पुतिन के ईरान दौरे से पहले रूसी राजदूत के बयान पर क्यों है हंगामा

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन एक शिखर सम्मेलन के लिए मंगलवार को ईरान पहुंच रहे हैं.

इसे एक अहम दौरा माना जा रहा है. तेहरान में पुतिन अपने ईरानी समकक्ष इब्राहिम रईसी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के साथ सीरिया शांति शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं.

लेकिन, इस दौरे से पहले ईरान में रूस के राजदूत लेवान ज़ेगेरियन के द्विपक्षीय संबंधों और नैतिक मूल्यों पर दिए गए बयान की ईरान में आलोचना हो रही है. ज़ेगेरियन इसे लेकर आलोचकों और सुधारवादियों के निशाने पर आ गए हैं.

उन्होंने ये बातें ईरान के अख़बार शार्घ डेली को दिए एक साक्षात्कार में कही हैं. अख़बार ने उनसे सवाल पूछा था कि रूस ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र को विकसित करने की प्रतिबद्धता को पूरी करने में असफल रहा है.

इस पर लेवेन ज़ेगेरियन ने ईरान पर मौजूद कर्ज़ की याद दिला दी. उन्होंने कहा, "ऐसी बहुत बाते हैं जो आप नहीं जानते... ये बात साफ़ है कि ईरान के पास हमारे लाखों यूरो बकाया हैं और वो इनका भुगतान नहीं कर रहा है. आपको इसकी जानकारी कैसे नहीं है?"

इसके बाद उनसे सवाल किया गया कि रूस ने 2015 में हुए परमाणु समझौते को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों को चोट पहुंचाई है. इस पर रूसी राजदूत ने जवाब दिया कि रूस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2018 में समझौते से बाहर निकलने की "आलोचना" की थी जबकि यूरोपीय देशों ने इस पर शायद ही 'अफ़सोस' जताया था.

ज़ेगेरियन ने कहा रूस और ईरान 'एक ही खेमे में हैं' और उन्होंने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि वो "सिर्फ़ समलैंगिकता और बेहद घटियों चीज़ें जैसे अपने खोखले मूल्य ईरान में लाना चाहते हैं."

इसके बाद उन्होंने अपने उन बयानों को लेकर सफ़ाई दी जिन्हें ईरान में हिजाब अनिवार्य करने और शराब पर लगे प्रतिबंध पर हमले के तौर पर देखा जा रहा था.

उन्होंने कहा, "ना सिर्फ़ ईरान बल्कि सभी देशों के अपने मूल्य हैं. हमें दूसरों के मूल्यों और सिद्धांतों को क्यों अपनाना चाहिए?"

राजदूत के बयानों पर प्रतिक्रिया

रूसी राजदूत के पश्चिमी देशों के मूल्यों पर दिए बयान को लेकर प्रमुख सुधारवादी नेता अब्बास अब्दी ने ट्वीट किया कि "ऐसे देश के राजदूत नैतिकता को लेकर बातें कर रहे हैं जहां शराब पीने की लत के चलते जीवन में बहुत कम उम्मीद बची है."

अब्दी ने कहा कि ज़ेगेरियन ने ये बयान ईरान में कट्टर विचार रखने वालों को खुश करने के लिए दिया है.

इस दौरान, पूर्व सुधारवादी नेता और उप-राष्ट्रपति मोहम्मद अरली अब्ताही ने ट्वीट किया, "उन्हें इस बात की चिंता है कि पश्चिमी देश ईरान में समलैंगिकता ला रहे हैं. तुम रूसी खुद नैतिक दुर्बलता के आदर्श उदाहरण हो."

एक ट्विटर यूज़र ने जे़गेरियन के बोलने के तरीक़े पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने पारसी में लिखा #साम्राज्यवाद और ट्वीट किया कि राजदूत शार्घ के साथ साक्षात्कार में "भगवान की तरह बात कर रहे हैं."

लेकिन, सोशल मीडिया पर रूसी राजदूत के बयानों का समर्थन करने वाले भी सामने आए हैं.

अहमद ज़ेदाबादी ने टेलिग्राम पर एक पोस्ट के ज़रिए इस अतार्किक गुस्से को लेकर आगाह किया है. उन्होंने कहा कि रूसी राजूदत के बयानों ने उनके कर्तव्यों की सीमा को पार नहीं किया है. जे़गेरियन किसी और देश के राजदूत हैं और वो हमारी सहमति के अनुसार बात करने के लिए बाध्य नहीं हैं.

रूस के ईरान दौरे की अहमियत

रूसी राष्ट्रपति के ईरान दौरे से छुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इसराइल और सऊदी अरब के दौरे पर थे.

ईरान और सऊदी अरब दोनों ही मध्यपूर्व की दो बड़ी शक्तियां हैं. दोनों इस इलाक़े में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए देश और दुनिया के शक्तिशाली देशों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश करते रहते हैं.

ईरान और रूस, दोनों ही सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार का समर्थन करते हैं जबकि तुर्की बशर अल-असद के विरोध में लड़ने वाले सैनिकों का समर्थन करता है. अगले हफ़्ते बुधवार को पुतिन तुर्की का भी दौरा करने वाले हैं.

इस दौरे की अहमियत को लेकर ब्रिटेन स्थित ईरानी पत्रकार मेहदी अली यज़दानी बीबीसी से कहते हैं कि पुतिन के दौरे का एक अहम एजेंडा ईरान से सशस्त्र ड्रोन ख़रीदना भी है.

शायद यही वजह है कि सोमवार को अमेरिका ने दावा किया था कि तेहरान रूस को सैकड़ों ड्रोन भेजने की तैयारी कर रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने सोमवार को कहा था, "हमारी जानकारी बताती है कि ईरानी सरकार रूस को कई सौ ड्रोन देने जा रही है. इनमें हथियारों का इस्तेमाल करने में सक्षम ड्रोन भी शामिल हैं. हमें पता चला है कि ईरान इन ड्रोन्स का उपयोग करने के लिए, रूसी सेनाओं को प्रशिक्षित करने की तैयारी भी कर रहा है."

हालांकि, रूस ने ड्रोन के बारे में अमेरिकी दावे की न तो पुष्टि की है और न ही इसे ग़लत बताया है.

लेकिन ईरानी पत्रकार मेहदी अली यज़दानी के मुताबिक़ रूस 2019 से ही ईरानी ड्रोन खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है.

यज़दानी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "यूक्रेन में हमलों के बाद अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. ईरान के ड्रोन रूसी मिसाइलों से कई गुना सस्ते हैं और असरदार भी हैं. अगर ईरान ने पहले ही रूस को कुछ ड्रोन भेज दिए हों तो इसमें मुझे आश्चर्य नहीं होगा. वैसे भी ये सौदेबाज़ी खुलेआम नहीं होगी."

विशेषज्ञों का तर्क है कि प्रतिबंधों की स्थिति में रूस की ऐसे हथियारों का उत्पादन करने की क्षमता कम हुई है. रूस यूक्रेन की जंग में मिसाइलों की कमी से जूझ रहा है. ड्रोन तो रूस भी बनाता है लेकिन प्रतिबंधों के कारण उसका उत्पादन ठप है. दूसरी अहम बात ये है कि ईरान के ड्रोन सस्ते हैं.

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