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सलमान रुश्दी को लेकर इमरान ख़ान ने अब दिया नया बयान - पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के चेयरमैन इमरान ख़ान ने कहा है कि लेखक सलमान रुश्दी के बारे में दिए गए उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है.
इमरान ख़ान ने ब्रिटेन के एक अख़बार 'द गार्डियन' को इंटरव्यू दिया था जिसमें लेखक सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बारे में बातचीत हुई थी.
अख़बार का दावा है कि इमरान ख़ान ने रुश्दी पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा था, ''मुझे लगता है कि ये भयानक है. रुश्दी एक मुसलमान परिवार से हैं. वो हमारे दिलों में बसने वाले पैग़ंबर (इस्लाम के आख़िरी पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद) के लिए प्यार, सम्मान और आस्था को जानते हैं. इसलिए ग़ुस्से को समझा जा सकता है, लेकिन जो हुआ आप उसे सही नहीं ठहरा सकते.''
द 'सैटेनिक वर्सेज़' समेत कई किताबों के लेखक सलमान रुश्दी पर अमेरिका में 12 अगस्त को एक कार्यक्रम के दौरान चाक़ू से हमला किया गया था.
सलमान रुश्दी की 1988 में प्रकाशित हुई किताब 'द सैटेनिक वर्सेज़' पर ईशनिंदा का आरोप है. ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह ख़ोमैनी ने सलमान रुश्दी को क़त्ल करने का फ़तवा जारी किया था.
लेकिन अब इमरान ख़ान का कहना है कि लंदन के अख़बार ने उनकी बातचीत को सही संदर्भ के बिना पेश किया है.
डॉन अख़बार के अनुसार, पहले उनकी पार्टी पीटीआई की तरफ़ से एक बयान आया फिर इमरान ख़ान ने पत्रकारों से ख़ुद बातचीत की.
पत्रकारों से बात करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि सलमान रुश्दी के मामले में उनका नज़रिया बिल्कुल स्पष्ट है.
इमरान ख़ान ने कहा कि वो सिर्फ़ ईशनिंदा के मामले में सज़ा देने के इस्लामी तरीक़े के ख़िलाफ़ हैं और ब्रितानी अख़बार को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने यही बात कही थी.
इमरान ख़ान ने रुश्दी के बारे में अपनी राय देते हुए कहा, "सलमान रुश्दी बहुत बड़े फ़ितना हैं. मैंने भारत में एक सेमिनार में शामिल होने से इनकार कर दिया था क्योंकि उस सेमिनार में सलमान रुश्दी को भी दावत दी गई थी."
हालांकि गार्डियन अख़बार का दावा है कि उन्होंने इमरान ख़ान के इंटरव्यू को ग़लत संदर्भ में नहीं छापा है.
गार्डियन में लेख लिखने वाले दो रिपोर्टरों में से एक जुलियन बोर्जर ने ट्वीट कर कहा है कि उन्होंने वही लिखा है जो इमरान ख़ान ने इंटरव्यू में कहा था.
उन्होंने कहा, ''हमने कोई ग़लत संदर्भ नहीं दिया है. हम अपनी रिपोर्टिंग पर क़ायम हैं. इमरान ख़ान ख़ुद यह नहीं कह रहे हैं कि हमने ग़लत संदर्भ पेश किया है. वो सिर्फ़ यह कह रहे हैं कि हमने उनके बयान को बिना संदर्भ के पेश किया है. लेकिन हमने तो पूरे संदर्भ को पेश किया है जैसा कि आप हमारे लेख में पढ़ सकते हैं.''
इमरान के मंत्री के साथ पुलिस हिरासत में यौन हिंसा का आरोप
इमरान ख़ान ने कहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता शहबाज़ गिल के साथ पुलिस हिरासत में ना केवल शारीरिक हिंसा की गई बल्कि उनके साथ यौन हिंसा भी की गई है.
लेकिन शहबाज़ शरीफ़ सरकार ने इमरान ख़ान के इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.
अख़बार जंग के अनुसार इमरान ख़ान ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति शहबाज़ गिल है जिनके साथ यौन हिंसा की गई है.
लेकिन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मरियम औरंगज़ेब ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा कि उन्हें इलज़ाम लगाते हुए 22 साल हो गए हैं और वो हर बार नई योजना के साथ झूठ बोलते हैं.
पुलिस ने नौ अगस्त को शहबाज़ गिल को गिरफ़्तार किया था. उसके बाद से उन्हें तीन बार अदालत में पेश किया जा चुका है और अब तक चार बार उनका मेडिकल टेस्ट हो चुका है. सरकार का दावा है कि शहबाज़ गिल ने ना तो अदालत में एक बार भी कहा है कि उनके साथ पुलिस ने ज़्यादती की है और ना ही अब तक किसी मेडिकल जांच में उनके साथ हिंसा करने की बात सामने आई है.
इमरान ख़ान के वीडियो के बाद मरियम औरंगज़ेब ने भी एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि शहबाज़ गिल बिल्कुल ठीक हैं और वो किताब पढ़ते हुए देखे जा सकते हैं. उनके अनुसार वो आसानी से टहल रहे हैं और पुलिस वालों से बातचीत कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान ग़लत प्रोपगैंडा कर रहे हैं क्योंकि वो असल मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि ग़लत वीडियो जारी करना साइबर क्राइम है और गृह मंत्रालय इसकी जांच कर रहा है.
मरियम के वीडियो दिखाने के बाद इमरान ख़ान के सहयोगी फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि अगर शहबाज़ गिल पूरी तरह ठीक हैं तो फिर इमरान ख़ान को उनसे मिलने की इजाज़त सरकार क्यों नहीं दे रही है.
इसके जवाब में मरियम औरंगज़ेब कहती हैं कि जब मुस्लिम लीग के नेता भी जेल में बंद थे तो उनके पार्टी या परिवार के लोग अदालत से आदेश लेकर मिलने जाते थे. उनके अनुसार अगर इमरान ख़ान भी शहबाज़ गिल से मिलना चाहते हैं तो वो भी अदालत से आदेश लेकर आएं और शहबाज़ गिल से मिल लें.
इमरान ख़ान की स्पीच लाइव दिखाने पर पाबंदी
पाकिस्तान में न्यूज़ प्रसारण को नियंत्रित करने वाली नियामिक बॉडी पेमरा (PEMRA) ने पाकिस्तान के सभी चैनलों पर इमरान ख़ान की स्पीच को लाइव दिखाने पर पाबंदी लगा दी है.
पेमरा ने शनिवार देर शाम यह फ़ैसला किया.
पेमरा ने कहा है कि इमरान ख़ान अपने भड़काऊ भाषणों से शांति को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं.
इमरान ख़ान ने शनिवार की शाम राजधानी इस्लामाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लामाबाद के पुलिस अफ़सर और मजिस्ट्रेट को धमकी दी थी कि वो उनके ख़िलाफ़ केस करेंगे क्योंकि उनके मुताबिक़ यह अधिकारी उनके सहयोगी शहबाज़ गिल पर पुलिस हिरासत में ज़्यादती कर रहे हैं.
पेमरा ने कहा है कि इमरान ख़ान अपने भाषणों में सरकारी इदारों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर नफ़रत फैला रहे हैं.
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