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यूक्रेन युद्धः रूस के सरकारी चैनल पर लाइव के बीच वहीं की कर्मचारी ने किया विरोध
रूस के सरकारी टेलीविज़न चैनल पर शाम के कार्यक्रम के दौरान अचानक एक महिला हाथ में युद्ध विरोधी पोस्टर लेकर न्यूज़ एंकर के पीछे खड़ी हो गई.
इस पोस्टर में लिखा था, "युद्ध नहीं, युद्ध रोको. प्रॉपगेंडा पर भरोसा मत कीजिए, ये लोग आपसे झूठ बोल रहे हैं."
इस महिला का नाम मरीना ओवस्यानिकोवा बताया गया है, जो चैनल में ही एक एडिटर हैं.
रूस में टेलीविज़न न्यूज़ पर सरकार की कड़ी निगरानी है और इनपर यूक्रेन को लेकर सिर्फ़ रूसी पक्ष ही दिखाया जा रहा है.
माना जा रहा है कि ओवस्यानिकोवा अब पुलिस की हिरासत में है.
प्रोग्राम के दौरान ओवस्यानिकोवा को ये कहते सुना जा सकता है, "नो टू वॉर, स्टॉप द वॉर!" हालांकि, इसके कुछ ही देर में प्रोग्राम के डायरेक्टर ने प्रोग्राम बीच में ही रोक को बीच में रोकते हुए रिकॉर्डेड कार्यक्रम चला दिया गया.
लाइव प्रोग्राम के दौरान विरोध जताने से पहले मरीन ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने यूक्रेन में हो रही घटनाओं को "अपराध" बताते हुए कहा था कि उन्हें क्रेमलिन के प्रॉपगेंडा के लिए काम करने में शर्म आती है.
उन्होंने वीडियो में कहा, "मुझे शर्म महसूस होती है कि मैंने टेलीविज़न स्क्रीन पर झूठ बोला. मैं शर्मिंदा हूं कि मैंने रूसी लोगों को चलती-फिरती लाश बनने दिया."
ओवस्यानिकोवा ने रूसी लोगों से युद्ध के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि अब सिर्फ़ रूस के लोग ही "पागलपन" को रोक सकते हैं.
ओवस्यानिकोवा की पहचान ज़ाहिर होने के बाद से उनके फेसबुक पेज पर यूक्रेनी, रूसी और अंग्रेज़ी भाषा में कई धन्यवाद संदेश मिल रहे हैं.
सरकार के नियंत्रण में टेलीविज़न
रूस में टेलीविज़न न्यूज़ लंबे समय से सरकारी नियंत्रण में है और सभी बड़े चैनलों पर व्यक्तिगत विचार दिखाना लगभग बंद हो गया है.
लेकिन यूक्रेन पर हमले के बाद आए नए कानून ने मीडिया के लिए पहले से भी ज़्यादा डर भरा माहौल बना दिया है. इस माह की शुरुआत में पास हुए इस कानून की वजह से रूस की सैन्य कार्रवाई को "आक्रमण" कहना अवैध है और साथ ही इसको लेकर कोई भी फ़र्जी खबर चलाना भी भारी पड़ सकता है.
रूस की सरकारी मीडिया इस युद्ध को "विशेष सैन्य अभियान" बता रही है और यूक्रेन की छवि इस तरह बना रही है, जैसे उसके उकसावे पर कार्रवाई की गई हो.
रेडियो स्टेशन इको ऑफ मॉस्को और ऑनलाइन टीवी चैनल कुछ स्वतंत्र मीडिया घरानों ने भी सरकारी दबाव की वजह से प्रसारण-प्रकाशन बंद कर दिया है.
रूस में बीबीसी को भी प्रतिबंधित कर दिया है. इसके बाद बीबीसी ने अपनी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए कुछ उपाय भी बताए हैं.
रूस में कई सोशल मीडिया साइटों को भी ब्लॉक कर दिया गया है, जिसकी वजह से रूस में रहने वालों के लिए ख़बरों के स्रोत भी घट गए हैं.
फ़ेसबुक और ट्विटर भी बीते कुछ दिनों से प्रतिबंधित कर दिया गया है. रूस में प्रचलित इंस्टाग्राम को भी सोमवार को ब्लॉक कर दिया गया है. हालांकि, प्रतिबंधों के बावजूद कई रूसी लोग इन साइटों तक पहुंच रहे हैं.
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