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अफ़ग़ानिस्तानः तालिबान के काबुल पर क़ब्ज़े के समय एयरपोर्ट पर छूटा बच्चा, महीनों बाद ऐसे मिला
अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल अगस्त में मचे कोलाहल के बीच बहुत सारे लोग देश छोड़कर जा रहे थे. तालिबान काबुल पहुँच चुका था, लोग बदहवास काबुल हवाई अड्डे की तरफ़ भाग रहे थे, जहाँ अफ़रातफ़री मची थी. इसी भीड़ में एक दुधमुँहा बच्चा बिछुड़ गया, ये कहानी उसी बच्चे की है.
वो 19 अगस्त का दिन था, काबुल के हामिद करज़ई एयरपोर्ट पर तिल रखने की भी जगह नहीं थी, हज़ारों लोग जमा हो गए थे.
अमेरिका और दूसरे देशों के विमान लोगों को बाहर निकाल रहे थे, ख़ास कर ऐसे लोगों को जो पिछली सरकारों के लिए काम करते थे और जिन्हें अब तालिबान हुक़ूमत में ख़तरा हो सकता था.
भीड़ में अपने परिवार के साथ मिर्ज़ा अली अहमदी भी शामिल थे जो अमेरिकी दूतावास में सुरक्षा गार्ड का काम करते थे. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सबसे पहले उनकी कहानी नवंबर में छापी थी.
इसमें मिर्ज़ा ने बताया कि वो अपनी पत्नी सुरैया और पाँच बच्चों को लिए एयरपोर्ट के भीतर जाने की कोशिश कर रहे थे, दो माह का बच्चा सोहेल गोद में था.
एक-दूसरे से टकराते लोगों के बीच कहीं वो पिस ना जाए, ये सोच उसके मां-बाप ने उसे बाड़ के दूसरी ओर खड़े एक वर्दीधारी सैनिक को थमा दिया जो उन्हें लगा कि अमेरिकी सैनिक है.
उन्हें लगा कि बस 15 फ़ीट का फ़ासला बचा है जब वो एयरपोर्ट के भीतर दाख़िल हो जाएँगे और बच्चा मिल जाएगा.
मगर तभी तालिबान के सैनिकों ने भीड़ को पीछे खदेड़ दिया. मिर्ज़ा और उनके परिवार को लौटते आधा घंटा हो गया.
वो एयरपोर्ट के भीतर गए पर ना तो वो सैनिक दिखा ना कहीं उनका बच्चा.
बदहवास परिवार ने उसे हर ओर खोजा, कुछ अधिकारियों ने कहा कि हो सकता है वो विमान में ले जाया गया हो, तो आप भी निकल जाएँ, बाद में आप साथ हो जाएँगे.
और आख़िर में मिर्ज़ा और उनका परिवार अमेरिका जाने वाले विमान पर सवार हो गए और अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक सैन्य ठिकाने पहुँच गए.
महीनों तक उन्हें कुछ पता नहीं चला कि सोहेल का क्या हुआ.
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कैसे मिला सोहेल?
चार महीने बाद, नवंबर में समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ये ख़बर छापी जिसके बाद खोज-बीन हुई और आख़िर में पता चला कि सोहेल एक टैक्सी ड्राइवर हामिद सैफ़ी के घर पर है.
29 वर्षीय हामिद ने रॉयटर्स को बताया कि उन्हें सोहेल एयरपोर्ट पर मिला. वो ज़मीन पर पड़ा था, रो रहा था.
हामिद ने उसके घरवालों को खोजने की कोशिश की, पर जब कुछ पता नहीं चला तो उन्होंने उसे अपने घर ले जाने का फ़ैसला किया और तय किया कि वो और उनकी पत्नी उसे अपने बच्चों की तरह बड़ा करेंगे.
उन्होंने बच्चे का नाम रखा - मोहम्मद आबिद. और अपने दूसरे बच्चों के साथ उसकी भी तस्वीर अपने फ़ेसबुक पन्ने पर लगाई.
चार महीने बाद सोहेल का पता चला और उसके नाना मोहम्मद क़ासिम रज़ावी उसे लेने निकले. वो काबुल से बहुत दूर पूर्वोत्तर अफ़ग़ानिस्तान के सूबे बदख़्शां में रहते हैं.
लेकिन, लंबे सफ़र के बाद जब वो हामिद के पास पहुँचे, तो उन्होंने सोहेल को वापस करने से इनकार कर दिया. रॉयटर्स के अनुसार हामिद ने शर्त रख दी कि उन्हें और उनके परिवार को भी अमेरिका ले जाया जाए.
बात इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक हामिद सैफ़ी को हिरासत में भी लेना पड़ा.
आख़िरकार तालिबान पुलिस ने कई हफ़्तों तक चली बातचीत के बाद दोनों परिवारों में सुलह करवाई और सोहेल को उसके नाना को सौंप दिया गया.
सोहेल के माँ-बाप अमेरिका में ही हैं, उन्होंने अपने छोटे बेटे को वीडियो चैट पर देखा.
मोहम्मद क़ासिम रज़ावी ने बताया, "हम जश्न मनाने लगे, गाने लगे, नाचने लगे, ऐसा लगा जैसे कोई शादी हो."
अब सोहेल के घरवारों को उम्मीद है कि जल्दी ही उसे अमेरिका के मिशिगन में लाए जाने का इंतज़ाम हो पाएगा, जो अब उनका नया पता है.
हालाँकि, अफ़ग़ानिस्तान में अभी तक सब अनिश्चित है. वहाँ अमेरिका का कोई दूतावास नहीं और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर भी काफ़ी दबाव है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा, "हम कोशिश कर रहे हैं कि कैसे इस परिवार को फिर से एक किया जाए."
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