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यूक्रेन के बूचा में सड़कों पर पड़ी लाशों पर रूसी दावों का फ़ैक्ट चेक
- Author, रियलिटी चेक और बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
चेतावनी - इस रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीरें कुछ लोगों को विचलित कर सकती हैं.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेज़ ने यूक्रेन के बूचा शहर में लोगों की हत्या की तस्वीरों पर एक स्वतंत्र जांच की मांग की है.
कीएव के बाहरी इलाक़े में स्थित बूचा से रूसी सेना के पीछे हटने के बाद, शहर की गलियों में शव पड़े होनें की तस्वीरें सामने आई हैं. कुछ पत्रकारों ने भी ये शव देखे हैं.
यूक्रेन ने रूस पर जानबूझकर हत्याएं करने का आरोप लगाया है तो रूस ने इसे 'यूक्रेन की हुकूमत का उकसाने के लिए किया गया नाटक' बताया है. साथ ही रूस ने बूचा से सामने आई फ़ुटेज पर कई दावे किए हैं.
रूस का दावा: 'फ़ेक शव'
बूचा से रूसी सेना के हटने के बाद, एक कार से ली गई फ़ुटेज में सड़क के दोनों ओर लाशें देखी जा सकती हैं.
इस फ़ुटेज के सामने आने के बाद, रूस की हिमायत करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इनका एक 'स्लो डाउन' (धीमी गति का) वीडियो शेयर किया है और दावा किया है कि फ़ुटेज में दिख रहे एक शव का हाथ हिल रहा है.
कनाडा में रूसी दूतावास ने इसे ट्वीट किया है और लिखा - कीएव के पास बूचा शहर में फ़ेक शव का फ़र्ज़ी वीडियो."
वीडियो थोड़ा धुंधला है पर नज़दीकी विश्लेषण से पता चलता है कि जिसे रूस हिलती हुई बाँह बता रहा है वो दरअसल कार की विंडस्क्रीन के दाएं कोने पर एक मार्क है.
हमने उस मार्क पर एक गोला बनाया है ताकि वो साफ़ दिख सके. ये मार्क धूल का कण या बारिश की बूँद सरीखा है.
इसी फ़ुटेज के बारे में रूस ने एक और दावा किया है. फ़ुटेज के उस हिस्से में कार एक अन्य शव के पास से गुज़रती है. ये शव लाल और पीले पत्थरों वाले फ़ुटपाथ पर पड़ा है.
शव को थोड़े समय के लिए कार के दाएं विंग मिरर से देखा जा सकता है.
रूस के हिमायती सोशल मीडिया अकाउंट्स का दावा है कि इसमें शव बैठता हुए दिख रहा है.
लेकिन फ़ूटेज के इस हिस्से वीडियो को स्लो मोशन में देखने से पता चलता है कि विंग मिरर साफ़ तौर से शव के प्रतिबिंब के साथ-साथ, बैकग्राउंड में घरों को भी ठीक से नहीं दिखा रहा है.
ऐसा ही इंटरनेट में डाले गए विंग मिरर्स के अन्य कई वीडियो में देखा जा सकता है.
बीबीसी ने दो अप्रैल को पोस्ट किए गए वीडियो की तीन अप्रैल को फोटो एजेंसी गेटी और एएफ़पी की तस्वीरें से तुलना की है
वीडियो में पहला शव सफ़ेद पीठ के बल पड़ा दिख रहा है. शव के दाईं ओर के फ़ुटपाथ पर थोड़ी घास है तो थोड़ा पत्थर.
साथ ही सफ़ेद बाड़ के पास एक सिल्वर रंग की कार फ़ुटपाथ पर दिख रही है जिसकी डिग्गी खुली हुई है.
यही कार, फ़ुटपाथ और बाड़ गेटी/एएफ़पी की तस्वीर में भी है.
दूसरा शव काली जैकेट में है. शव के दाएं बाज़ू में बैंडेज देखी जा सकती है. ये शव लाल और पीले फ़ुटपाथ के पास और टूटे हुए बाड़ के सामने है.
ये काली जैकेट, बैंडेज, फ़ुटपाथ और बाड़…सभी गेटी/एएफ़पी की तस्वीर से मेल खाते हैं.
दावा: शव 'अकड़े नहीं हैं'
रूस के विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में लिखा, "ये विशेषकर चिंता का विषय है कि कीएव की हुकूमत ने जिन तस्वीरों को प्रकाशित किया है वे चार दिन बाद भी 'अकड़ी' नहीं है."
यूक्रेन की सेना के अनुसार रूसियों ने बूचा को 31 मार्च के दिन छोड़ा है जबकि रूस का दावा है कि वे 30 मार्च को ही बूचा से निकल गए थे.
मृत्यू के बाद शव एक प्रक्रिया से गुज़रते हैं जिसे लेटिन भाषा में रिगर मोर्टिस कहते हैं. इस स्टेज में शव मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और फिर अकड़ जाती हैं.
हमने इस विषय पर फ़ोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट से राय ली और पूछा कि क्या मृत्यु के चार दिन बाद शव अकड़ जाता है?
रवांडा और कोसोवो जैसी जगहों पर युद्ध अपराधों की जांच में हिस्सा ले चुके इस पैथोलॉजिस्ट ने अपना नाम न बताए जाने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि चार दिन बाद शव में ये अकड़न आमतौर पर घट जाती है.
रूस ने अपने ट्वीट में ये भी दावा किया है कि शवों पर कोई दाग़ नहीं है. ये तो साफ़ नहीं है कि इससे उनका अभिप्राय है लेकिन पैथोलॉजिस्ट का कहना है कि बंदूक की गोली से हुई मौतों में शव पर असर, इस्तेमाल किए गए हथियार की वजह से अलग-अलग होता है.
कई बार ऐसी मौतों में ख़ून के दाग दिखाई नहीं देते हैं. ये भी संभव है कि ख़ून के धब्बे कपड़ों के अंदर हों और बाहर न दिखें. सर्दियों के कपड़ों में दाग दिखना और भी मुश्किल होता है.
शायद रूसी ट्वीट का संकेत ये हो कि मौत के बाद, आपके शरीर के भीतर ख़ून नीचे की ओर जमा हो जाता है क्योंकि वो रगों में दौड़ना बंद कर देता है. और इस कारण त्वचा लाल या बैंगनी रंग की हो जाती है.
लेकिन अगर कोई पेट के बल गिरा है तो खून का जमाव महज़ एक तस्वीर दिखना मुश्किल है.
दावा: हिंसक कार्रवाई में एक भी स्थानीय व्यक्ति को नुक़सान नहीं हुआ
रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि जब तक बूचा रूस के कब्ज़े में था वहाँ 'एक भी स्थानीय निवासी को किसी हिंसक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा है.'
लेकिन ये दावा कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से मेल नहीं खाता. एक स्थानीय अध्यापक ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया कि रूसी सेना ने पांच लोगों को एक जगह जमा किया और उनमें से एक को गोली मार दी.
रूसी वेबसाइट द इनसाइडर से बात करने वाले स्थानीय लोगों ने भी लगभग ऐसी ही बातें बताईं.
क्रिस्टिना नाम की एक स्थानीय महिला ने द इनसाइडर को बताया, "ये डरावने दिन हैं. ऐसे दिन जब आपका घरबार और जायदाद भी आपके अपने नहीं है. आपकी ज़िंदगी भी अपनी नहीं है. न पानी है, न बिजली, न गैस. घर छोड़ने की पाबंदी है. अगर आप निकले तो गोली मार दी जाएगी."
बीबीसी को भी स्थानीय लोगों ने बताया कि रूसियों ने लोगों के घरों के दरवाज़े तोड़े हैं और लूटपाट की है. सैनिकों ने कीमती सामान और खाना तक चुराया है.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने ये भी दावा किया है कि 'उनकी सेना 30 मार्च को बूचा से निकल चुकी थी और ये फ़ुटेज चार दिन बाद सामने आई है जब यूक्रेनी सेना और मीडिया बूचा शहर में आ चुका था.'
लेकिन एएफ़पी जैसे मीडिया संस्थानों ने दो अप्रैल को शवों की तस्वीरें प्रकाशित की हैं. बीबीसी ने भी पाया है कि एक अप्रैल तक सोशल मीडिया पर सड़कों पर पड़े शवों के वीडियो तेज़ी से फैल रहे थे.
रिपोर्ट: जेक हॉर्टन, शायन सरदारीज़ादेह, रशेल श्रेयर, ओल्गा रॉबिनसन, अलिस्टेयर कोलमेन और डेनिएल पालुंबो
वीडियो प्रॉडक्शन: सारा ग्लैट और जैकलिन गेल्विन
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