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अपनी अजन्मी बच्ची की धड़कनें रोकने के लिए प्रार्थना करने को मजबूर माता-पिता की कहानी
- Author, सारा मॉनेटा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
एंड्रिया और जे ने कभी सोचा नहीं था कि उनके लिए स्थिति इतनी जटिल हो जाएगी कि उन्हें ईश्वर से अपनी अजन्मी बच्ची की धड़कनें रोकने की प्रार्थना करनी होगी.
एंड्रिया घातक संक्रमण की आशंका से जूझ रही हैं और बच्ची का जन्म मां और बच्ची दोनों के लिए ख़तरे से खाली नहीं.
अमेरिका की एंड्रिया प्रूदेन्ते और उनके पति जे वीलड्रेयर यूरोपीय देश माल्टा में छुट्टियां बिताने आए थे. एंड्रिया 16 सप्ताह की गर्भवती थीं और इस दौरान उनका खू़न निकलने लगा था.
डॉक्टरों का कहना था कि उनके शरीर में प्लेसेंटा (गर्भनाल) का कुछ हिस्सा गर्भाशय (यूटेरस) से अलग हो गया है और ऐसे में गर्भधारण जारी रखना उनके लिए बेहद ख़तरनाक हो गया है.
लेकिन इस वक़्त बच्ची के दिल की धड़कनें सुनाई देने लगी थीं और माल्टा में इसका मतलब ये है कि डॉक्टर क़ानूनन एंड्रिया का गर्भपात नहीं करा सकते.
एंड्रिया और जे बीते एक सप्ताह से माल्टा के एक अस्पताल में है और इंतज़ार कर रहे हैं.
जे वीलड्रेयर ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "हम यहां बैठे सोच रहे हैं कि एंड्रिया को लेबर पेन शुरू होगा तो अस्पताल हमारी मदद करेगा. अगर बच्ची के दिल का धड़कना बंद हुआ, उस सूरत में भी अस्पताल मदद करेगा लेकिन इसके अलावा वो और कुछ नहीं करेंगे."
जे नाराज़ हैं और ग़ुस्से में हैं. वो कहते हैं कि एंड्रिया की हालत कभी भी बिगड़ सकती है.
जे कहते हैं, "एंड्रिया का ख़ून तेज़ी से बह रहा है और उनके गर्भाशय से प्लेसेंटा अलग हो रहा है. मेंम्ब्रेन पूरी तरह टूट चुका है और बच्चे को मां से जोड़ने वाली नाल अब गर्भाशय से बाहर निकल गई है. एंड्रिया के लिए संक्रमण से गंभीर ख़तरा पैदा हो गया है, लेकिन इन सबको रोका जा सकता है."
वो कहते हैं, "बच्ची का बचना असंभव है और इसे किसी हालत में बदला नहीं जा सकता. हम उसे प्यार करते हैं, बेहद प्यार करते हैं और चाहते हैं कि उसे बचा लिया जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं सकता. हम उस हालत में है कि एक तरफ़ हम उस बच्ची को जन्म से पहले ही खो रहे हैं, जो अभी पैदा नहीं हुई और दूसरी तरफ़ इलाज में अस्पताल देरी कर रहा है, जिससे एंड्रिया के लिए संक्रमण का ख़तरा बढ़ गया है."
वो चाहते हैं कि उनकी पत्नी को आपात स्तर पर इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया जाए और इसका ख़र्च उनकी ट्रैवल कंपनी उठाए.
साल 2017 में भी इस तरह के एक मामले में एक पर्यटक को आपात स्तर पर गर्भपात के लिए फ्रांस ले जाया गया था. लेकिन माल्टा में महिलाओं के पास अभी ये सुविधा नहीं है.
माल्टा में गर्भपात पर पूरी रोक
माल्टा उन द्वीपों में हैं जहां गर्भपात के मामले में यूरोप के सबसे कड़े क़ानून लागू हैं. यहां गर्भपात पूरी तरह से ग़ैर-क़ानूनी है. अगर भ्रूण के बचने की कोई संभावना न हो उस सूरत में भी यहां गर्भपात करने पर मनाही है.
माल्टा की डॉक्टर लारा दिमित्रीजेविच पेशे से वकील हैं और महिलाधिकारों पर काम करने वाली संस्था फाउंडेशन फ़ॉर वीमेन्स राइट्स की अध्यक्ष हैं. वो लंबे वक़्त से देश के इस क़ानून को लेकर लड़ रही हैं.
वो कहती हैं, "यहां महिलाएं इस मुद्दे पर बमुश्किल ही बात करती हैं. डॉक्टर भी ये मानते हैं कि बच्चे का जन्म प्राकृतिक तरीके से होना चाहिए. अगर बच्चे के जन्म के दौरान मरीज़ को सेप्सिस हो जाता है या फिर वो गंभीर रूप से बीमार पड़ जाती है, तभी डॉक्टर हस्तक्षेप करते हैं."
वो कहती हैं, "हम जानते हैं कि औसतन हर साल इस तरह के दो या तीन मामले सामने आते हैं. लेकिन एंड्रिया ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा की है जिसके बाद हम देख रहे हैं कि कई और महिलाएं भी इस मुद्दे पर आगे बढ़कर बात करने लगी हैं."
लारा दिमित्रीजेविच कहती हैं कि इस क़ानून में बदलाव आना ज़रूरी है, क्योंकि इस तरह के क़ानून न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं, बल्कि उनके और उनके परिवार के लिए मानसिक तनाव की भी बड़ी वजह बनते हैं.
बीबीसी ने इस संबंध में माल्टा की सरकार और अस्पताल से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिल पाया है.
जे वीलड्रेयर कहते हैं कि वो बीते छह दिनों से इस डर में जी रहे हैं कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए.
वो कहते हैं, "ये प्रक्रिया दो घंटों में ही पूरी कर ली जानी चाहिए थी, इससे एंड्रिया के लिए ख़तरा पैदा नहीं होता. अब स्थिति ऐसी है कि हम बस यही सोच रहे हैं कि आगे क्या होगा.
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