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इसराइल में रा'म पार्टी के मंसूर अब्बास का हलचल मचाने वाला बयान
इसराइल में रा'म (यूनाइटेड अरब लिस्ट) पार्टी के नेता मंसूर अब्बास का एक बयान काफ़ी सुर्खियों में है. मंसूर अब्बास बड़ी अरब पार्टी के पहले प्रमुख हैं जो इसराइल की गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं.
उन्होंने मंगलवार को कहा था कि इसराइल एक यहूदी राष्ट्र है और इसे बदला नहीं जा सकता. अब्बास की यह टिप्पणी इसराइल के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बारों 'यरुशलम पोस्ट' से लेकर 'टाइम्स ऑफ़ इसराइल' में प्रमुखता से छपी है.
टाइम्स ऑफ़ इसराइल के अनुसार, अब्बास ने अरब समुदाय को सलाह दी है कि उन्हें व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए न कि इसराइल की पहचान को चुनौती देने की कोशिश करनी चाहिए.
मंसूर अब्बास ने यह टिप्पणी तेल अवीव में ग्लोब्स न्यूज़ मैगज़ीन की एक कॉन्फ़्रेंस में कही है. अब्बास की छवि रही है कि वो सरकार के साथ रहकर अपने लोगों के लिए काम करते हैं. अब्बास की इस रणनीति की आलोचना होती है कि वो फ़लस्तीनियों के हक़ों को दांव पर लगा रहे हैं.
मंगलवार को इस्लामिक रा'म पार्टी के अध्यक्ष अब्बास ने कहा था, ''इसराइल का जन्म एक यहूदी राष्ट्र के रूप में हुआ था. यहूदियों ने ही यहूदी राष्ट्र बनाने का फ़ैसला लिया था. इसके बाद यह सवाल नहीं बचता है कि राष्ट्र की पहचान क्या है? जिस रूप में इसराइल का जन्म हुआ, उसी रूप में रहेगा.''
बयान से हैरानी
यरुशलम पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मंसूर अब्बास की यह टिप्पणी ऐतिहासिक है जो कि अरब पार्टियों के रुख़ से बिल्कुल अलग है. पहले अरब पार्टियों का कहना था कि इसराइल सभी नागरिकों के लिए होना चाहिए न कि केवल यहूदियों के लिए. अरब पार्टियां 'लॉ ऑफ़ रिटर्न' में बदलाव करने का समर्थन करती रही हैं ताकि वे इसराइल में बस सकें और उनका भी बहुमत हो.
अब्बास ने ऐसा ही बयान पिछले महीने अरबी में कुल अल-अरब मीडिया को दिया था. जॉइंट लिस्ट एमके और बलाद पार्टी के नेता सामी अबोउ शेहादेह ने अब्बास पर आरोप लगाया है कि उनका व्यक्तित्व विभाजित है. सामी ने कहा कि अब्बास हिब्रू और अरबी में विरोधाभासी बयान देते हैं. सामी ने यरुशलम पोस्ट से कहा कि इसराइल जब तक सभी नागरिकों के लिए समान नहीं होगा तब तक इंसाफ़ की उम्मीद नहीं की जा सकती है.
अरब इसराइली दशकों से यहूदी राष्ट्र के भीतर एक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसराइल में अरबों की पहचान कई तरह से होती है. कुछ को फ़लस्तीनी कहा जाता है, कुछ को अरब इसराइली और बाक़ियों को केवल अरब कहा जाता है. अब्बास ने दर्शकों से कहा कि उन्होंने 2017 में यहूदी पहचान वाले नेशन-स्टेट लॉ का विरोध किया था लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में ज़्यादा ख़ुशफ़हमी में नहीं रहना चाहिए.
अब्बास ने कहा, ''यह हक़ीक़त है. सवाल राष्ट्र की पहचान का नहीं है. सवाल यह है कि इसराइल के भीतर अरब नागरिकों को क्या दर्जा मिलता है.''
अब्बास का स्पष्ट रुख़
दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इसराइल की गठबंधन सरकार में अरब इसराइली पार्टी के रूप में अब्बास की रा'म पार्टी शामिल हुई. जून में नेफ़्टाली बेनेट की सरकार में शामिल होने के बाद से अब्बास अरब नागरिकों के हितों को लेकर मुखर रहे हैं.
मार्च में चुनावी कैंपेन में अब्बास ने वादा किया था कि उनकी पार्टी अरब समुदाय के नागरिकों की समस्या का ध्यान हर दिन रखेगी. उन्होंने अरब समुदाय के प्रति बढ़ते अपराध और घरों की कमी को निपटाने का भी वादा किया था. अब्बास के आलोचकों का कहना है कि फ़लस्तीनी पहचान को तिलांजलि देने से अरब इसराइली नागरिकों के हित पूरे नहीं होंगे.
टाइम्स ऑफ़ इसराइल के अनुसार, इसराइली संसद क्नेसेट में जॉइंट लिस्ट पार्टी के राष्ट्रवादी बलाद धड़े के नेता एमके सामी अबोउ शेहादेह ने अब्बास की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''एक यहूदी राष्ट्र के रूप में इसराइल में फ़लस्तीनी अल्पसंख्यकों के दर्जे का सवाल सबसे अहम है.'' वहीं जॉइंट लिस्ट के नेता अयमान ओदेह ने अब्बास की आलोचना करते हुए कहा, ''हम कोई विषय नहीं हैं. हमारी ये जन्मभूमि है. नागरिकता हमारा अधिकार है और हम समानता के साथ लोकतंत्र के लिए काम करते रहेंगे.''
अब्बास ने पिछले महीने नवंबर में अरबी भाषा के मीडिया आउटलेट कुल अल-अरब को दिए इंटरव्यू में कहा था, ''इसराइल एक यहूदी राष्ट्र है. यही इसकी पहचान और सार है. अगर यहूदी पहचान को हटा दिया जाए तो यह राष्ट्र भी नष्ट हो जाएगा. आप चाहे स्वीकार करें या ना करें, ये आपका निजी मामला है. ज़रूरी सवाल यह है कि इसराइल के भीतर अरब समुदाय के लोगों का दर्जा क्या है.''
अब्बास ने इस इंटरव्यू में कहा था, ''मैं ख़ुद को इसराइल का पूरा नागरिक समझता हूँ और पूरा अधिकार चाहता हूँ. मेरे अधिकार महज़ नागरिकता से नहीं आते हैं. मेरे अधिकार फ़लस्तीनी होने से भी आते हैं. फ़लस्तीनी जन्मभूमि के नाते भी.''
मंसूर अब्बास की शख़्सियत
यूनाइटेड अरब लिस्ट या रा'म पार्टी के प्रमुख डॉक्टर मंसूर अब्बास पेशे से दंत चिकित्सक हैं. 47 वर्षीय अब्बास का जन्म इसराइल के उत्तरी हिस्से में हुआ था.
वो युवावस्था से ही राजनीति में सक्रिय हैं और हिब्रू विश्वविद्यालय में अरब छात्र समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं. वर्तमान में अब्बास हाइफ़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री के लिए अध्ययनरत भी हैं.
डॉक्टर अब्बास इस्लामी आंदोलन की दक्षिणी शाखा के उपाध्यक्ष भी हैं. हालांकि वो इसराइल के उत्तरी इलाक़े के रहने वाले हैं मगर दक्षिणी इलाक़ों में उनका अच्छा बोलबाला है.
उन्हें इसराइल के दक्षिणी इलाक़ों में ख़ासा समर्थन मिला जिसके बदौलत उनकी पार्टी सारी अटकलों को झुठलाते हुए संसद में स्थान बना पाई. इसराइली चुनावी नियमों के मुताबिक़ किसी भी पार्टी को संसद में शामिल होने के लिए न्यूनतम 3.25 प्रतिशत वोट पाना होता है.
किसी समय इस नियम को बनाए जाने की वजह अरब पार्टियों को संसद से दूर करना था मगर इसकी वजह से उनमें एकता हुई और पिछले कुछ चुनावों में सभी अरब पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा है.
हालाँकि अब्बास का बाक़ी अरब पार्टियों से सैद्धांतिक मतभेद नज़र आया और उन्होंने उनका साथ छोड़ने का फ़ैसला किया. इस फ़ैसले को कई लोगों ने आत्मघाती बताया और शुरुआती दौर में ऐसा लगा कि वो न्यूनतम वोट प्रतिशत की कसौटी पर भी सफल नहीं हो सकेंगे.
(कॉपी - रजनीश कुमार)
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