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रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन कितने कारगर, कितने घातक
रूस-यूक्रेन युद्ध में हज़ारों ड्रोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इनका इस्तेमाल दुश्मनों का ठिकाना ढूंढने, मिसाइल दागने और आर्टिलरी फायरिंग में हो रहा है. रूस और यूक्रेन दोनों ख़ास मकसद वाले ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं.
पहले से तैयार और बाज़ार में धड़ल्ले से बिकने वाले ड्रोन का खूब इस्तेमाल हो रहा है.
यूक्रेनी सेना सबसे ज़्यादा जिस ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है, वह तुर्की में बना बेरक्तार TB2 है. इसका आकार एक छोटे प्लेन के बराबर होता है. ये लेज़र गाइडेड बमों से लैस किए जा सकते हैं.
थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के डॉ. जैक वेटलिंग का कहना है कि जब युद्ध शुरू हुआ था तो यूक्रेन के पास 50 से भी कम ड्रोन थे.
वह कहते हैं, ''रूस इससे छोटे और बेसिक ड्रोन ओरलान-10 का इस्तेमाल करता है.'
रूस ने कुछ हज़ार ड्रोन के साथ लड़ाई शुरू की थी. लेकिन अब उसके पास अब कुछ सौ ड्रोन ही बचे होंगे. ये ड्रोन कैमरों से लैस होते हैं और ये छोटे बम ले जा सकते हैं.
मिलिट्री ड्रोन कितने कारगर
दुश्मनों का ठिकाना ढूंढने और इन पर तोपों से हमले को दिशा देने के मामले में रूस और यूक्रेन दोनों के ड्रोन काफी कारगर साबित हुए हैं.
डॉ. वेटलिंग कहते हैं, "ओरलान-10 के लक्ष्य ढूंढ निकालने के तीन से पांच मिनट के भीतर ही रूसी सैनिक हमला कर सकते हैं. वरना इस तरह के हमले करने में 20 से 30 मिनट तक लग सकते हैं."
किंग्स कॉलेज के डिफेंस स्टडीज़ विभाग में रिसर्चर डॉ. मार्टिना मिरॉन का कहना है कि ड्रोन की वजह से ही यूक्रेनी सेना लड़ाई को लंबा खींच पाई है.
वह कहती हैं, "पहले अगर आपको दुश्मन की पोजीशन ढूंढनी होती थी तो आप इसके लिए सेना की ख़ास यूनिट भेजते थे. इस चक्कर में आपके कुछ सैनिकों के मारे जाने का ख़तरा रहता था. लेकिन अब यह पूरा जोखिम ड्रोन ले रहा है."
युद्ध के कुछ शुरुआती हफ़्तों में तुर्की के बेरक्तार ड्रोन ने खूब तारीफ़ बटोरी.
मिरॉन कहती हैं, "शुरू में उन्हें हथियारों के जखीरों पर हमले करते दिखाया गया था. मोस्कवा युद्धपोतों को डुबोने में भी ड्रोन की खासी भूमिका रही है. हालांकि कई बेरक्तार ड्रोन रूसी एयर डिफेंस ने ध्वस्त भी किए."
डॉ. वेटलिंग कहते हैं, "दरअसल वे साइज़ में बड़े होते हैं और धीमे उड़ते हैं. इसके साथ ही वो बहुत ज़्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ाए जा सकते. लिहाज़ा उन्हें निशाना बनाना आसान था."
गै़र सैन्य ड्रोन का इस्तेमाल
मिलिट्री ड्रोन काफ़ी महंगे होते हैं .एक बेरक्तार ड्रोन की कीमत 17 लाख पाउंड तक हो सकती है. इसलिए रूस और यूक्रेन, दोनों छोटे और कॉमर्शियल मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस तरह के डीजीआई मैविक3 ड्रोन की कीमत सिर्फ़ 1700 पाउंड बैठती है.
यूक्रेन की एक ड्रोन निर्माता कंपनी का अंदाज़ा है कि यूक्रेन की सेना के पास कम से कम 6000 ड्रोन होंगे. लेकिन इसकी पुष्टि मुश्किल है. कॉमर्शियल ड्रोन में बम फिट किए जा सकते हैं. हालांकि इनका ज़्यादातर इस्तेमाल दुश्मन की सेना का ठिकाना तलाशने और उन पर सीधे हमले के लिए होता है.
डॉ. मिरॉन बताती हैं, "गोला-बारूद के स्टॉक के मामले में यूक्रेन की स्थिति रूस से काफ़ी कमज़ोर है. इसलिए आसमान से निगरानी करते हुए टारगेट तलाशने और उन पर तोप से हमला करना यूक्रेन के लिए किफ़ायती है. हालांकि कॉमर्शियल ड्रोन मिलिट्री ड्रोन की तुलना में कमज़ोर होता है. ''
डीजेआई मैविक जैसे कॉमर्शियल ड्रोन की रेंज 30 किलोमीटर होती है और यह सिर्फ 46 मिनटों तक ही उड़ सकता है. इससे सस्ते और छोटे ड्रोन इससे भी कम समय तक उड़ सकते हैं. उनकी दूरी तय करने की क्षमता भी कम होती है.
ड्रोन हमलों से बचाव
डॉ. मिरॉन बताती हैं कि रूस कमर्शियल ड्रोन के ख़िलाफ़ मिलिट्री ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करता है.
वह कहती हैं, "रूसी सेना स्टुपोर राइफल का इस्तेमाल करती है जो इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक तरंगों के उठने के साथ ही निशाना साधती है. इससे कमर्शियल ड्रोन जीपीएस का इस्तेमाल कर उड़ने में नाकाम रहते हैं."
रूसी सेनाओं ने एयरोस्कोप जैसे ऑनलाइन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया है. इससे कमर्शियल ड्रोन और उनके ऑपरेटरों के बीच कम्यूनिकेशन को रोका जा सकता है. इससे ड्रोन क्रैश कराया जा सकता है या फिर इसे बेस की ओर लौटने पर मजबूर किया जा सकता है.
यह सिस्टम इसे पीछे सूचना भेजने से भी रोक सकता है.
रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट के मुताबिक़, एक औसत यूक्रेनी ड्रोन मुश्किल से एक सप्ताह तक ही टिक पाता है.
कौन हैं ड्रोन सप्लायर?
व्हाइट हाउस के मुताबिक़, रूस फ़िलहाल ईरान से शाहिद ड्रोन खरीद रहा है. यमन में लड़ रहे हूती विद्रोही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में अपने ठिकानों पर हमले के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं.
दूसरी ओर, अमेरिका यूक्रेन को 700 स्विचब्लेड कामिकाजे मिलिट्री ड्रोन दे रहा है. ये विस्फोटक से लैस हैं. ये जब तक अपना टारगेट न ढूंढ लें तब तक आसमान में चक्कर काटते रहते हैं.
एलन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी यूक्रेन को स्टारलिंक सेटेलाइट कम्यूनिकेशन सिस्टम मुहैया करा रही है. इससे कॉमर्शियल ड्रोन और ऑपरेटरों के बीच एक तय लिंक स्थापित हो जाता है.
डीजेआई ने अब रूस या यूक्रेन को ड्रोन सप्लाई करना बंद कर दिया है.
यूक्रेन ये ड्रोन कैसे ख़रीद रहा है?
यूक्रेन ने 200 मिलिट्री ड्रोन खरीदने के लिए क्राउड फंडिंग की अपील की है.
डॉ. वेटलिंग कहते हैं, "यूक्रेन टीबी3 के साथ-साथ छोटे और फिक्स डैने वाले रीकॉनेससेंस ड्रोन भी ख़रीदने की ताक में हैं."
हाल में यूरोविज़न गीत प्रतियोगिता जीतने वाले यूक्रेनी बैंड कलुश ऑरकेस्ट्रा ने अपनी ट्रॉफी 7,12,000 पाउंड में बेच दी. इस रकम को ड्रोन खरीदने के लिए दान कर दिया जाएगा. इस रकम से यूक्रेन निर्मित तीन पीडी-2 ड्रोन खरीदे जा सकते हैं.
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