महारानी एलिज़ाबेथ II को ब्रिटेन ने दी अंतिम विदाई
ब्रिटेन ने राजकीय सम्मान के साथ सोमवार को महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय को अंतिम विदाई दे दी. क्वीन एलिज़ाबेथ का 96 वर्ष की आयु में 8 सितंबर को देहांत हो गया था.
इस मौके पर दुनिया के तमाम नेता और विदेशी राज-परिवारों की हस्तियां वेस्टमिंस्टर ऐबे में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के साथ मौजूद रहीं.
महारानी की अंतिम यात्रा के साक्षी बनने के लिए ब्रिटेन के लाखों लोग सड़क किनारे खड़े नज़र आए. इनमें हर उम्र और वर्ग के लोग शामिल थे.

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मार्मिक औपचारिकताओं और असीम दुख से भरे इस दिन की शुरुआत आम लोगों की ओर महारानी को श्रद्धांजलि देने से हुई.
इसके बाद 142 नौसेनिकों द्वारा खींचे जाने वाले रॉयल नेवी के स्टेट गन कैरिज़ से उनके ताबूत को वेस्टमिंस्टर ऐबे लाया गया.

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ताबूत के पीछे किंग चार्ल्स तृतीय अपनी बहन प्रिंसेज़ ऐन, प्रिंस एंड्र्यू और प्रिंस एडवर्ड के साथ चलते हुए नज़र आए.

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किंग चार्ल्स तृतीय के ठीक पीछे प्रिंस विलियम अपनी पत्नी कैथरीन के साथ चलते हुए दिखाई दिए. उनके साथ-साथ ब्रितानी सेना का प्रतिनिधित्व करने वाली हस्तियां चल रही थीं.

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ऐबे में प्रार्थना जब समापन की ओर बढ़ रही थी, तो वहाँ लास्ट पोप की धुन बजाई गई. इसे उन्हीं संगीतकारों ने बजाया जिन्होंने पिछले वर्ष विंडसर में महारानी के पति ड्यूक ऑफ़ एडिनबरा के अंतिम संस्कार के दौरान बजाया था.

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इसके बाद पूरे देश में दो मिनट का मौन रखा गया.
फिर ख़ामोश खड़े किंग चार्ल्स के सामने क्वीन के बैगपाइपर वादकों ने एक पारंपरिक उदास धुन बजाई और फिर ब्रिटेन का राष्ट्रगान गाया गया.

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चार्ल्स ने हाथ से एक संदेश भी लिखा जिसे महारानी के ताबूत पर रखे फूलों के हार के साथ रखा गया. ये फूल चार्ल्स के आग्रह पर बकिंघम पैलेस. हाइग्रोव हाउस और क्लेरेंस हाउस के बाग़ों से मँगवाए गए थे. संदेश में लिखा था - "इन लविंग एंड डिवोटेड मेमोरी. चार्ल्स आर."

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महारानी के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम को पूरे देश और दुनिया भर में लाखों लोगों ने टीवी पर देखा.
ब्रिटेन के कई शहरों में जगह-जगह बड़े-बड़े स्क्रीन लगाए गए थे, वहीं कुछ सिनेमाघरों, पबों और दूसरी जगहों पर समारोह का लाइव प्रसारण किया गया.
लंदन में जगह-जगह रास्तों पर और पार्कों में लोग अंतिम संस्कार की रस्मों को देख और सुन रहे थे, कइयों की आँखों में आँसू भरे थे.
ब्रिटेन में 1965 में सर विंस्टन चर्चिल के निधन के बाद हुई ये पहली राजकीय अंत्येष्टि थी. साथ ही, ये द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में हुआ सबसे बड़ा आयोजन था.

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अंतिम संस्कार के बाद, क्वीन के ताबूत को लंदन के वेलिंगटन आर्च ले जाया गया.
ऐबे से वेलिंगटन आर्च की यात्रा के दौरान क्वीन का ताबूत हॉर्स गार्ड्स पैरेड, और फिर बकिंघम पैलेस के बाहर राजपथ से गुज़रा.

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महारानी का ताबूत जब राजनिवास बकिंघम पैलेस के सामने से अंतिम बार गुज़रा, तो पैलेस के कर्मचारियों ने बाहर आकर उन्हें अंतिम बार अलविदा कहा.
वेलिंगटन आर्च के बाद महारानी के ताबूत को अंतिम यात्रा पर 28 मील दूर विंडसर कासल ले जाया गया. इस दौरान शवयात्रा को हाईवे से ना निकाल ऐसे रास्तों से ले जाया गया जहाँ से लोग उनके दर्शन कर सकें.

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इस पूरे रास्ते पर हज़ारों लोगों ने लाइनों में खड़े होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
राजपरिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर डाले गए एक बयान के अनुसार क्वीन को सोमवार रात सेंट जॉर्ज चैपल के भीतर किंग जॉर्ज षष्ठम मेमोरियल चैपल में एक निजी पारिवारिक समारोह में उनके पति ड्यूक ऑफ़ एडिनबरा प्रिंस फ़िलिप की कब्र के बगल में दफ़नाया गया.
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