पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने भारत की कंपनी से रिश्वत ली थी, इमरान ख़ान की पार्टी ने किया दावा

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- Author, शुमाइला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद से
पाकिस्तान में इमरान ख़ान की पार्टी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी पर एक भारतीय कंपनी से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है.
शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी इस समय पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट हैं और रिश्वत का ये आरोप साल 2016-17 के दौरान उस समय का है, जब वे केंद्रीय मंत्री थे.
इमरान ख़ान के प्रवक्ता शहबाज़ गिल ने लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ दस्तावेज़ हाथ में लहराते हुए दावा किया कि ये दुबई की एक भारतीय पेट्रोलियम कंपनी 'ट्रिनिटी' से शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी को मिली रकम की रसीद है.
शहबाज़ गिल ने कहा, "ये कंपनी लुब्रिकेंट बनाती है. सवाल ये उठता है कि पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री इस कंपनी को किस तरह की कंसल्टेंसी मुहैया करा रहे थे. साफ़ है कि वो रिश्वत थी."
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के प्रवक्ता शहबाज़ गिल ने ये दावा भी किया कि 'ट्रिनिटी' कंपनी के मालिक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नज़दीकी हैं और कई बार उनके साथ फ़ोटो भी खिंचवा चुके हैं.
उन्होंने ये दावा भी किया कि शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी को ये रकम ऑनलाइन ट्रांसफर के ज़रिए साल 2016-17 के दौरान तीन किस्तों में दी गई थी.
शहबाज़ गिल के आरोपों को खारिज़ करते हुए शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने कहा कि "पीटीआई के पास अगर सबूत हैं तो मुझ पर कीचड़ उछालने के बजाय उन्हें मेरे ख़िलाफ़ याचिका दाखिल करनी चाहिए."

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शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी का जवाब
एक बयान में शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने कहा, "सच तो ये है कि पीटीआई और 'चरित्र हनन के खेल में उनके माहिर लोग' चार साल तक सत्ता में रहे लेकिन उन्हें मेरे ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला."
पीटीआई के प्रवक्ता का ये दावा 'द फाइनैंशियल टाइम्स' में उस रिपोर्ट के छपने के बाद आया है जिसमें इमरान ख़ान पर विदेशी कंपनियों और नागरिकों से प्रतिबंध के बावजूद चंदा लेने का आरोप लगाया गया था.
'द फाइनैंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तानी कारोबारी आरिफ़ नक़वी ने एक चैरिटी क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया जिसका पैसा इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई को चंदे के रूप में दिया गया था. आरिफ़ नक़वी ने ये रकम अपनी दुबई की कंपनी अबराज ग्रुप और अबू धाबी के शाही खानदान के एक सदस्य के मार्फत की.
पाकिस्तान के क़ानून के अनुसार, राजनीतिक दलों पर विदेशी नागरिकों, कंपनियों और सरकारों से चंदा लेने पर रोक है.

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पाकिस्तान का चुनाव आयोग
बीते सप्ताहांत पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने देश के निर्वाचन आयोग से ये मांग की थी कि इमरान ख़ान की पार्टी की फंडिंग को लेकर पिछले सात साल से चली आ रही जांच पर फ़ैसले को जल्द सार्वजनिक किया जाए.
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पीएमएल (एन) की इस मांग को दोहराते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ट्विटर पर लिखा, "मैं इमरान ख़ान से अपील करता हूं कि वो ऐसे आरोप लगाने वाले आर्टिकल पब्लिश करने के लिए फाइनैंशियल टाइम्स के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दायर करें. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं और मुझे यकीन है कि वे ऐसा नहीं करेंगे, तो ये एक बार फिर साबित हो जाएगा कि वे किस तरह से निर्लज्जता के साथ झूठ बोल रहे हैं और पाकिस्तान की आवाम को धोखा दे रहे हैं."
हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने मंगलवार को पीटीआई की फंडिंग केस में अपने फ़ैसले का एलान कर दिया.
तीन सदस्यों वाले इलेक्शन कमीशन ऑफ़ पाकिस्तान ने सर्वसम्मति से ये फ़ैसला दिया है कि पीटीआई ने 34 विदेशी नागरिकों और 351 विदेशी कंपनियों से चंदा लिया है. इनमें अमेरिकी कंपनियां भी शामिल हैं.

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फ़ैसले में ये भी कहा गया है कि इमरान ख़ान की पार्टी ने चुनाव आयोग से अपने 13 खातों की जानकारी छुपाई और ये पॉलिटिकल पार्टीज़ ऑर्डर और मुल्क के संविधान का उल्लंघन था.
इलेक्शन कमीशन ऑफ़ पाकिस्तान ने पीटीआई को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. चुनाव आयोग ने इस नोटिस में पीटीआई से पूछा है कि प्रतिबंधित स्रोतों से लिए गए उसके चंदे को क्यों न ज़ब्त कर लिया जाए.
चुनाव आयोग के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में पीटीआई के नेता फ़वाद चौधरी ने कहा है कि ये फ़ैसला उतना ही पक्षपातपूर्ण है जितना कि वो दे सकते थे.
उन्होंने कहा कि पीटीआई आम चुनावों में जाना चाहती है. हालांकि उन्होंने ये भी दोहराया कि पीटीआई गुरुवार को चुनाव आयोग के दफ़्तर के बाहर मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करेगी.
इमरान ख़ान पाकिस्तान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर भेदभाव करने का आरोप लगाते रहे हैं.
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