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बाइडन ईद पर बोले- मुसलमानों को पूरी दुनिया में निशाना बनाया जा रहा
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने व्हाइट हाउस में सोमवार को ईद मनाई. उन्होंने एक बार फिर से व्हाइट हाउस में ईद मनाने की परंपरा की शुरुआत की है.
इससे पहले उनके पूर्ववर्ती ने इस परंपरा को तोड़ दिया था. अरब दुनिया में ईद सोमवार को थी लेकिन दक्षिण एशिया के देशों में ईद मंगलवार को मनाई जा रही है.
इस्लाम में रमज़ान को पवित्र महीना माना जाता है और इस महीने के आख़िर में ईद होती है.
ईद के मौक़े पर व्हाइट हाउस में आए सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''आज दुनिया भर में मैं देख रहा हूँ कि बड़ी तादाद में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा हो रही है. किसी को भी किसी की धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव या अत्याचार नहीं करना चाहिए. मुसलमान हमारे मुल्क को हर दिन मज़बूत बना रहे हैं, लेकिन वे आज भी समाज में चुनौतियों और ख़तरों का सामना कर रहे हैं. उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा रहा है और इस्लामोफ़ोबिया के ज़रिए भी निशाना बनाया जा रहा है.''
बिल क्लिंटन प्रशासन ने व्हाइट हाउस में ईद मनाने की शुरुआत की थी और डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने तक यह परंपरा जारी रही थी. ट्रंप ने इस परंपरा को तोड़ दिया था. हालांकि वो बयान जारी कर बधाई देते थे.
राष्ट्रपति बाइडन ने सोमवार को कहा कि उन्होंने हाल ही में फ़ेडरल बेंच में पहली मुस्लिम महिला को नामांकित किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह अपनी सरकार में विविधता को ख़ासा तवज्जो देते हैं और इसे लेकर वह प्रतिबद्ध हैं. इस मौक़े पर वॉशिंगटन में मस्जिद मोहम्मद के इमाम तालिब शरीफ़ ने कहा कि व्हाइट हाउस से अमेरिका और पूरी दुनिया को अहम संदेश दिया गया है.
शरीफ़ ने कहा, ''हम राष्ट्रपति के बयान का स्वागत करते हैं. हमारी सरकार राष्ट्र के मौलिक मूल्यों, क़ानूनों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्ध है.'' इस मौक़े पर अमेरिका की प्रथम महिला जिल बाइडन ने भी ईद की शुभकामनाएं दीं.''
ट्रंप ने तोड़ी थी परंपरा
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़, अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जेफ़रसन ने 1805 में इस परंपरा की शुरुआत की थी. हालांकि इसके बाद निकट अतीत में व्हाइट हाउस में इफ़्तार पार्टी की शुरुआत 1996 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने की थी. इस परंपरा को जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा ने भी जारी रखा था.
इस डिनर में अमेरिकी मुस्लिम समुदाय के अहम लोग शामिल होते थे. इसके साथ ही इसमें कांग्रेस सदस्य और मुस्लिम देशों के डिप्लोमैट भी शरीक होते थे. 1999 से अमेरिकी विदेश मंत्रालय या तो एक इफ़्तार पार्टी देता था या ईद के मौक़े पर एक स्वागत समारोह में पार्टी का आयोजन करता था.
इस मौक़े पर कई डिप्लोमैट्स जुटते थे. डोनाल्ड ट्रंप अपने चुनावी कैंपेन से ही इस्लाम को लेकर आक्रामक रहे थे. ट्रंप ने अपने चुनावी कैंपेन में मस्जिदों को निगरानी में रखने की बात कही थी.
ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद कई मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के अमरीका आने पर पाबंदी भी लगाने की कोशिश की थी. हालांकि ट्रंप ने अपने पहले विदेशी दौरे में सऊदी अरब की यात्रा कर अपनी छवि बदलने की कोशिश की थी. इस यात्रा में उन्होंने 55 मुस्लिम बहुल देशों के सामने आतंकवाद के ख़िलाफ़ साथ आने की अपील की थी.
नवंबर 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ट्विटर अकाउंट से तीन मुसलमान विरोधी भड़काऊ वीडियो रीट्वीट किए गए थे. ट्रंप के अकाउंट से एक कट्टरपंथी ब्रिटिश समूह के ट्वीट को रीट्वीट किया गया था.
पहला ट्वीट ब्रिटेन फ़र्स्ट की उपनेता जेडा फ्रांसेन का था. इस ट्वीट में दावा किया गया था कि एक प्रवासी मुसलमान एक व्यक्ति पर हमला कर रहा है. इसी तरह के दो और वीडियो रीट्वीट किए गए थे. इस संगठन का मानना था कि ब्रिटेन का इस्लामीकरण हो रहा है. इस संगठन ने ब्रिटेन के आम चुनाव में प्रवासी विरोधी और गर्भपात विरोधी नीतियों को मुद्दा बनाकर उम्मीदवार भी खड़ा किया था, लेकिन किसी सीट पर जीत नहीं मिली. फ्रांसेन के ट्विटर पर 52 हज़ार फ़ॉलोवर्स थे.
डोनल्ड ट्रंप द्वारा रीट्वीट किए जाने पर फ्रांसेन ने ख़ुशी जताई थी. अपने ट्वीटर अकाउंट पर उन्होंने लिखा है, ''डोनल्ड ट्रंप ने ख़ुद इन वीडियो को रीट्वीट किया है. उनके चार करोड़ चार लाख फ़ॉलोवर्स हैं. ईश्वर आपकी रक्षा करे ट्रंप. अमरीका पर भी ईश्वर की दुआ बरसे!''
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