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यूक्रेन-रूस युद्ध: वो तेल भंडार जिसे अमेरिका नमक की चट्टान वाली गुफा में छिपाकर रखता है
रूस और यूक्रेन के बीच बीते दस दिनों से जारी संघर्ष की वजह से दुनिया भर में एक तेल संकट खड़ा होता दिख रहा है.
पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमत सौ डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गयी है. ऐसे में इस तेल संकट का असर यूरोप से लेकर अमेरिका समेत दुनिया भर के तमाम देशों में देखा जा रहा है.
लेकिन ऐसे मौकों पर अमेरिका की नज़र अपने दक्षिणी राज्यों लुइसियाना और टेक्सस में स्थित तेल के भंडार वाली गुफाओं पर पड़ती है.
और मौजूदा हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी से जुड़े अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों ने तेल के दामों पर लगाम लगाने के लिए साठ मिलियन बैरल तेल जारी करने का फ़ैसला किया है.
बाइडन प्रशासन ने अपने रणनीतिक तेल भंडार से 30 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फ़ैसला किया है.
अमेरिका का ये भूगर्भीय तेल भंडार इतना बड़ा है कि यह ऐसे मुश्किल मौकों पर अमेरिका को अपनी तेल खपत को पूरा करने और तेल बाज़ार में आपूर्ति को संभालने का मौका देता रहा है.
नमक और तेल
अमेरिका का ये तेल भंडार लुइसियाना के बेटन रोग से लेकर टेक्सस के फ्रीपोर्ट तक फैली 60 भूगर्भीय गुफाओं में नमक की चट्टानों में मौजूद है.
नमक कच्चे तेल को सुरक्षित रखने में काफ़ी फ़ायदेमंद होता है क्योंकि दोनों तत्व आपस में मिलते नहीं हैं. ऐसे में इन गुफाओं को तेल को संग्रहित करने के लिहाज़ से काफ़ी मुफीद माना जाता है.
इन गुफाओं में 700 मिलियन बैरल कच्चा तेल भंडारित किया जा सकता है. अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक़, बीती 25 फरवरी तक यहां 580 मिलियन बैरल तेल भंडारित है.
हालांकि, ज़मीन पर ज़्यादा कुछ नज़र नहीं आता है, बस कुछ कुओं के मुहाने और पाइप दिखाई पड़ते हैं.
ये पाइपलाइन ज़मीन के अंदर हज़ारों मीटर तक पसरी होती हैं जिनकी मदद से उच्च दबाव वाला पानी छोड़कर तेल निकाला जा सकता है.
हालांकि, नमक की चट्टानों में बनी ये गुफाएं पूरी तरह से स्थिर नहीं होती हैं. इनकी छतें या दीवारें ढह सकती हैं जिससे मशीनरी को नुकसान होता है. ऐसे में मशीनों को बेहद सावधानी से रखना होता है.
और इनके रखरखाव में भी भारी खर्च होता है जो कि प्रति वर्ष 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर है.
लेकिन इसकी वजह से तेल आपूर्ति में संकट पैदा होने के बाद भी अमेरिका उसके प्रभाव से बचने में कामयाब रहा है.
यही नहीं, अगर ज़रूरत पड़े तो अमेरिका कई महीनों तक बाहर से तेल ख़रीदे बगैर अपनी ऊर्जा ज़रूरत की भरपाई कर सकता है.
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अमेरिका ने क्यों बनाया तेल रिज़र्व
इन तेल भंडारों को बनाने के तार साल 1973 में हुए योम किपुर युद्ध से जुड़े हैं जिसमें पश्चिमी देशों ने इसराइल का समर्थन किया था.
इससे नाराज़ होकर अरब देशों ने तेल देने से मना कर दिया था जिससे एक आर्थिक संकट पैदा हुआ.
अरब देशों के इस फ़ैसले की वजह से तेल की आपूर्ति में भारी कमी आई और साल 1974 आते-आते कच्चे तेल के दाम में चौगुनी बढ़त देखी गयी.
अमेरिका को इस संकट की वजह से तेल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा.
अमेरिकी लोगों को अपनी गाड़ियों में तेल भरवाने के लिए लाइनों में खड़ा होना पड़ता था. हालात कुछ ऐसे थे कि लोगों को अपना पेट्रोल चोरी होने का डर सताने लगा जिसे बचाने के लिए लोग बंदूकें लेकर चलने लगे.
इस दौर में अमेरिका का औद्योगिक ढांचा सस्ते तेल पर निर्भर था और इस संकट के चलते वह चलन से बाहर जाने की हालत में पहुंच गया.
इस तरह साल 1975 में अमेरिका को तेल बाज़ार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए रणनीतिक तेल भंडार बनाना पड़ा जिससे भविष्य में इस तरह की स्थितियों से अमेरिकी हितों की रक्षा की जा सके.
और साल 1991 के खाड़ी युद्ध और 2005 में कैटरीना तूफ़ान के दौरान अमेरिकी ऊर्जा ढांचे पर असर पड़ा. लेकिन इस रणनीतिक तेल भंडार ने अमेरिका को होने वाली तेल की आपूर्ति में हुई कमी को पूरा कर दिया.
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