पुतिन की दोस्ती क्या शी जिनपिंग के लिए ‘महंगी’ साबित हो रही है?

    • Author, टीम बीबीसी हिन्दी
    • पदनाम, नई दिल्ली

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गुरुवार को उज़्बेकिस्तान के समरकंद में हुई बैठक ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है.

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहला मौका था जब दोनों नेता एक-दूसरे से रूबरू हुए.

लेकिन ये बैठक जिस अंदाज़ में हुई और इस दौरान जो कुछ बातें हुई हैं, उससे दोनों मुल्कों के आपसी रिश्तों में एक तरह की असहजता के संकेत मिल रहे हैं.

यूक्रेन युद्ध से ठीक पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शीतकालीन ओलंपिक में भाग लेने के लिए चीन पहुंचे थे जहां दोनों देशों ने उनकी दोस्ती में कोई सीमाएं नहीं होने का एलान किया था.

उस वक़्त दुनिया भर में इसे बेहद गंभीरता से लिया गया था. इस बयान के कुछ दिन बाद ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हो गया जिसने रूस के लिए गंभीर आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां पैदा कीं.

लेकिन क्या यूक्रेन युद्ध ने दोनों देशों के बीच 'गहरे रिश्तों' पर कोई असर डाला है?

रूस और चीन की दोस्ती की सीमाएं

कोरोना महामारी शुरू होने के लगभग ढाई साल बाद पहली बार चीन से बाहर निकले राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की.

दोनों नेताओं की मुलाक़ात एक विशाल कमरे में एक बड़ी मेज़ पर हुई जिसके एक तरफ़ पुतिन थे तो दूसरी तरफ़ शी जिनपिंग.

अपनी सख़्त कोविड नीतियों के लिए घर में आलोचनाएं झेल रहे शी जिनपिंग ने इस मीटिंग के दौरान मास्क नहीं पहना.

हालांकि, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और क़ज़ाख़स्तान के नेताओं से मिलते हुए मास्क पहना. यही नहीं, उन्होंने मास्क नहीं पहनने वाले नेताओं के साथ डिनर से भी ख़ुद को दूर रखा.

ब्लूमबर्ग में छपे ओपिनियन लेख में अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार क्लारा फे़रेरा मर्कीस लिखती हैं, "इस साल की शुरुआत में रूस और चीन के नेताओं ने एलान किया था कि उनकी दोस्ती में कोई सीमाएं नहीं हैं. लेकिन छह महीने से कुछ ज़्यादा वक़्त गुज़रने, एक मुश्किल युद्ध और पश्चिमी देशों के भारी प्रतिबंधों के बाद ऐसा लगता है कि इस दोस्ती में कुछ सीमाएं थीं. मध्य एशिया में गुरुवार को जब पुतिन और जिनपिंग की मुलाक़ात हई तो ये बयान दोबारा सामने नहीं आया.

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से चीन एक असहज स्थिति में है क्योंकि उसे एक ऐसे समय में रूस के साथ अपने वैचारिक जुड़ाव को संतुलित करना पड़ रहा है जब पुतिन की आक्रामकता चीनी कूटनीति के प्रमुख सिद्धांत क्षेत्रीय अखंडता एवं हस्तक्षेप न करने की नीति का उल्लंघन करती हो."

इस मुलाक़ात में शी जिनपिंग की ओर से यूक्रेन युद्ध का ज़िक्र नहीं किया जाना भी काफ़ी अहम माना जा रहा है. लेकिन इसके साथ ही पुतिन को वो सब नहीं मिला जिसकी रूस को ज़रूरत है.

उदाहरण के लिए, बीते कई महीनों से कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और यूक्रेन में बदलती स्थितियों का सामना कर रहे पुतिन चीन की ओर से निर्यात बढ़ाकर आर्थिक मदद चाह रहे थे.

क्लारा फे़रेरा मर्कीस लिखती हैं, "शी जिनपिंग ने यूक्रेन का ज़िक्र नहीं किया और कहा कि वह 'अराजकता से जूझ रही दुनिया में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए' रूस के साथ काम करेंगे. उन्होंने ज़्यादा व्यवहारिक सहयोग करने का वादा भी किया, लेकिन अपने 'पुराने दोस्त' को जो इस समय निर्यात राजस्व, तकनीक के आयात और सैन्य समर्थन की बाट जोह रहा है, ऐसा कुछ नहीं दिया जिसे वो अपने साथ घर ले जा सके."

शी जिनपिंग की चुनौतियां

चीन और उसके सर्वोच्च नेता भी ऐसे संकेत देते दिख रहे हैं कि वह यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन के साथ बहुत ज़्यादा क़रीब खड़े हुए नहीं दिखना चाहते हैं.

मर्कीस इन रिश्तों में आती चुनौतियों को बयां करते हुए लिखती हैं, ''यूक्रेन के युद्ध में पुतिन का हारते हुए दिखना भी शी जिनपिंग के लिए एक चुनौती है. वह नहीं चाहते कि पुतिन इस युद्ध में हारें क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में अब सिर्फ़ कुछ हफ़्ते शेष हैं. इसमें शी जिनपिंग को तीसरी बार चीन की सर्वोच्च कुर्सी मिलने वाली है. ऐसे समय में वह खुद को असफलता के क़रीब नहीं पाना चाहेंगे क्योंकि जिनपिंग पहले ही चीन में कई आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.'

बता दें कि शी जिनपिंग चीन में पहले से आर्थिक मोर्चे से लेकर ज़ीरो कोविड पॉलिसी पर आलोचनाओं का सामना करते दिख रहे हैं. सख़्त कोविड लॉकडाउन की वजह से उद्योग-धंधों और उपभोक्ताओं पर गंभीर असर पड़ा है.

चीन का संपत्ति बाज़ार इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे कई आवासीय परियोजनाओं में काम रुक गया है और लोग अधूरे बने हुए घरों में रहने को मजबूर हो रहे हैं.

इसके साथ ही लोगों ने अपनी ईएमआई को देना बंद कर दिया है. इसके बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने बीते सोमवार होम लोन में ब्याज दरों में ऐतिहासिक कमी की है.

चीन के केंद्रीय बैंक ने एक साल वाले क़र्ज़ के लिए ब्याज दर को 3.7 फीसद से घटाकर 3.65 फ़ीसद कर दिया है.

रूस से गहरी दोस्ती से बचता चीन?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपने लेख में दर्ज किया है कि 'चीन यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़े असर को लेकर भी चिंतित है और उसने बेहद सावधानी के साथ ख़ुद को सीधे तौर पर रूस की मदद करने से बचाया है ताकि अपनी अर्थव्यवस्था को पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के असर से बचा सके.'

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने भी इस मुलाकात पर छापे एक लेख में संकेत दिए हैं कि चीन रूस के साथ दोस्ती बनाए रखते हुए भी ज़्यादा क़रीब खड़ा हुआ नहीं दिखना चाहता है.

चीन की समाजशास्त्र अकादमी से जुड़े रूस, पूर्वी यूरोप और सेंट्रल एशियाई मामलों के जानकार येन जिन ने इस लेख में बताया है कि चीन और रूस के आपसी रिश्ते इस समय ऐतिहासिक रूप से सबसे अच्छे हैं.

लेकिन इसी लेख में ये भी लिखा गया है कि 'पश्चिमी दुनिया में चीन के रूस से इतर भी काफ़ी मित्र हैं और चीन को पश्चिमी दुनिया को चीन एवं रूस को एक राजनीतिक एवं सैन्य ब्लॉक के रूप में दुष्प्रचारित करने से रोकना होगा.'

समरकंद में शी जिनपिंग के साथ मुलाकात में व्लादिमीर पुतिन ने दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी की तारीफ़ की है.

लेकिन इस मुलाकात में उन्होंने यूक्रेन युद्ध पर चीनी चिंताओं का जवाब दिया.

उन्होंने कहा कि ''हम इस मुद्दे पर आपकी चिंताओं और सवालों को समझते हैं. आज की बैठक में हम अपनी स्थिति बयां करेंगे. लेकिन हम पहले भी इस बारे में बात कर चुके हैं."

बीबीसी रूसी सेवा के संपादक स्टीव रोज़ेनबर्ग ने अपने लेख में बताया है कि ''पुतिन ने इस बैठक में स्वीकार किया कि चीन ने यूक्रेन की स्थितियों पर 'सवाल और चिंताएं' जताई हैं. क्रेमलिन (रूसी सरकार) की ओर से ये एक अनपेक्षित स्वीकारोक्ति थी कि रूस का तथाकथित विशेष सैन्य अभियान चीन के लिए चिंता की वजह बन रहा है.''

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