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बाइडन से शी जिनपिंग ने कहा- ताइवान में आज़ादी का समर्थन आग से खेलने की तरह
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आमने-सामने की वर्चुअल बैठक ख़त्म हो गई है.
राष्ट्रपति बाइडन ने शी जिनपिंग से कहा कि ताइवान की स्थिति में किसी भी तरह के एकतरफ़ा बदलाव का अमेरिका मज़बूती से विरोध करता है.
दोनों नेताओं के बीच शिंजियांग और हॉन्ग कॉन्ग को लेकर भी बात हुई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, शी जिनपिंग ने चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति बाइडन से कहा कि ताइवान में आज़ादी का समर्थन करना आग से खेलने की तरह है और जो आग से खेलेगा वो जल जाएगा.
बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने प्रेस रिलीज जारी किया और कहा कि अमेरिका वन चाइना पॉलिसी को लेकर प्रतिबद्ध है. वन चाइना पॉलिसी को मानने वाले देश इसे स्वीकार करते हैं कि ताइवान चीन का हिस्सा है. पिछले महीने बाइडन ने कहा था कि चीन अगर ताइवान पर हमला करेगा तो अमेरिका ताइवान का बचाव करेगा.
दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ताइवान, व्यापार और मानवाधिकारों के मुद्दों पर जारी तनाव की बीच हुई है. शी जिनपिंग से राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि दोनों देशों की यह ज़िम्मेदारी है कि अपनी प्रतिद्वंद्विता को टकराव की ओर नहीं जाने दें. जनवरी में अमेरिकी सत्ता संभालने के बाद बाइडन और शी जिनपिंग की इस वार्ता को काफ़ी ठोस बताया जा रहा है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि दोनों नेताओं की वार्ता काफ़ी रचनात्मक और लाभकारी रही. उन्होंने कहा कि इससे आपसी समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी.
दोनों नेताओं की बैठक की शुरुआत अभिवादन के साथ हुई. शी जिनपिंग ने कहा कि वो अपने 'पुराने दोस्त' बाइडन को देखकर ख़ुश हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बाइडन ने कहा, ''मुझे लगता है कि वार्ता की शुरुआत औपचारिक रूप से होनी चाहिए लेकिन हम दोनों एक-दूसरे को लेकर कभी औपचारिक रहे नहीं हैं.''
बाइडन ने कहा, ''हम दोनों हमेशा संपर्क में रहे हैं और एक दूसरे के प्रति ईमानदार और स्पष्ट रहे हैं. हमने इसका कभी ध्यान नहीं दिया कि हम एक दूसरे के बारे में क्या सोचते हैं.''
वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि कोविड महामारी और जलवायु परिवर्तन के संकट के दौर में दोनों देशों का साथ रहना बहुत ज़रूरी है. शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच संवाद को और दुरुस्त करने पर ज़ोर दिया. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि वो राष्ट्रपति बाइडन के साथ काम करने के लिए तैयार हैं.
इस बातचीत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन अमेरिका के साथ संबंधों को सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए तैयार है. दोनों नेताओं ने उन क्षेत्रों को रेखांकित किया, जिन पर दोनों देशों को बातचीत की ज़रूरत है.
बाइडन ने वार्ता में मानवाधिकारों और इंडो-पैसिफ़िक का मुद्दा भी उठाया. वहीं चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए और स्थिर द्विपक्षीय संबंधों पर ज़ोर दिया.
शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा था कि दोनों नेता चीन और अमेरिका में जारी होड़ के प्रबंधन पर बात करेंगे और साथ ही साझे हितों को लेकर साथ मिलकर काम करने पर भी बात करेंगे.
शी जिनपिंग ने इस बैठक में कहा कि दोनों देशों में संवाद बढ़ाने की ज़रूरत है और चुनौतियों का सामना साथ मिलकर करने की ज़रूरत है.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बाइडन ने ये भी कहा, "शायद मुझे और औपचारिक तरीक़े से शुरू करना चाहिए, हालांकि मैं और आप कभी एक दूसरे के साथ औपचारिक नहीं रहे हैं."
उन्होंने कहा कि, "हम दोनों ने हमेशा एक दूसरे के साथ पूरी ईमानदारी और स्पष्टता के साथ बातचीत की है, हम कभी ये सोच कर पीछे नहीं हटते कि दूसरा क्या सोच रहा है."
हाल के महीनों में चीन और अमेरिका के बीच ताइवान समेत कई अहम मुद्दों के लेकर तनाव बढ़ा है.
शी जिनपिंग ने ये भी कहा कि दोनों देशों के संबंध पटरी पर रहना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि पूरी दुनिया कोविड महामारी और जलवायु परिवर्तन के संकट की चपेट में है.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले दो सालों से चीन से बाहर नहीं गए हैं. यहाँ तक कि वो जी-20 समिट में भी शामिल नहीं हुए थे.
बाइडन क्या चाहते हैं?
झाओयिन फेंग, बीबीसी न्यूज़, वॉशिंगटन
उम्मीदें कम हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि यह बैठक हो रही है और यही अपने आप में सबसे बड़ा नतीजा है. दोनों पक्ष अमेरिका-चीन संबंधों को सुधारना चाहता है, जिसमें बीते कुछ वर्षों में बहुत तेज़ी से गिरावट देखी गई है.
बातचीत में ताइवान सबसे बड़ा एजेंडा है. बाइडन चाहते हैं कि शी जिनपिंग ताइवान के साथ शांति बनाए रखें जबकि चीन ने हाल के दिनों में इस द्वीप पर सैन्य दबाव बनाने की अपनी बढ़ती इच्छा दिखाई है. बदले में, अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने चीनी समकक्ष को इस बात का आश्वासन देना होगा कि अमेरिका ताइवान की संप्रभुता पर कोई रुख नहीं अपनाएगा.
इस मुलाक़ात में बाइडन के पास शी को इस बात के लिए राज़ी करने का मौका भी होगा कि चीन को लेकर अमेरिकी प्रशासन की रणनीति द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक स्थिर बुनियाद हो सकती है.
बाइडन के चीन के सिद्धांत को उनके विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इस प्रकार व्यक्त किया था- प्रतिस्पर्धी, जब होना चाहिए. सहयोगी, जब ये हो सकता है. और प्रतिकूल, जब इसे ज़रूर होना चाहिए.
लेकिन चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु जैसे सहयोग के मुद्दों को राजनयिक संबंधों में विवादित मुद्दों से अलग नहीं किया जा सकता.
सितंबर में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था, "रेगिस्तान में 'नख़लिस्तान' बहुत देर तक नहीं टिक सकता, देर सबेर यह मरुस्थल ही बन जाएगा."
क्या ये बातचीत रेगिस्तान में पानी लाएगी और आग को बुझाने का काम करेगी?
शी जिनपिंग क्या चाहते हैं?
रॉबिन ब्रांट, बीबीसी न्यूज़, शंघाई
चीन के पूर्वी तट पर स्थित द्वीप ताइवान अपने लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति के साथ एशिया के बाहर भले ही अस्पष्ट सा मुद्दा दिखता हो लेकिन चीन के लिए यह वैसा अलग हुआ प्रांत है जो हमेशा से अपनी मातृभूमि के साथ वापस जुड़ना चाहता है.
लेकिन अभी कुछ ही हफ़्ते पहले बाइडन ने ये कह दिया था कि अगर ताइवान पर चीन ने हमला किया तो वो अमेरिका उसकी रक्षा करेगा. जिनपिंग इस पर स्पष्टीकरण चाहेंगे. (हालांकि, हाल के मीडिया रिपोर्टों में आई तस्वीरों के मुताबिक चीनी सेना अपने अभ्यास के दौरान अमेरिकी एयरक्राफ्ट्स जैसी बनावट के लक्ष्य का इस्तेमाल करती देखी गई है)
युद्ध की संभावना कितनी है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ताइवान का मुद्दा बातचीत में सबसे ऊपर है.
संबंध ख़राब स्थिति में है. व्हाइट हाउस के आदेश पर अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों से जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक दो बार कोविड-19 से जुड़ी जांच पर चीन की ओर से स्पष्टता की कमी को दोहराया गया है.
बीते हफ़्ते ही राष्ट्रपति बाइडन ने एक चीनी टेलीकॉम कंपनी के साथ व्यापार प्रतिबंध लगाने पर अपनी सहमति व्यक्त की है. वे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव और ताक़त को चुनौती देने वाले गठबंधनों के पुर्नगठन को शुरू करने में भी सफल रहे हैं.
जैसा कि हम सबने नोट किया है, चीन ने भी यह देखा होगा कि बीते सितंबर में फ़ोन पर जब इन दोनों ने बात की थी तब आधिकारिक वक्तव्य की अंतिम पंक्ति में यह चेतावनी दी गई थी कि दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना है कि "प्रतिस्पर्धा, टकराव में न बदले."
निश्चित तौर पर बहुस्तरीय तंत्र एक बार फिर स्थापित की जा सकती है, और यह बातचीत से संभव है.
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