You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
श्रीलंका: राष्ट्रपति आवास के बाहर हिंसा के बाद देश में लगा आपातकाल
श्रीलंका में राष्ट्रपति आवास के बाहर गुरुवार को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद अब देश भर में आपातकाल घोषित कर दिया गया है.
गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो में राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के निजी आवास के पास बैरिकेड्स पर धावा बोल दिया था और वाहनों में आग लगा दी थी.
घटना के बाद सेना को तैनात किया गया है और उनके पास बिना वारंट भी संदिग्धों को गिरफ़्तार करने की छूट दी गई है.
गुरुवार को राष्ट्रपति राजपक्षे के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ, लेकिन प्रदर्शन में शामिल होने वालों का दावा है कि जब पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, पानी की बौछार की और लोगों को मारने लगी तब ये प्रदर्शन हिंसक हो गए.
जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किए.
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के हवाले से एक अधिकारी के बताया कि झड़प के दौरान कम से कम दो दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए.
समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को 53 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया और पांच समाचार फोटोग्राफ़रों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया और एक पुलिस थाने में उन्हें प्रताड़ित किया गया. सरकार का कहना है कि पत्रकारों के साथ बदसलूकी के मामले में जांच की जाएगी.
श्रीलंका आज़ादी के बाद से सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. खाने के सामान के बढ़ते दाम और इसकी कमी के कारण लोग बेहाल हैं.
गुरुवार की रात क्या हुआ
गुरुवार की रात को हज़ारों लोगों ने राजपक्षे के इस्तीफ़े की मांग करते हुए उनके घर की ओर रैली निकाली जिसमें कई अज्ञात सोशल मीडिया एक्टिविस्ट भी शामिल थे.
प्रदर्शनकारियों ने राजधानी की मुख्य सड़क को टायरों में आग लगाकर जाम कर दिया था. इस दौरान उन्होंने सेना की दो बसों और एक जीप में आग लगा दी और पत्थरों से पुलिस अफ़सर पर हमला किया.
सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. यह अभी तक साफ़ नहीं है कि सुरक्षाबलों ने इसके लिए गोलियों या रबर बुलेट का इस्तेमाल किया है या नहीं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी आधिकारिक सूत्रों के हवाले से लिखती है कि जब यह सब हो रहा था तब राजपक्षे अपने घर पर नहीं थे लेकिन इस संकट से निपटने के लिए शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने चर्चा की थी.
एक निजी टीवी नेटवर्क इस प्रदर्शन का लाइव प्रसारण कर रहा था जिसे तुरंत रोक दिया गया था. पत्रकारों का कहना है कि सरकार के दबाव के कारण ऐसा हुआ.
सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो में पुरुष एवं महिलाएं राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और उनके परिवार के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं जिसमें वो शक्तिशाली राजपक्षे परिवार के सभी सदस्यों से पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं.
कैसे बने ये हालात
श्रीलंका की भयानक आर्थिक स्थिति के लिए कोविड-19 महामारी को ज़िम्मेदार माना जा रहा है क्योंकि इससे उसके पर्यटन क्षेत्र पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ा है.
वहीं कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार के कुप्रबंधन और लगातार क़र्ज़ लेने के कारण इतने बुरे हालात पैदा हुए हैं.
श्रीलंका ने मार्च 2020 में आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके और इसके ज़रिए विदेशी क़र्ज चुकाने के लिए 51 अरब डॉलर बचाया जा सके.
वहीं हाल के दिनों में श्रीलंका में डीज़ल की कमी के कारण भी हाहाकार मचा हुआ है. देश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए किए गए लेकिन इस दौरान किसी बड़े नेता के ख़िलाफ़ ऐसा होते नहीं देखा गया.
रिटायर बैंकर और प्रदर्शनकारियों में शामिल जगत लियानगे ने कहा, "मैं इस सरकार पर बोझ नहीं हूं. मैं आर्थिक तौर पर ठीक-ठाक हूं. लेकिन मेरी दौलत किसी काम की नहीं. मेरे पास ख़ूब पैसे हैं लेकिन वो किसी काम के नहीं. मैं उनसे कुछ नहीं खरीद सकता. मैं पेट्रोल पंप पर तेल नहीं ख़रीद सकता. जब मेरे घर पर गैस ख़त्म होगी तो मैं अपना सिलेंडर नहीं भरवा सकता. मेरे ख़्याल से ये इस देश का सबसे अंधकार वाला समय है. हम अपने पैसे से कुछ नहीं कर पा रहे हैं. हमारे नेता बिना मारे ही हमारी हत्या कर रहे हैं."
अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ गुरुवार को देश के सभी पेट्रोल पंपों पर डीज़ल उपलब्ध नहीं था. देश की सरकारी बिजली कंपनी ने कहा था कि वो गुरुवार से 13 घंटों का पावर कट करने जा रही है क्योंकि उसके पास जनरेटर्स के लिए डीज़ल नहीं है.
वहीं देश का सार्वजनिक परिवहन ठप पड़ चुका है क्योंकि बसों और कमर्शियल वाहनों में मुख्य ईंधन के तौर पर डीज़ल का इस्तेमाल होता है जो कि देश में नहीं है.
परिवहन मंत्री दिलम अमुनुगमा कहते हैं, "हम गैराज में ठीक होने के लिए खड़ीं बसों से तेल निकालकर उन बसों में इस्तेमाल कर रहे हैं जो चल रही हैं."
दूसरी ओर देश की एक तिहाई बिजली हाइड्रोपावर प्लांट्स से मिलती है लेकिन देश के जलाशय ख़तरनाक स्तर तक पहुंच गए हैं. कई सरकारी अस्पतालों ने सर्जरी बंद कर दी हैं क्योंकि उनके पास जीवनरक्षक दवाएं मौजूद नहीं हैं.
शक्तिशाली राजपक्षे परिवार
श्रीलंका की राजपक्षे सरकार का कहना है कि उसने बेलआउट पैकेज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मांगा साथ ही भारत और चीन से अधिक क़र्ज़ मांगा है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रवक्ता गेरी राइस ने पत्रकारों से वॉशिंगटन में गुरुवार को कहा था कि इस तरह की बातचीत 'आने वाले दिनों में' शुरू होनी चाहिए. माना जा रहा है कि श्रीलंका के वित्त मंत्री इस चर्चा के लिए अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन पहुंचने वाले हैं.
श्रीलंका में राजपक्षे परिवार को बेहद शक्तिशाली माना जाता है. गोटाबाया राजपक्षे के बड़े भाई महिंद्रा राजपक्षे देश के प्रधानमंत्री हैं और वो देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं.
उनके छोटे भाई बासिल देश के वित्त मंत्री हैं. सबसे बड़े भाई चमल कृषि मंत्री हैं वहीं उनके भतीजे नमल देश के खेल मंत्री हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)