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भारत-चीन सीमा विवाद: अरुणाचल प्रदेश से 'अपहृत किशोर' का पता लगाने में जुटी भारतीय सेना
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश से सटी भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा से लापता हुए 17 साल के एक किशोर को तलाशने के लिए अपनी कोशिशें तेज़ कर दी हैं.
असम के तेजपुर में मौजूद सेना के एक जन संपर्क अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया, "अरुणाचल प्रदेश के 17 वर्षीय युवक मिराम तारोम को कथित तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएससी) के पार पीएलए ने पकड़ लिया था. सूचना मिलने पर भारतीय सेना ने हॉटलाइन के माध्यम से पीएलए से तुरंत संपर्क किया. प्रोटोकॉल के अनुसार उसका पता लगाने और उसे वापस करने के लिए पीएलए से सहायता मांगी गई है."
दरअसल इससे पहले अरुणाचल प्रदेश से बीजेपी के सांसद तापिर गाओ ने चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी अर्थात पीएलए पर भारत के अरुणाचल प्रदेश में घुसकर इस भारतीय युवक के अपहरण का आरोप लगाया था.
बीजेपी सांसद ने इस घटना के संदर्भ में 19 जनवरी को एक ट्वीट भी किया था.
मिराम तारोम अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग ज़िले के जिदो गांव के निवासी हैं और वो बीते मंगलवार अपने एक दोस्त के साथ चीन की सीमा से लगे इलाके में शिकार के लिए गए थे.
घटना की जानकारी
अपर सियांग के ज़िला उपायुक्त शाश्वत सौरभ ने इस घटना की जानकारी देते हुए बीबीसी से कहा, "ये घटना 18 जनवरी की शाम की है लेकिन ये काफी मुश्किल इलाका है. इसलिए हमें घटना की पूरी जानकारी अपहृत किशोर के उस दोस्त से मिली जो भागकर वापस आ गया था. हमें इस पूरी घटना की जानकारी कल शाम को मिली है. भारतीय सेना लापता हुए लड़के को वापस लाने के काम में जुटी है. जिला प्रशासन की तरफ से भी सभी तरह के प्रयास किए जा रहें है."
एक सवाल के जवाब देते हुए जिला उपायुक्त ने कहा, "ये लोग सीमावर्ती गांव में रहते है और आदिवासी समुदाय से है. आम तौर पर यहां के लोग शिकार करने जाते हैं. इसी दौरान यह घटना हो गई."
इससे पहले सितंबर 2020 में भी पीएलए ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से पांच युवकों का अपहरण कर लिया था.
लेकिन भारतीय सेना के हस्तक्षेप के बाद पीएलए ने करीब एक सप्ताह के बाद सभी युवकों को रिहा कर दिया था.
ऐसे ही एक सवाल का जवाब देते हुए शाश्वत सौरभ ने कहा, "मैंने पिछले हफ़्ते ही ज़िला उपायुक्त की जिम्मेदारी संभाली है. मुझे भी मीडिया के जरिए ही पीएलए द्वारा पहले भी अरुणाचल के लड़कों को उठाने जैसी बात का पता चला है. हम पिछला रिकॉर्ड देख रहें है लेकिन हाल के दिनों में खासकर इस ज़िले में ऐसी कोई घटना देखने को नहीं मिली है. मैं और भी डिटेल जानकारी ले रहा हूं."
जानकार बताते हैं कि चीन की सीमा से सटे कई गांवों के लोग भारतीय सेना के साथ बतौर पोर्टर काम करते हैं. सेना के जवान सीमा पर गश्त के लिए निकलते हैं तो कई दफा स्थानीय ग्रामीण लोगों को साथ लेकर जाते हैं. चीन से सटे कई ऐसे इलाके हैं जहां कई बार चीनी और भारतीय सेना का आमना-सामना हुआ है. लिहाजा पीएलए द्वारा यहां के स्थानीय युवाओं के अपहरण करने के पीछे कुछ भी मकसद हो सकता है.
इसके अलावा टैगिन आदिवासी समुदाय के काफी लोग सीमा के उस तरफ़ चीन में रहते हैं और उनके रिश्तेदार भारत में बसे हैं.
कुछ सालों पहले तक दोनों तरफ के लोगों का आना-जाना होता था लेकिन जब से सीमा पर चीन के साथ तनाव बढ़ा है, सबकुछ बंद कर दिया गया है.
भारत लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक चीन के साथ 3,400 किलोमीटर लंबी वास्तविक एलएसी साझा करता है.
हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच खासकर एलएसी पर जारी सीमा विवाद को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है.
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