देर शाम जब सुरक्षा बल जब कैंपस में पहुंचे तो टकराव शुरू हो गया. एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रवेश द्वार पर पहुंचने पर विरोध करने वाले छात्रों को गिरफ्तार करने के लिए सादे कपड़ों में पुलिस वैन के साथ पहले से ही खड़ी थी. सुरक्षाबलों ने तुरंत तीन छात्रों को गिरफ़्तार किया और चौथे छात्र जो कि चोटिल था उसे अस्पताल भेज दिया गया.
- छात्रों का विरोध जारी रहा और सुरक्षाबलों ने उन पर पेंटबॉल और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. ये देखकर छात्रों ने विभाग का दरवाज़ा बंद कर लिया लेकिन वे तब हैरान रह गए जब उन्होंने खुद को इमारत के भीतर सुरक्षा बलों से घिरा हुआ पाया. वर्दी में सुरक्षाबल पहले से विभाग के अंदर मौजूद थे.
- ईरानी न्यूज़ चैनल ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सुरक्षा बलों ने छात्रावास पर हमला किया और वहां गोलियां चलाईं. अन्य रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के इस्तेमाल का भी ज़िक्र है.
- सुरक्षाबलों की बढ़ती बर्बरता और प्रदर्शन के दौरान मरने वालों की बढ़ती संख्या के बावजूद ईरान में बीती दो दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन और तीव्र हुए हैं.
- नॉर्वे से चलने वाली एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट की रिपोर्ट के अनुसार देश में अब तक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहे 133 लोगों की मौत हुई है.
- ईरान की रईसी सरकार ने कहा है कि 'अव्यवस्था' कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रशासन ने कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, प्रशासन प्रदर्शनकारियों को 'बाहरी दुश्मन' की संज्ञा दे रहा है.
अमीनी को क्यों गिरफ़्तार किया गया था?
अमीनी को 13 सितंबर को मोरैलिटी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने सिर को ढकने के एक सख़्त ड्रेस कोड का पालन नहीं किया था.
चश्मदीदों के अनुसार, पुलिस वैन में उन्हें बुरी तरह पीटा गया था जिसके बाद वो कोमा में चली गई थीं.
ईरान की पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है और उसका कहना है कि अमीनी को 'अचानक हार्ट अटैक हुआ था.'
ईरान के कट्टरपंथी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने गृह मंत्रालय से कहा है कि वो मौत के मामले में जांच करे. उत्तरी तेहरान के कासरा अस्पताल ने एक बयान में कहा कि 13 सितंबर को अमीनी को अस्पताल लाया गया था और उनके शरीर में कोई भी हरकत नहीं थी.
1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद यह क़ानून बना दिया गया था कि महिलाओं को इस्लामी तरीक़े से कपड़े पहनने होंगे. इसके बाद यह ज़रूरी हो गया कि महिलाएं चादर ओढ़ें जो उनके शरीर को ढके रहे, साथ ही हेड स्कार्फ़ या हिजाब या बुर्क़ा पहने.
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हालिया सालों में ईरान में हिजाब की अनिवार्यता को लेकर कई अभियान चलाए गए हैं लेकिन ईरान की धार्मिक मामलों की पुलिस ने ड्रेस कोड का पालन न करने के आरोपों में कई बार कड़ी कार्रवाई की है जिसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
लेकिन इस बार होने वाले विरोध प्रदर्शन बीते कई प्रदर्शनों से काफ़ी मज़बूत हैं.
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