वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की: यूक्रेन के राष्ट्रपति रूस से युद्ध में कैसे बने प्रतिरोध की आवाज़?

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की जब तीन साल पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति चुने गए थे तब वो एक कॉमेडियन थे और उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं था. अब रूस से युद्ध के दौरान वो एक विश्व नेता के रूप में उभरे हैं. जो युद्ध में अपने देश का नेतृत्व कर रहे हैं.

उनके भाषण चर्चा में हैं. वो सेल्फी वीडियो जारी कर रहे हैं. पूरा देश उनके पीछे खड़ा हो रहा है. रूस के आक्रमण के ख़िलाफ़ वो यूक्रेन के प्रतिरोध और ग़ुस्से की आवाज़ बन गए हैं.

एक तरफ़ जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आपा खोते हुए यूक्रेन सरकार को नव-नाज़ी बता रहे हैं और उस पर लुहांस्क और दोनेत्स्क क्षेत्र में नरसंहार करने के आरोप लगा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ़ ज़ेलेंस्की ने सम्मानजनक तरीक़े से अपना पक्ष रखा है. वो दृढ़ निश्चयी और मुखर बने हुए हैं.

इन बयानों ने ज़ेलेंस्की के एक ऐसे पक्ष को उजागर किया है जिसे उनके आलोचक और विश्लेषक नहीं देख पाए थे.

यूक्रेन में ज़ेलेंस्की की लोकप्रियता गिर रही थी और उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा था जिसमें बहुत ग़हराई नहीं थी. लेकिन गुरुवार सुबह के बाद से उनकी छवि बदल गई है. रूस ने गुरुवार को ही यूक्रेन पर आक्रामण किया.

'हमला होगा तो पीठ नहीं दिखाएंगे'

सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, जिसमें वो रूसी भाषा में बोल रहे हैं, ज़ेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को फ़ोन करने की कोशिश की लेकिन उन्हें सिर्फ़ सन्नाटा ही सुनाई दिया.

ज़ेलेंस्की ने कहा, "दोनों देशों को युद्ध की ज़रूरत नहीं है. ना ही शीत युद्ध की और ना ही गरम युद्ध की और ना ही किसी तरह के हाईब्रिड युद्ध की."

यूक्रेन के नक़्शे के आगे गहरे रंग का सूट पहने हुए खड़े होकर बोलते हुए ज़ेलेंस्की ने कहा, "अगर यूक्रेन के लोगों पर हमला होगा तो वो अपनी रक्षा करेंगे. जब तुम हम पर हमला करोगो तो हमारे चेहरों का सामना करोगे, तुम्हें हमारी पीठ नहीं दिखाई देगी."

इसके कुछ देर बाद ही यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू हो गया. हमले के बाद ज़ेलेंस्की ने सैन्य पोशाक पहनकर अपना संबोधन किया. एक तरह से वो ताक़तवर के सामने कमज़ोर के संघर्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

गुरुवार की शाम ज़ेलेंस्की ने एक और संदेश जारी करते हुए पश्चिमी नेताओं को चेताते हुए कहा कि अगर वो आज यूक्रेन की मदद नहीं करेंगे तो कल उन्हें कुछ करने का मौका नहीं मिलेगा.

ज़ेलेंस्की ने कहा, "ये युद्ध तुम्हारे दरवाज़े तक भी पहुंच जाएगा."

"ये एक नई लौह दीवार की आवाज़ है, जो टूट गई थी, जो रूस को सभ्य समाज से अलग-थलग कर रही है."

यूक्रेन में सोशल मीडिया पर भी ज़ेलेंस्की एक राष्ट्र नेता के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं और हर वर्ग तक पहुंच रहे हैं.

नोवोये रेम्या न्यूज़ वेबसाइट की संपादक यूलिया मैकगाफी कहती हैं कि जब अप्रैल 2019 में ज़ेलेंस्की यूक्रेन के राष्ट्रपति चुने गए थे तो वो उनसे ख़ुश नहीं थीं क्योंकि उन्हें सरकार चलाने की उनकी योग्यता में यक़ीन नहीं था.

लेकिन वो कहती हैं कि पिछले एक सप्ताह में यूक्रेन के लोग अपने राष्ट्रपति के पीछे खड़े हुए हैं.

वो कहती हैं, "उन्हें पूरा समर्थन और सम्मान तब मिला जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रामण कर दिया. यूक्रेन के सभी लोग अब ज़ेलेंस्की के साथ खड़े हैं. वो देश के लोगों को एकजुट कर रहे हैं और मैं ये कहूंगी कि प्रेरित भी कर रहे हैं. वो ऐसी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं जो पुतिन की सेना से टक्कर ले रही है. इसके लिए देश के लोग उनका दिल से सम्मान कर रहे हैं और उनकी तारीफ़ कर रहे हैं."

ज़ेलेंस्की कैसे बने राष्ट्रपति?

जब वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की पहली बार यूक्रेन के राष्ट्रपति के तौर पर टीवी स्क्रीन पर दिखे, तब वो एक चर्चित कॉमेडी सिरीज़ में किरदार निभा रहे थे.

'सर्वेंट ऑफ़ द पीपुल' सिरीज़ में उन्होंने इतिहास के एक शिक्षक की भूमिका निभाई थी जो क़िस्मत से देश का राष्ट्रपति बन जाता है. उस विनम्र शिक्षक का भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ दिए गए भाषण का वीडियो छात्र ने ऑनलाइन पोस्ट किया और वो वायरल हो गया.

लेकिन फिर जीवन ने कला की नकल की और वो अप्रैल 2019 में वास्तव में यूक्रेन के राष्ट्रपति बन गए. अब वो साढ़े चार करोड़ की आबादी वाले यूक्रेन के नेता हैं और रूस के आक्रमण का सामना कर रहे हैं.

2019 में जब उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पेश की तो बहुत से लोगों ने इसे भी एक मज़ाक ही समझा लेकिन वो 73 फ़ीसदी वोट लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति बने.

ये एक ऐसी दिलचस्प कथा थी जिसने राजनीति से निराश यूक्रेन के लोगों में नई उम्मीद पैदा की थी.

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की पूर्व में शांति और साफ़ राजनीति के वादे के साथ राजनीति में आए और अपनी पार्टी का नाम 'सर्वेंट ऑफ़ द पीपुल्स' रखा.

यूक्रेन के राष्ट्रपति के पास काफ़ी शक्तियां होती हैं लेकिन ज़ेलेंस्की के लिए वादे पूरे करना आसान नहीं था. संचार सलाहकार यारीना क्लियुचकोव्स्का कहती हैं कि एक राष्ट्रपति जो इतनी लोकप्रियता के साथ करियर शुरू कर रहा था उसके लिए एक ही रास्ता था- नीचे की तरफ जाना.

वो कहती हैं, "इतने बड़े वादे करना एक बात है और उन्हें नीतियों में लेकर आना बिलकुल अलग बात."

राजनीति में आने से पहले का जीवन

1978 में पूर्वी यूक्रेन के केंद्रीय शहर क्रीवयी री शहर में पैदा हुए.

कीव नेशनल इकोनॉमिक यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली

एक कामयाब टीवी प्रोडक्शन कंपनी की सह-स्थापना की.

विवादित अरबपति इहोर कोलोमोस्की के टीवी नेटवर्क के लिए कार्यक्रम बनाए.

कोलोमोस्की ने बाद में उनकी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी का समर्थन किया.

2010 के दशक तक उनका ध्यान टीवी और फ़िल्मों में ही करियर बनाने पर था

ज़ेलेंस्की को अरबपति कारोबारी इहोर कोलोमोइस्की का समर्थन प्राप्त था और बहुत से लोगों को लगता था कि राष्ट्रपति बनने के बाद वो उनके हाथ की कठपुतली बन जाएंगे और ऐसे व्यक्ति से नियंत्रित होंगे जिसकी अमेरिका में धोखाधड़ी और अवैध लेनदेन को लेकर जांच चल रही है.

लेकिन जैसी आलोचका ने आशंका ज़ाहिर की थी वो उससे कहीं अधिक स्वतंत्र साबित हुए. उन्होंने प्राइवाटबैंक के फिर से निजीकरण की मांग को ठुकरा दिया. राष्ट्रीयकरण से पहले ये बैंक कोलोमोइस्की की ही थी.

निशाने पर अमीर

हालांकि यूक्रेन में भ्रष्टाचार जारी रहा. जेलेंस्की ने रइसों के प्रभाव को कम करने के लिए प्रयास ज़रूर किए हैं.

उनकी सरकार ने देश के सबसे बड़े अमीरों को निशाना बनाया है. इनमें रूस समर्थक विपक्षी नेता विक्टर मेदवेदचुक भी शामिल हैं जिन्हें नज़रबंद कर लिया गया था. मेदवेदचुक पर राजद्रोह का आरोप भी लगाया गया था जिसे उन्होंने राजनीतिक साज़िश क़रार दिया था. कुछ पश्चिमी अधिकारी भी इस क़दम को राजनीति से प्रेरित ही मानते हैं.

इसके बाद ज़ेलेंस्की एक क़ानून लेकर आए जिसमें रईसों को परिभाषित किया गया और उनके राजनीतिक दलों को चंदा देने पर रोक लगा दी गई.

हालांकि, कुछ आलोचकों ने उनके भ्रष्टाचार विरोधी क़दमों को कॉस्मेटिक बताते हुए उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को रिझाने की कोशिश बताया.

गृह युद्ध को ख़त्म करने की कोशिश

राष्ट्रपति बनने के बाद ज़ेलेंस्की ने 2014 से देश के पूर्व में जारी गृहयुद्ध को समाप्त करने का वादा पूरा करने की कोशिश की.

इस युद्ध में 14 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

शुरुआत में उन्होंने समझौता करने का प्रयास किया. उन्होंने रूस से वार्ता की और क़ैदियों की अदला-बदली की. उन्होंने शांति समझौते की प्रक्रिया को लागू करने के लिए प्रयास भी किए. इसे मिंस्क समझौता भी कहा जाता है. हालांकि, ये कभी भी पूरी तरह से लागू नहीं हो सके.

बाद में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में अलगाववादियों के नियंत्रण वाले इलाक़े में रह रहे लोगों को रूस का पासपोर्ट देने की घोषणा की. इससे यूक्रेन और रूस के रिश्तों में और भी कड़वाहट आ गई.

जुलाई 2020 में एक संघर्ष विराम ज़रूर लागू हुआ, लेकिन छुट-पुट झड़पें जारी रहीं. 2020 में ज़ेलेंस्की की रेटिंग भी तेज़ी से गिरी.

वहीं, ज़ेलेंस्की ने और मज़बूती से यूक्रेन के यूरोपीय संघ और सैन्य गठबंधन नेटो की सदस्यता हासिल करने की बात कहनी शुरू कर दी. इससे रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन नाराज़ हो गए.

कई बार ज़ेलेंस्की अपनी बात को मज़बूती से कहने में संघर्ष करते भी नज़र आए. उनके आलोचकों ने अनुभवहीनता को इसकी वजह बताया.

यारीना क्लियुचकोव्स्का कहती हैं कि पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष पर ज़ेलेंस्की की बयानबाज़ी औरर रूस के साथ रिश्तों को लेकर यूक्रेन के लोग उन्हें हाल के महीनों तक डरपोक मानते रहे थे.

जब युद्ध नज़दीक दिखा...

जब युद्ध नज़दीक नज़र आने लगा तो उन्होंने शांति दिवस मनाने की घोषणा की और कूटनीति के ज़रिए संकट के समाधान की उम्मीद ज़ाहिर करते रहे. हालांकि दूसरी तरफ़ संघर्ष क्षेत्र में संघर्ष-विराम के उल्लंघन की घटनाएं बढ़ रहीं थीं.

क्लियुचकोव्स्का कहती हैं, "वो युद्ध के विषय पर बात करने से बच रहे थे, सेना से जुड़ी कोई बात नहीं कर रहे थे. ये एक ऐसा विषय था जिसे लेकर वो बहुत सहज नहीं थे. वो इस पर सार्वजनिक तौर पर बयान देने से बचते नज़र आ रहे थे."

पश्चिमी देशों और अमेरिका की सरकारें जब रोज़ाना यूक्रेन पर आक्रामण को लेकर चेतावनियां जारी कर रहीं थीं तब वो इसे लेकर भी सहज नहीं थे. उन्होंने कहा था कि अमेरिका के बयान यूक्रेन को बहुत महंगे पड़ सकते हैं.

क्लियुचकोव्स्का कहती हैं कि ज़ेलेंस्की के प्रति लोगों के नज़रिए में बदलाव 19 फ़रवरी को आया जब उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भाषण दिया. वो कहती हैं कि इसके बाद वो भी उनकी आलोचक से प्रशंसक में बदल गईं.

अपने भाषण की शुरुआत ज़ेलेंस्की ने पूर्वी यूक्रेन में बच्चों के स्कूल की अपनी यात्रा से शुरू की. इस किंडरगार्टन पर मिसाइल हमला हुआ था.

ज़ेलेंस्की ने अपने भाषण में कहा था, "जब स्कूल के मैदान में बम से गड्ढा बन जाता है तो बच्चे सवाल करते हैं कि क्या दुनिया बीसवीं शताब्दी की ग़लतियों के सबक भूल गई है."

पश्चिमी देशों के सुरक्षा और कूटनीति जगत की शीर्ष हस्तियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "अनभिज्ञता आपको भी साज़िश का हिस्सा बना देती है."

इसी सम्मेलन में पंद्रह साल पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि वो अमेरिका के नेतृत्व वाली दुनिया को स्वीकार नहीं करते हैं.

इसकी याद दिलाते हुए ज़ेलेंस्की ने कहा, "आप कैसे प्रतिक्रिया देंगे? क्या आप रिझाने की कोशिश करेंगे."

क्लियुचकोव्स्का कहती हैं कि ज़ेलेस्की से पहले किसी भी यूक्रेनी नेता ने पश्चिमी देशों से इस मुखरता और बेबाकी से बात नहीं की थी.

वहीं यूलिया मैकगूफी कहते हैं कि उनके लिए भी ज़ेलेंस्की पर गर्व करने का पल तब आया जब उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अपनी बात रखी.

वो कहती हैं, "ये वो पल था जब ज़ेलेंस्की के बहुत से राजनीतिक प्रतिद्वंदी उनके समर्थक बन गए. उन्होंने तय कर लिया कि यूक्रेन में ये समय आपस में लड़ने का नहीं है."

पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों के मुताबिक रूस का पहला मक़सद ज़ेलेंस्की को पकड़ना या मारना है. ज़ेलेंस्की कहते हैं कि इस सूची में दूसरे नंबर पर उनका परिवार है.

ज़ेलेंस्की ज़ोर देकर कहते हैं कि वो और उनका परिवार यूक्रेन में ही रहेगा.

यूक्रेन में जोश भरते 44 साल के राष्ट्रपति

वो यूक्रेन की राजधानी में सेल्फी वीडियो बनाकर देश में अपनी मौजूदगी की पुष्टि कर रहे हैं.

ज़ेलेंस्की का जन्म यूक्रेन के एक यहूदी परिवार में हुआ है.

ऐेसे ही एक वीडियो पर ट्वीट करते हुए ब्रितानी लेखक बेन जुडाह लिखते हैं, "अगर आप रूस के साम्राज्य में रह रहे हमारे किसी दादा-परदादा से ये कहते कि एक दिन ऐसा आएगा जब एक यहूदी रूस के ख़िलाफ युद्ध में यूक्रेन का नेतृत्व करेगा तो वो हैरानी से पलकें झपका रहे होते."

क्लियुचकोव्स्का कहती हैं, "ज़ाहिर है वो एक कलाकार हैं. मैं नहीं जानती कि ये उनका वास्तविक चरित्र है या नहीं. लेकिन जो कुछ भी वो कर रहे हैं, वो काम कर रहा है."

"उनका भाषण लिखने वाले शानदार काम कर रहे हैं. वो मनोरंजन के क्षेत्र से आते हैं लेकिन नेटफ्लिक्स का शो लिखना राष्ट्रपति के भाषण लिखने से बिलकुल अलग है."

उनके के सामने विकट चुनौतियां हैं. रूस की आक्रमणकारी सेना विशाल है और बहुत मज़बूत है.

लेकिन 44 साल के कानून डिग्रीधारी और राजनीति में नवजात ज़ेलेंस्की को एक आवाज़ मिल गई है जो यूक्रेन के लोगों में जोश भर रही है.

मैकगूफी कहती हैं, "मेरे एक अच्छी दोस्त ने लिखा है ज़ेलेंस्की ने विशाल व्यक्तित्व हासिल कर लिया है और ये इस वक्त उनके एटीट्यूड में दिख रहा है."

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