परवेज़ मुशर्रफ़ की पाकिस्तान वापसी का रास्ता हुआ साफ़? - उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को पाकिस्तान वापस लौटने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए.
जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ इन दिनों दुबई में रह रहे हैं और बीमार हैं.
शुक्रवार को यह अफ़वाह उड़ गई थी कि उनकी मौत हो गई है लेकिन फिर उनके परिवार ने एक बयान जारी कर कहा कि उनकी तबीयत ख़राब है और वो पिछले तीन हफ़्ते से अस्पताल में हैं.
ख़्वाजा आसिफ़ नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग (एन) के वरिष्ठ नेता हैं और 1999 में जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने इसी मुस्लिम लीग की सरकार का तख़्तापलट दिया था.
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रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया है, "जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की ख़राब सेहत को देखते हुए उनको वतन वापस आने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए. पहले की घटना का इस पर असर नहीं होना चाहिए. अल्लाह उनको सेहत दे और वो उम्र के इस हिस्से में इज़्ज़त के साथ अपना समय गुज़ार सकें."
1999 से लेकर साल 2008 तक वो पाकिस्तान की सत्ता पर क़ाबिज़ थे. साल 2014 में उन पर 2007 में पाकिस्तान के संविधान को भंग करने का मुक़दमा चला. साल 2019 में पाकिस्तान की एक अदालत ने उन्हें ग़द्दारी करने का दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई. लेकिन उससे पहले 2016 में ही वो इलाज के लिए पाकिस्तान छोड़ कर दुबई चले गए थे. उसके बाद से वो पाकिस्तान वापस नहीं आए हैं.

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पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारत पर लगाया इस्लामोफ़ोबिया की गंभीर स्थिति का आरोप
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भारत में इस्लामोफ़ोबिया की गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेना चाहिए.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, राष्ट्रपति ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत में विभिन्न हिंदुत्व गुटों की तरफ़ से बिना रोक-टोक और सरकारी संरक्षण में मुसलमानों के ख़िलाफ़ की जाने वाली हिंसा भारत में इस्लामोफ़ोबिया और अतिवाद के बढ़ते हुए रुझान को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि भारत अपनी हिंदुत्ववादी नीति छोड़ दे और मुसलमानों को निशाना बनाना और उनकी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना बंद करे. राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और नफ़रत फैलाने की बढ़ती हुई घटना को रोके.
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत इस्लाम के आख़िरी पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद की शान में गुस्ताख़ी करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.

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लगता है नई सरकार एक-डेढ़ महीने में गिर जाएगी: इमरान ख़ान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ़ के चेयरमैन इमरान ख़ान ने कहा है कि उन्होंने ताक़तवर लोगों के पांव पकड़ने के बजाए जनता की अदालत में जाने का फ़ैसला किया है.
अख़बार जंग के अनुसार, पत्रकारों से बात करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "बजट के बाद लगता है यह सरकार (शहबाज़ शरीफ़ की सरकार) एक डेढ़ महीने में गिर जाएगी."
उन्होंने कहा कि आईएमएफ़ मौजूदा सरकार को किसी भी सूरत में नहीं मानेगी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को भी मौजूदा सरकार की अयोग्यता पर पूरा विश्वास है.
इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान में इस समय जो हालात हैं उनसे निकलने का सिर्फ़ एक ही रास्ता है कि जल्द ही आम चुनाव करवा दिए जाएं.
इस अवसर पर उन्होंने फिर कहा कि कोई यह ना समझे कि लॉन्ग मार्च ख़त्म हो गया है.
उनका कहना था, "सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद पूरी ताक़त के साथ लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद लाएंगे. हमें हालात का अंदाज़ा है और मुक़ाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. सरकार के फ़ासीवादी हथकंडों का भरपूर मुक़ाबला करने का फ़ैसला किया है."

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'दहशतगर्दी से जुड़े सभी मामलों पर फ़ैसले संसद में होने चाहिए'
पाकिस्तान के विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा है कि दहशतगर्दी से जुड़े सभी मामलों के बारे में अंतिम फ़ैसला संसद में होना चाहिए.
डॉन अख़बार के अनुसार, पीपीपी ने दहशतगर्दी के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बैठक की. इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा घटनाक्रम और चरमपंथी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और तहरीक-ए-तालिबान अफ़ग़ानिस्तान (टीटीए) के बारे में भी बातचीत हुई.
बाद में बिलावल भुट्टो ने ट्वीट किया, "पीपीपी का मानना है कि सारे फ़ैसले संसद में लिए जाने चाहिए. इस मामले में आम सहमति बनाने के लिए सहयोगी दलों से संपर्क करूंगा."
पाकिस्तान की सरकार और टीटीपी काबुल में बातचीत कर रहे हैं और काबुल की तालिबान सरकार इस बातचीत में मदद कर रही है.
पिछले महीने पाकिस्तान की सरकार और टीटीपी ने अनिश्चित काल के लिए युद्धबंदी का ऐलान किया था और सीमावर्ती क़बायली इलाक़ों में पिछले दो दशकों से जारी चरमपंथी गतविधियों को ख़त्म करने के लिए बातचीत जारी रखने का फ़ैसला किया था.
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